
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का सबसे बड़ा वादा ही उनके लिए मुसीबत बनता दिख रहा है। उनके तीन साल के कार्यकाल में नई नौकरियों के मौके में 60 फीसदी से ज्यादा की गिरावट आई है जबकि उनका हर साल 2 करोड़ नौकरियां के अवसर मुहैया कराने का वादा था। मोदी सरकार के लिए यह मामला कितना गंभीर हो गया है कि इसका अंदाजा कैबिनेट फेरबदल में लेबर मिनिस्टर और स्क्लि डेवलमपमेंट मिनिस्टर के अपना स्थान बरकरार न रख पाने से लगाया जा सकता है।
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