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Friday, 12 January 2018

बैलगाड़ी-साइकिल पर रॉकेट ढोता था जानें, इसरो से जुड़ी ये प्रमुख बातें…


इससे पहले इसरो ने एक साथ 104 सैटेलाइट्स को लांच करके नया इतिहास रचा था एक अंतरिक्ष अभियान में इससे पहले इतने उपग्रह एक साथ नहीं छोड़े गए थे इसरो का अपना रिकॉर्ड एक अभियान में 20 उपग्रहों को प्रक्षेपित करने का है इसरो ने ये कारनामा 2016 में किया था यह काम कर भारत ने रूस को भी पीछे कर दिया था। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन ने अंतरिक्ष की दुनिया में एक और बड़ी छलांग लगाई है इसरो का सैटेलाइट भेजने का शतक पूरा हो गया है इससे पहले भी इसरो ने कई इतिहास रचे हैं क्या आप जानते हैं इसरो का सफर बैलगाड़ी से शुरू हुआ था और आज इसरो ने रूस जैसे कई देशों को पीछे छोड़ दिया है।

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इसरो ने सुबह 9.28 पर पीएसएलवी के जरिए एक साथ 31 उपग्रह को लॉन्च किया भेजे गए कुल 31 उपग्रहों में से तीन भारतीय हैं और 28 छह देशों से हैं: कनाडा, फिनलैंड, फ्रांस, दक्षिण कोरिया, ब्रिटेन और अमेरिका पृथ्वी अवलोकन के लिए 710 किलोग्राम का काटरेसेट-2 सीरीज मिशन का प्राथमिक उपग्रह है इसके साथ सह यात्री उपग्रह भी है जिसमें 100 किलोग्राम का माइक्रो और 10 किलोग्राम का नैनो उपग्रह भी शामिल हैं।

इसरो की यात्रा भारत में अंतरिक्ष कार्यक्रमों के जनक माने जाने वाले डॉ विक्रम ए साराभाई की सूझबूझ से शुरू हुई। टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ फंडामेंटल रिसर्च में उसका जन्म हुआ और वहां से शुरू होकर अंतरिक्ष कार्यक्रम बना फिर इंडियन स्पेस रिसर्च ऑर्गनाइज़ेशन बना।

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पिछले कुछ वर्षों में भारत अपने अंतरिक्ष मिशन में तेजी लाया है. 2016 की करीब दर्जनभर उपलब्धियों में दिसम्बर में रिमोर्ट सेंसिंग उपग्रह रिसोर्ससैट-2 के सफलतापूर्वक कार्य करने और जून में अकेले अंतरिक्ष उपग्रह में 20 उपग्रहों, 3 नेवीगेशन उपग्रहों और जीसैट-18 संचार उपग्रहों का रिकॉर्ड प्रक्षेपण शामिल है।

इसरो की अगली बड़ी योजना सौर प्रभामंडल (कोरोनाग्राफ के साथ – एक टेलीस्कोप), फोटोस्फेयर, वर्णमण्डल (सूर्य की तीन प्रमुख बाहरी परतें) और सौर वायु का अध्ययन करने के लिए सूर्य में वैज्ञानिक मिशन भेजना है श्रीहरिकोटा से पीएसएलवी-एक्सएल द्वारा इसे 2020 में छोड़ा जाना है आदित्य-एल1 उपग्रह कक्षा से सूर्य का अध्ययन करेगा जो पृथ्वी से करीब 1.5 मिलियन किलोमीटर दूर है।

देश ने पहली बार 21 नवंबर 1963 को केरल में मछली पकड़ने वाले क्षेत्र थुंबा से अमेरिकी निर्मित दो-चरण वाला साउंडिंग रॉकेट (पहला रॉकेट) नाइक-अपाचे का प्रक्षेपण कर अंतरिक्ष पर पहला हस्ताक्षर किया तिरुअनंतपुरम के बाहरी हिस्से स्थित थुंबा भूमध्यरेखीय रॉकेट प्रक्षेपण स्टेशन पर कोई इमारत नहीं थी इसलिए बिशप के घर को निदेशक का कार्यालय बनाया गया प्राचीन सेंट मैरी मेगडलीन चर्च की इमारत कंट्रोल रूम बनी और नंगी आंखों से धुआँ देखा गया यहां तक की रॉकेट के कलपुर्जों और अंतरिक्ष उपकरणों को प्रक्षेपण स्थल पर बैलगाड़ी और साइकिल से ले जाया गया था।

इसके करीब 12 वर्ष बाद भारत ने अपने पहले प्रायोगिक उपग्रह आर्यभट्ट के साथ अंतरिक्ष युग में प्रवेश किया जिसे 1975 में रूसी रॉकेट पर रवाना किया गया।

इसरो के पूर्व अध्यक्ष डॉ. यू.आर.राव ने एक इंटरव्यू में बताया कि उन दिनों बुनियादी ढांचा उपलब्ध नहीं था जो कुछ उपलब्ध था हमने उसका इस्तेमाल किया यहां तक की हमने बैंगलोर में एक शौचालय को डेटा प्राप्त करने के केंद्र में तब्दील कर दिया।

थुंबा से सफर शुरू करने से लेकर भारत का अंतरिक्ष सफर काफी आगे निकल चुका है भारत ने चंद्रमा संबंधी अनुसंधान शुरू करने उपग्रह बनाने अन्य के लिए भी विदेशी उपग्रहों को ले जाने और मंगल तक पहुंचने में सफलता अर्जित कर दुनियाभर में अपनी पहचान बना ली है।

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