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Wednesday, 24 January 2018

आखिरकार उषा मौर्या से मात खा गए, सपा के दिग्गज पूर्व मंत्री पारस यादव

जौनपुर। नायब तहसीलदारा की कोर्ट से लेकर सुप्रीमकोर्ट तक लड़ाई लड़कर जनपद के सबसे रसूखदार नेता के चंगुल से अखिरकार उषा मौर्या ने अपनी जमीन वापस ले ही लिया। एक साधरण महिला के हौसले का कमाल रहा है कि वह ऐसे नेता को पटखनी दिया है जिसके आगे जनपद ही नही बल्की प्रदेश की बड़ी बड़ी हस्तियां नतमस्तक होती है। उषा की इस लड़ाई में साथ दिया उसकी नाबालिंग बेटी उजाला मौर्या ने। उषा अपने जीत का श्रेय राज्यपाल उत्तर प्रदेश राम नाईक और प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के अलावा मीडिया को दिया है। अपनी जीत से उत्साहित उषा मौर्या अपने जैसे दबे कुचले पीड़ितो के लिए संघर्ष करने का निर्णय लिया है।

उषा मौर्या ने बताया कि नगर के लाईन बाजार थाना क्षेत्र के पचहटियां में स्थित 65 विस्चा जमीन का बैनामा कैविनेट मंत्री पारसनाथ यादव व उसके पुत्र लकी यादव ने अपने गुर्गे दिलीप कुमार प्रजापति के नाम फर्जी खतौनी के आधार पर 11/02/2013 को अवैध बैनामा दर्शाकर शासन का सत्ता का दुरूपयोग करते हुए जबरदस्ती जमीन अपने गाय भैस के लिए चारें और फसल की बोआई करता था। यह जमीन सपा विधायक पारसनाथ यादव के ओम कोल्ड स्टोरेज के पीछे है, इस लिए कई वर्षो से पारसनाथ यादव व उसके पुत्र लकी यादव की निगाहें इस जमीन पर थी। कब्जे के बाद से मैं उषा मौर्या शासन से लेकर प्रशासन तक प्रार्थना पत्र देकर न्याय की गुहार परन्तु कही कोई सुनवाही नही हुई 01/10/2015 को महामहिम राज्यपाल महोदय की सहायत से मुख्यमंत्री अखिलेश यादव से मिलकर पारसनाथ यादव व उसके पुत्र लकी यादव द्वारा की गई जमीन पर से कब्जा हटवाने एंव अन्य अवैध कार्य कोल्ड स्टोरेज स्टैम्प घोटाला पोखरे तालाब की जमीन पर अवैध कब्जा बेनामी सम्पत्ति का सारा दस्तावेज सौपते हुए जांच करवा कर पारसनाथ यादव व उसके पुुत्र लकी यादव के खिलाफ माॅग की।
परन्तु मुख्य मंत्री अखिलेश यादव एक संवेदनहीन मुख्यमंत्री की भूमिका निभाते हुए पारसनाथ यादव व उसके पुत्र लकी यादव के खिलाफ कोई उचित कार्यवाही के निर्देश नही दिये।
इससे पारसनाथ यादव व उसके पुत्रों का मनोबल बढ़ गया तब से लगातार ये लोग मुझे व मेरी बेटी को हृदयविदारक रूप से प्रताड़ित करते रहें। और जिले में मुख्य मंत्री एंव समाजवादी पार्टी के बडे नेताओं के आगमन पर मुझे कैदियों की तरह कैद कर लिया जाता था मेरी बेटी दर दर रोती भटकती रहती थी सिर्फ मीडिया ही उसका सहारा था। 5 वर्षो तक अखिलेश सरकार में न्याय न मिलने के बाद भी मैं न्याय की उम्मीद नही छोड़ी।

भारतीय जनता पार्टी की सरकार बनते ही 19 जुलाई 2017 को एंटी भू माफिया टीम के तहत जिला प्रशासन ने जाँच करवा कर न्यायालय के आदेश दिनांक 10 अप्रैल 2015 का अनुपालन मौके पर करवा कर प्रार्थीनी को पुनः जमीन पर कब्जा दिलवा दिया। जिससे क्षुब्ध होकर पारसनाथ यादव व उसके पुत्र लकी यादव ने माननीय उच्च न्यायलय मे रीट संख्या 35453 08/08/2017 की दिलीप कुमार बनाम स्टेट आॅफ यू0पी दाखिल की जिसमें यू0पी0 सरकार, जिलाधिकारी, पुलिस अधिक्षक सहित कुल 12 लोगो को पार्टी बनाकर पुनः कब्जा वापस दिलाने व प्रशासनिक अधिकारीयों के खिलाफ माँग की परन्तु माननीय उच्च न्यायलय ने पारसनाथ यादव के द्वारा 5 वर्षो तक किये गयें सभी जुर्म व अत्याचार से सम्बन्धित दाखिल किये गये कागजातो को देखते हुए प्रशासन द्वारा उषा मौर्या को दिलाये गये कब्जे को सही ठहराते हुए पावर फुल मंत्री के द्वारा शासन सत्ता के दुरूपयोग से जमीन पर काबीज होने की माँग को ठुकराते हुए 07 नवम्बर 2017 को विधिवत 11 पृष्ठ का निर्णय पारित करते हुए पारसनाथ का मुकदमा खारीज कर दिया।

माननीय उच्च न्यायालय के आदेश दिनांक 07 नवम्बर 2017 के खिलाफ माननीय सर्वोच्च न्यायलय में पुनः पारसनाथ यादव 08 दिसम्बर 2017 को एस0 पी0 एल0 नम्बर 40/2018 दिलीप कुमार बानाम स्टेट आॅफ यू0पी दाखिल करते हुए पुनः उपरोक्त 12 लोगो को पार्टी बनाकर उच्च न्यायलय के आदेश दिनांक 07 नवम्बर 2017 को स्थागित करने एंव प्रशासनिक अधिकारियों के खिलाफ कार्यवाही करतें हुए पुनः कब्जा वापस दिलाने की माँग की परन्तु सर्वोच्चय न्यायलय ने भी प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा उषा मौर्या को दिलाये गये कब्जे को सही ठहराते हुए पारसनाथ के सभी गलत माॅग को ठुकराते हुए दिनांक 22 जनवरी 2018 को केस एडमिड करने से इन्कार करते हुए पहली सुनवाही पर ही खारिज कर दिया।

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