
लखनऊ। लेखपालों के बहिष्कार के चौथे दिन ई-डिस्ट्रिक्ट पोर्टल पर आय, जाति व निवास प्रमाणपत्रों का ढेर लगता जा रहा है। पोर्टल पर बिना सत्यापन के आवेदित प्रमाण पत्रों की संख्या 2,09,262 लाख हो गई है। इनमें छात्रवृत्ति और अन्य लाभार्थी योजनाओं के आवेदन सबसे अधिक है। राजधानी लखनऊ में भी अटके आवेदनों की संख्या करीब 3,377 है। मालूम हो कि लैपटॉप व मोबाइल की मांग को लेकर 26 जून से प्रदेश भर के लेखपालों ने ई-डिस्ट्रिक्ट पर आये आवेदनों के सत्यापन का काम बंद कर दिया है। इससे बीते तीन दिनों से एक भी आय, जाति व निवास प्रमाण पत्र जारी नहीं हुए हैं। तीन दिनों में प्रदेश भर में करीब 1.30 लाख आवेदन हो चुके हैं और इनका सत्यापन नहीं हुआ है। इनमें एक जुलाई से शुरू हो रहे नये शिक्षा सत्र में दाखिला और छात्रवृत्ति के लिए आवेदन करने वाले छात्रों की संख्या सबसे अधिक है। वहीं वृद्ध, दिव्यांग व निराश्रित महिला पेंशन के लिए आय प्रमाणपत्र का आवेदन करने वाले गरीब भी बड़ी संख्या में शामिल हैं। इसके अलावा मुख्यमंत्री आर्थिक सहायता, राष्ट्रीय पारिवारिक लाभ योजना, डूडा व प्रधानमंत्री आवास योजना समेत गरीबों की 17 योजनाओं के लाभार्थियों के प्रमाणपत्र जारी होने का काम ठप है। उत्तर प्रदेश लेखपाल संघ के उपाध्यक्ष मध्य जोन भूपेंद्र सिंह बताते है कि लेखपाल वर्षों से वेतन, भत्ते, पदनाम, लैपटॉप व मोबाइल समेत कई अन्य मांगो को लेकर संघर्ष कर रहे हैं। किसी भी सरकार ने अभी तक एक मांग भी नही मानी है। इस कारण लेखपाल संघ ने ई-डिस्ट्रिक के तहत आने वाली सेवाओं का बहिष्कार किया है। लखनऊ जिलाध्यक्ष सुशील शुक्ल बताते हैं कि अब लेखपालों को सारी रिपोर्ट ऑनलाइन लगानी पड़ती है। इस पर हर माह लेखपालों को इंटरनेट के लिए करीब दो हज़ार रुपये तक अपनी जेब से खर्च करने पड़ते हैं। सरकार ने लैपटॉप के लिए बजट पास कर दिया है, लेकिन लैपटॉप लेखपालों को अभी तक नही मिले है।
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Friday, 29 June 2018
पोर्टल पर आवेदन पहुंचा 2 लाख से ऊपर, लेखपालों की हड़ताल का असर
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