
बाराबंकी। उत्तर प्रदेश के बाराबंकी जिले में दबंग प्रधानपति और उसके पुत्र द्वारा एक दलित महिला से साथ मारपीट व बदसलूकी की खबर छापना एक पत्रकार को इतना महंगा पड़ा कि दबंग प्रधान ने स्थानीय पुलिस से मिलीभगत कर उसे झूठे मुकदमें में फंसाकर उसका उत्पीड़न शुरू कर दिया। सनद रहे कि बाराबंकी की सुबेहा पुलिस इसके पहले भी भ्रष्टाचार की पोल खोले जाने से नाराज होकर पत्रकार को फर्जी मुकदमे में फसाने की लगातार धमकियां दे रही थी। इसका विरोध करते हुए जनपद के पत्रकारों ने दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।
इस संबंध में थाना प्रभारी सुबेहा जितेंद्र सिंह ने सफाई देते हुए कहा कि करीब एक दर्जन ग्राम प्रधान थाने पर आये थे। उन्होंने केस दर्ज करने के लिए दबाव बनाया। हम मौके पर मौजूद नहीं थे। ग्राम प्रधान काफी प्रभावशाली हैं। वो लोग कई दिनों से केस दर्ज करने का दबाव बना रहे थे। मैंने मामले को टालने की कोशिश की लेकिन मज़बूरी में मुझे केस दर्ज करवाना पड़ा। हालांकि इस पूरे मामले में थाना प्रभारी कितना सही कह रहे हैं ये जांच के बाद पता चल पायेगा। इस घटना से ये साफ तौर पर पता चल रहा है कि थाने को पुलिस ने दबंग लोग ही चला रहे हैं।
शिकायत पर दबंग प्रधान के की थी पिटाई
दरअसल ये मामला बाराबंकी जिले के थाना सुबेहा अंतर्गत ग्राम पंचायत चकौरा का है। यहां की निवासी सीमा पत्नी सूबेदार ने आवास एवं इज्जतघर की मांग कई बार ग्राम प्रधान से की। मगर प्रधान के ना सुनने के बाद इसकी शिकायत कुछ बुद्धजीवियो से कर दी। जिसके बाद प्रधान पति आग बबूला हो गया। 6 अगस्त की सुबह लगभग 8 बजे ग्राम प्रधान पति इंद्रजीत यादव व उनके पुत्र रिंकू, कोटेदार अचल यादव, परशुराम,विश्वनाथ आदि साथियों ने पीड़िता को गांव के बाहर बने घाट पर घेर लिया और गंदी-गंदी गालियां देते हुए मारपीट की। इस दौरान महिला के कपड़े खुल गए और पीड़िता लज्जाहीन हो गई। दबंगों ने धारदार हथियार से भी पीड़िता महिला के पति सूबेदार पर हमला करने की कोशिश की किसी तरह से जान बचा कर महिला अपने पति को लेकर वहां से भाग निकली।
रियलिटी चेक के दौरान ग्रामीणों ने लगाए आरोप
जब इस मामले पर जांच करने चकौरा गांव हमारी टीम पहुंची तो कहीं ना कहीं आरोप सत्य साबित हुआ। गांव का मंजर वाकई व्यवस्थाओं और भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ा हुआ था और ग्रामीणों ने भी महिला द्वारा लगाये गये आरोपो की पुष्टि की।
न्याय के लिए 6 दिन से थाने का चक्कर काट रही दलित महिला
उत्तर प्रदेश का निजाम बदला, परंतु सूरत बदलती नहीं दिख रही। दबंगो और पुलिस के मिजाज नहीं बदल रहे वह अपने रुतबे का अहसास करा रहे हैं। तभी तो दलित महिला पिछले 6 दिन से न्याय के लिए थाना सुबेहा के चक्कर काट रही है। परंतु न्याय मिलना तो दूर पुलिस उसकी सुन तक नहीं रहे यही नही पीडि़त महिला न्याय की आस में पुलिस महानिरीक्षक पुलिस अधीक्षक बाराबंकी सहित बाराबंकी के जनप्रतिनिधियों से गुहार लगाई है। लेकिन अभी तक कही से कोई सुनवाई नही हुई।
रुपयों और आवास लालच देकर सुलह-समझौता का दबाव
योगी सरकार प्रदेश को अपराध मुक्त बनाने के दावे करती है। लेकिन इन दावों पर पुलिस का रवैया पानी फेर देता है। सरकार का आदेश है कि दलित से मारपीट और बदसलूकी जैसे आपराधिक मामले तुरंत दर्ज किये जाए। बावजूद इसके पुलिस ऐसे तमाम मामलों को दबाने का भरपूर प्रयास पीड़िता का आरोप है कि सुबेहा पुलिस और प्रधान पति रुपयों और आवास लालच देकर सुलह-समझौता का दबाव बनाती रही, लेकिन उन्होंने रुपये लेने से इनकार कर दिया 6 दिन से अधिक बीत जाने के बाद भी अभी तक पीड़िता को न्याय नही मिला और पैसा लेकर पूरे मामले को रफा-दफा करने की बात कही गई।
दलित महिला की आवाज को बुलन्द करना परेशानी का बना सबब
जब इस पूरे मामले की खबर को हमारे संवाददाता ने 6 अगस्त को “इज्जतघर की मांग करना दलित महिला को पड़ा महंगा” नामक शीषर्क से प्रकाशित की तो भ्रष्टाचार की पोल खोले जाने और दलित महिला की आवाज को बुलंद करने से नाराज होकर दबंग प्रधान पति ने सुबेहा पुलिस से साठगाँठ कर 11 अगस्त को IPC 384 में मामला दर्ज करवा दिया। अंदरखाने की खबर है कि थाना प्रभारी सुबेहा को मुकदमा लिखने की एवज में 20 हजार रुपये मिले भी है।

No comments:
Post a Comment