अनुबंध पर बहाल हुये थे रिटायर्ड डीएसपी , 25 को पहले ही विभाग ने दिया था हटा
>> पटना ,भोजपुर, वैशाली सहित सभी जिले में फल-फूल रहा हैं अवैध बालू खनन का कारोबार
>> तरूणमित्र के प्रकाशित खबरों पर पटना हाईकोर्ट में फाइल हुआ हैं तीन जनहित याचिका
पटना ( अ सं ) । बालू माफिया के आगे सरकार और व्यवस्था तंत्र बौना साबित होता हैं ,यह मेरा कोई आरोप नहीं बल्कि यहीं आवाज बिहार के कोने -कोने में सुनने को मिलेगा । कड़क आईएएस के के पाठक ,खनन विभाग तो पटरी पर ला ही रहे थे की ट्रांसफर कर दिया गया ,जैसा की सरकार ऐसा करते आयी हैं । के के पाठक के समय में ही खनन विभाग में 35-36 ,रिटायर्ड डीएसपी को अनुबंध पर खान निरीक्षक के पद पर बहाल किया गया । के के पाठक हटे तो पहले 25 खान निरीक्षको की सेवा समाप्त कर दिया गया । 11 अभी कार्यरत थे। बीते 19 अप्रैल को इनका भी सेवा समाप्त कर दिया गया । चुकी विभाग को ऐसी सूचना मिली की खान निरीक्षक के पद पर बहाल ,जारी अवैध खनन को रोकने में असफल है और बालू माफियाओं से सेटिंग कर लिये हैं । सेवा मुक्त किये गये खान निरीक्षकों का कहना हैं की विभाग ने सेवा मुक्त करने से पहले नोटिस नहीं किया । जबकि विभाग का कहना हैं की अनुबंध के समय ही शर्तें लागू थी की विभाग जब भी चाहें आपको बिना नोटिस के हटा सकती हैं ।
जहां तक अवैध बालू खनन की बात हैं पटना ,भोजपुर ,वैशाली सहित तमाम जिले में अंधाधून बालू खनन किया जा रहा हैं और नदी के अस्तित्व को ही समाप्त करने पर तुले है। पर्यावरण का नुकसान के साथ ही एनजीटी के गाइड लाइन का कोई पालन नहीं हो रहा हैं । तीन मीटर गड्ढे की जगह तीस मीटर गड्ढा आम हैं । नदी में पानी के अंदर से पॉकलेन द्वारा बालू का निकासी किया जा रहा हैं । कोई ई सी क्षेत्र नहीं हैं ।इसका खुलासा तरूणमित्र अखबार ने किया हैं । पटना हाईकोर्ट के अधिवक्ता मणि भूषण सिंगर ने तीन जनहित याचिका दाखिल किया हैं ।

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