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Sunday, 21 April 2019

अब आप नीचे मछलियां उपर, भारत का पहला अंडरग्राउंड एक्वैरियम आज से आरंभ

# 115 करोड़ की लागत से बनाई गई
# 75000 वर्ग फुट के क्षेत्रफल में फैला
# 150 समुद्री मछलियों की प्रजातियां सम्मिलित

तमिलनाडु ब्यूरो से डॉ आर.बी. चौधरी
चेन्नई (तमिलनाडु)। दक्षिण भारत की गर्मी कुछ अलग तरह की होती है।यहां गर्म हवा के झोंके और लू नहीं चलता। किंतु,उमस भरी चिलचिलाती धूप में कुछ ठंडी का एहसास कराते हुए नम हवाएं जरूर चलती हैं।स्कूलों की छुट्टियों में मनोरंजन की बात आती है तो यहां समुद्र तट पर झील का नजारा कुछ और ही होता है। इस सालकी गर्मीएक नई सौगात के साथ लौटी है। आज सेईस्ट कोस्ट रोड परएक विशाल एक्वेरियम का शुभारंभ हो गया। बताया जा रहा है कि 75000 वर्ग फीट के क्षेत्रफल में बना हुआ यह अंडरग्राउंड एक्वेरियम देश का इकलौता एक्वेरियम है। ईसीआर रोड पर निर्मित एक्वेरियम में 6.5 फुट की गहराई पर पाई जाने वाली अनेक समुद्री समुद्री जीव-जंतुओं को देखा जा सकता है। एक्वेरियम के निवासी जीव जंतुओं हेतु एक 70-मीटर लंबी सुरंग बनाई गई है जिसके माध्यम से कोई भी उन्हें करीब से देख सकता है। इस एक्वेरियम के निर्माण में पुल 115 करोड़ रुपए की लागत लगी है।

चेन्नई शहर में “वीजीपी मरीन किंगडम” नामक जगह पर यहएक्वेरियम बनाई गई हैं। एक्वेरियम में पाई जाने वाली मछलियों कि वह प्रजातियां सम्मिलित की गई है जो उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में ताजे पानी, खारे पानी और समुद्री जल में रहती हैं। दर्शकों को 35 प्रदर्शन यूनिट में जाने के लिए आराम देह रास्ता ,बीच बीच में बैठने जगह और गहरी समुद्री प्रजातियों के मनोरम दृश्य का आनंद लेने के लिए अन्य सुविधाओ की भी व्यवस्था की गई है। एक्वेरियम के एक अधिकारी के अनुसार रंगीन सजावटी मछलियों से भरे टैंकों के नीचे क्रॉल कर सकते हैं। साथ ही साथ कुछ मछलियों को खिला सकते हैं या सबसे बड़े टैंक में गोता लगा सकते हैं। इतना ही नहीं दर्शक 30 मीटर लंबा और 40 मीटर चौड़ा एक डिज़ाइन किया गया समुद्र की गहराई में चलने के लिए कृत्रिम जहाज़ की भी व्यवस्था की गई है जो समुद्र के धरातल पर उपस्थित वातावरण का आनंद मिलेगा ।

बताया जा रहा है कि इस एरिया मेंकई महत्वपूर्ण मछलियां जैसे शार्क, स्टिंग्रेज़ और बैटफ़िश ,ग्रुपर्स, बटरफ्लाई फिश, स्टिंग्रेज़, बैटफिश, ट्रेवली और लेमन शार्क सहित 150 से अधिक समुद्री मछलियां देखने को मिलेगी। इन मछलियों को रामेश्वरम से लेकर इंडोनेशिया, मालदीव, श्रीलंका और थाईलैंड किस समुद्री इलाकों से एकत्र किया गया है।इस एक्वेरियम में मल्टीपल फिश टैंक के अलावा अंडरवाटर टनल बनाया गया है जहाँ कोई भी खड़ा हो सकता है और समुद्री बजाज के सभी परियों को देख सत्ता है। मजेदार बात तो यह है कि गोताखोर उन्हें खाना खिलाते हैं तो उस समय आज्ञा अनुसार वॉल्केटर से गुजर सकता है। आमतौर से लोग मछली को उनके आवास और खाने की आदतों के अनुसार वर्गीकृत करते हैं। एक विशेषज्ञ ने बताया कि ग्रुपर्स को हर रोज चारा दाना डालने की आवश्यकता नहीं होती है लेकिन तितली मछलियों को दिन में दो से तीन बार खाना देना पड़ता है। शार्क मछलियां तो ऊर्जा को तेजी जलाती हैं क्योंकि वे चलती रहती हैं।

बताया जाता है किएक्वेरियम में अभी बहुत सारा कार्य बाकी है जो तेजी के साथ पूरा किया जा रहा है। जिस समय स्त्रियों की स्थापना की गई थी तो उस समय यह निर्णय लिया गया किअत्याधुनिक सुविधा में एक अंडरग्राउंड टनल एक्वेरियम, एम्फी थिएटर, फूड कोर्ट और एक समुद्री जैव-प्रौद्योगिकी अनुसंधान केंद्र स्थापित करना शामिल है। पानी के भीतर चलने वाली सुरंग, एक पैदल मार्ग के साथ, 45 से 50 मीटर की दूरी तक जाएगी। एक्वेरियम में टच पूल के साथ दुनिया भर से 2,000 से अधिक समुद्री प्रजातियों की सुविधा होगी जहां आगंतुक स्पर्श कर सकते हैं और महसूस कर सकते हैं। परियोजना भूजल का प्रबंधन करेगी और प्राकृतिक आवास का अनुकरण करने के लिए इसे संसाधित करेगी।

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