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Wednesday, 24 April 2019

केके अस्पताल में डॉक्टरों की गुंडई से बुजुर्ग मरीज की मौत पर हंगामा

लखनऊ। राजधानी लखनऊ के वजीरगंज थाना क्षेत्र स्थित केके हॉस्पिटल में मंगलवार को एक बुजुर्ग मरीज की मौत हो गई। तीमारदारों ने डॉक्टरों पर इलाज में लापरवाही का आरोप लगाकर हंगामा करने लगे। आरोप है कि इसके बाद अस्पताल के कर्मचारियों ने तीमारदारों को बंधक बनाकर लाठी डंडों से पीटा। सूचना पर पहुंची पुलिस ने शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया। वहीं, तीमारदारों ने केके हॉस्पिटल के खिलाफ एफआईआर दर्ज करवाकर न्याय की मांग की है।

जानकारी के अनुसार।, रायबरेली के हरिमेश कुमार के पिता हनुमान सिंह (69) को सांस की तकलीफ थी। परिवारीजनों ने रविवार रात मरीज को केके हॉस्पिटल में भर्ती करवाया। हरिमेश का आरोप है कि पिता को भर्ती किए हुए तीन दिन हो गए थे, लेकिन एक भी डॉक्टर उनको देखने तक नहीं आए। केवल नर्स व कम्पाउंड ही इलाज करते रहे। इलाज में लापरवाही होने की वजह से मंगलवार सुबह उनकी मौत हो गई। तीमारदार ने लापरवाही का आरोप लगाते हुए अस्पताल में हंगामा करने लगे। हरिमेश के मुताबिक अस्पताल के डॉक्टर केके आपने दर्जनों कर्मचारी इकठ्ठा करके विमलेश, आदित्य राज और उनको लाठी डंडे से पीटने लगे। आरोप है कि डॉ. केके ने ब्लेड से आदित्य राज को वार किया, जिससे उसकी कलाई कट गई। हरिमेश का आरोप है कि डॉक्टरों ने उन्हे जाति सूचक गाली देकर उन्हें डंडो से पीटा है। तीमारदारों ने 100 नंबर पर पुलिस को सूचना दे दी। मौके पर पहुंची पुलिस ने मारपीट में घायल तीनों तीमारदारों को बलरामपुर अस्पताल में इलाज करवाने भेज दिया है। साथ ही शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया।

नाक में नली डालते हुए मौत
हरिमेश बताते हैं कि वह बसपा के लखनऊ मंडल को-ऑर्डिनेटर हैं। उनका आरोप है कि कम्पाउंड नाक में नली डाल रहा था। गलत तरीके से नली डालते वक्त उसके पिता को असहनीय पीड़ा हुई और फिर उनकी मौत हो गई।

तीमारदारों की लापरवाही से मरीज की हुई मौत
केके हॉस्पिटल के संस्थापक डॉ. केएम सिंह ने बताया कि तीमारदारों की लापरवाही से मरीज की मौत हुई है। मरीज का फेफड़ा गल गया था, इसलिए उसे आईसीयू में भर्ती किया गया था। साथ ही तीमारदारों को बता दिया गया था, कि मरीज को खाना न खिलाएं, लेकिन तीमारदारों ने रात में मरीज को खाना खिला दिया था। खाना गले में अटक गया था, जिसकी वजह से मरीज की उसकी मौत हो गई। तीमारादारों ने जो बंधक बनाकर पीटने के आरोप को लगाया है वह गलत है। उल्टा तीमारदारों ने अस्पताल में तोड़फोड़ करने के साथ कर्मचारियों को पीटा है, इसलिए तीमारदारों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करवाई गई है।

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