लखनऊ। सपा शासनकाल में चकबंदी लेखपाल के अनारक्षित पदों पर गलत तरीके से अन्य पिछड़ा वर्ग के अभ्यर्थियों के चयन व बाबुओं के प्रमोशन में अनियमितता व भ्रष्टाचार के खुलासे के बाद कार्रवाई शुरू हो गई है। कृषि उत्पादन आयुक्त की अलग-अलग जांच रिपोर्ट पर मुख्यमंत्री द्वारा कार्रवाई की मंजूरी देने के बाद शासन ने दोनों ही मामलों में जिम्मेदार कर्मियों के खिलाफ अलग-अलग एफआईआर दर्ज कराने के साथ ही जिम्मेदार अफसरों व कर्मियों के खिलाफ निलंबन व विभागीय कार्यवाही शुरू कर दी है।
चकबंदी लेखपालों के रिक्त पदों पर चयन के लिए वर्ष 2018 में अधीनस्थ सेवा चयन आयोग लखनऊ को त्रुटिपूर्ण अधियाचन भेजने के मामले में चकबंदी आयुक्त शारदा सिंह पहले ही निलंबित की जा चुकी हैं। राजस्व विभाग ने एपीसी की जांच रिपोर्ट आने के बाद शारदा के खिलाफ अनुशासनिक जांच शुरू करने के लिए नियुक्ति विभाग को आरोप पत्र उपलब्ध करा दिया है। इसके अलावा अधीनस्थ सेवा चयन आयोग के तत्कालीन चेयरमैन राजकिशोर यादव व आयोग के एक सदस्य सहित चार कर्मियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने के आदेश दे दिए गए हैं।
अपर मुख्य सचिव राजस्व रेणुका कुमार ने एपीसी की जांच रिपोर्ट के आधार पर 2015-16 में चकबंदी लेखपाल के पदों पर चयन के लिए भेजे गए अधियाचन व आरक्षण नियमों केविपरीत चयन करने, त्रुटिपूर्ण चयन सूची उपलब्ध कराने के लिए अधीनस्थ सेवा चयन आयोग के तत्कालीन अध्यक्ष राजकिशोर व सदस्य के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने के लिए पत्र अपर मुख्य सचिव कार्मिक को भेज दिया है। चकबंदी लेखपाल के रिक्त पदों पर चयन के लिए वर्ष 2018 में आयोग को त्रुटिपूर्ण अधियाचन भेजने और 2015-16 में भेजे गए अधियाचन के विपरीत त्रुटिपूर्ण चयन सूची उपलब्ध कराने व त्रुटिपूर्ण सूची के आधार पर नियुक्ति देने के लिए अपर संचालक चकबंदी सुरेश सिंह यादव, प्रशासनिक अधिकारी बिहारी लाल जिम्मेदार ठहराए गए हैं। सुरेश भी पूर्व में ही निलंबित किए जा चुके हैं। अब बिहारी लाल को भी निलंबित कर दोनों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करा दी गई है। इसी मामले में संयुक्त संचालक चकबंदी रवींद्र कुमार दुबे, वरिष्ठ सहायक चकबंदी कार्यालय शिव बहादुर को निलंबित कर आरोप पत्र दिया गया है।

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