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Tuesday, 23 April 2019

जिनके नामकरण पर इतना बड़ा विवि उनकी एक किताब नही लिख पाना दुभार्ग्य : कुलपति

जिनके नामकरण पर इतना बड़ा विवि उनकी एक किताब नही लिख पाना दुभार्ग्य : कुलपति

आरा(डिम्पल राय/रितेश चौरसिया)। पिछले 1992 से वीर कुंवर सिंह के नाम पर खड़ा वीर कुंवर सिंह विश्वविद्यालय उनकी गाथाओं की एक पुस्तक नहीं लिख सका है। हालांकि हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी वीर कुंवर सिंह विश्वविद्यालय में बाबू वीर कुंवर सिंह के विजयोत्सव को धूमधाम से मनाया गया। कार्यक्रम की शुरूआत कैम्पस में स्थित बीर बाकुडा की प्रतिमा पर मल्यार्पण कर व संयुक्त रूप से दीप प्रज्जवलित कर किया गया। मंच का संचालन प्रो रणविजय कुमार व धन्यवाद ज्ञापन डीएसडब्लू डॉ के के सिंह ने किया। एनसीसी के कैडेट्स के द्वारा गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया। जगजीवन सभागार में आयोजित बाबू कुंवर सिंह के विजयोत्सव कार्यक्रम में उनके मागदर्शन पर चलाने के लिये युवाओं को प्रेरित किया गया। कार्यक्रम के दौरान कई छात्राओं ने उनके जीवनी पर आधारित सांस्कृति कार्यक्रम प्रस्तुत कर वीर बाकुंडे की उपलब्धियों को गिनाया। अध्यक्षीय भाषण देते हुये कुलपति प्रो देवी प्रसाद तिवारी ने कहा कि जिनके नामकरण पर इतना बड़ा विवि खड़ा है। यह इस विवि के लिये दुभार्ग्य की बात है कि हर वर्ष कुंवर सिंह का विजयोत्सव मनाया जाता है लेकिन उनके जीवन की घटित घटनाओं से संबंधित इस विवि के द्वारा एक पुस्तक तक नहीं लिखा जा सका है। उन्होंने ऐलान करते हुए कहा कि अगले विजयोत्सव में प्रत्येक व्यक्ति के पास उनकी जीवणी से संबंधित पुस्तके होंगी। इसके लिये मै सारे संग्रहालय, अभिलेखाकर, बुद्धिजीवियों व छात्र-छात्राओं से भरपूर मदद लूंगा। जिसके पास बीर बाकुड़े से संबंधित जो भी जानकारियां है, वो हमें मुहैया कराये। सारे गाथाओं को एकत्रित करके अगले वर्ष 2020 में वीकेएसयू कुंवर सिंह की पुस्तक का विमोचन करेंगा। प्रति कुलपति प्रो नंद किशोर साह ने कहा कि 26 अप्रैल 1858 को जब वीर कुंवर सिंह इस दुनिया को छोड़कर चले गये थे। तब अंग्रेजों को विश्वास नहीं हो रहा था कि वे अब इस दुनिया में नहीं रहे। आजादी की किरणों को तो बीर बाकुडा नहीं देख सके लेकिन आने वाली पीढ़ियों को उन्होंने सौगत के रूप में बहुत कुछ दे दिया। मौके पर कुलसचिव कर्नल श्यामानंद झा, प्रॉक्टर डॉ शिवपरसन सिंह, जैन कॉलेज के प्राचार्य डॉ शैलेंद्र ओझा, महाराजा लॉ कॉलेज के प्राचार्य डॉ शेखर कुमार, प्रो सत्यनाराण सिंह, प्रो दिनेश्वर प्रसाद, प्रो बीएन चौधरी, प्रो कुमार कौशलेंद्र, कर्मचारी संघ के अध्यक्ष चितरंजन सिंह सहित कई अधिकारी, शिक्षकगण व छात्र मौजूद थे।

सकारात्मक सोच के साथ आगे बढ़े छात्र

कुलपति ने विजयोत्सव का मतलब समझाते हुए कहा कि किसी भी स्वतंत्रता सेनानी अथवा प्रतिभावान व्यक्तियों की स्मृति क्यों मनायी जाती है? इस पर हर लोगों को सोचने की जरूरत है। विजयोत्सव अथवा स्मृति का आयोजन इसलिये किया जाता है कि आने वाली नये पीढ़ी अपने पूर्वजों के द्वारा किए हुए कार्य से ज्ञान लेकर उनके रास्ते पर आगे बढ़े। छात्रों को आगे बढ़ने का मूल मंत्र देते हुए कुलपति ने कहा कि छात्र यदि सकारात्मक सोच रखेंगे तो उन्हें जीवन में जरूर सफलता हासिल होगी। सकारात्मक सोच रखने वाले छात्रों को जेएनयू, बीएचयू, डीयू व इलाहाबाद विवि जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। उन्हें इसी विवि से सफलता प्राप्त हो जायेगी।

विधवा महिलाओं की जमीन को कराया था लगान मुक्त

विजयोत्सव पर मुख्य अतिथि रांची विवि के हिन्दी विभाग के प्रोफेसर डॉ अरूण कुमार ने विधवा महिलाओं के लिये कुंवर सिंह के द्वारा किए गए कार्य को बताया। उन्होंने बताया कि विधवा महिलाओं की दशा व दिशा बदलने में कुंवर सिंह का बहुत बड़ा योगदान था। विधवा महिला की जमीन को लगान मुक्त बाबू वीर कुंवर सिंह के द्वारा किया गया था।

गोरिला युद्ध में दुश्मन के किए थे दांत खट्टे

मुख्य अतिथि ने बताया कि गोरिला युद्ध में बाबू वीर कुंवर सिंह काफी निपूर्ण थे। गोरिला युद्ध में तकनीकी ज्ञान दो लोगों के पास थी। जिनमें पहला नाम बाबू वीर कुंवर सिंह व दूसरा नाम नाना साहेब का आता है। महाराजा कॉलेज में स्थित सुरंग के बारे में भी बोलते हुए कहा कि इस ऐतिहासिक सुरंग की आज तक रूपरेखा में कोई बदलाव नहीं हो पाया है। ऐतिहासिक सुरंग का कार्य सिर्फ कागजों में ही रहकर सिमट गया है।

किया गया स्मारिका का विमोचन

162वें विजयोत्सव पर विज्ञान भवन के सभागार में कुंवर सिंह की स्मारिका का विमोचन किया गया। डॉ शशि कुमार सिंह ने अपनी बातों को रखते हुए कहा कि वीर कुंवर सिंह के चेयर के लिये दो करोड़ रूपये की राशि भारत सरकार द्वारा आवंटित की गयी है। जिसका उपयोग आज तक विवि के द्वारा नहीं किया गया है। उन्होंने सांस्कृतिक मंत्रालय को पत्र लिखकर जिले में सेना मिलिट्री स्कूल खोलने के लिये पहल करने की बात कही। कुंवर सिंह को वर्ल्ड हेरिटेज घोषित करने के लिये सभी को बढ़-चढ़कर हिस्सा लेने का आह्वान किया।

छात्रों ने प्रस्तुत किया सांस्कृतिक कार्यक्रम

महिला कॉलेज की छात्राओं ने कुलगीत व स्वागत गान विजयोत्सव पर प्रस्तुत किया। दूसरी तरफ कई छात्र-छात्राओं ने सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत कर विजयोत्सव कार्यक्रम में चार-चांद लगा दिया।

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