दक्षिण मुंबई स्थित ज्वेलरी कंपनी के एक डायरेक्टर को इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) फाइल न करना महंगा पड़ा। मजिस्ट्रेट अदालत ने उसे तीन महीने की सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। इस डायरेक्टर ने जानबूझकर आकलन वर्ष 2014-15 का रिटर्न दाखिल नहीं किया था। जबकि इसके बारे में उसे लगातार नोटिस जारी किए गए। बताया जाता है कि मामले में इस तरह सजा सुनाए जाने का यह शायद पहला मामला है।
शाह ने अपने पक्ष में दलील दी कि उसे इन बातों की जानकारी नहीं थी। रिटर्न फाइल करने की जिम्मेदारी एक अन्य डायरेक्टर की थी। उसने जानबूझकर इसे नहीं बताया। कोर्ट ने शाह की इस दलील को खारिज कर दिया। कोर्ट ने पाया कि जिस व्यक्ति का जिक्र शाह ने किया है, वह कंपनी से इस्तीफा दे चुके हैं। आकलन वर्ष 2014-15 के लिए रिटर्न फाइल करने के समय वह डायरेक्टर नहीं थे। देखा गया है कि आयकर कानून के प्रावधानों के तहत अपराध के मामले बहुत मुश्किल से साबित होते हैं। इसमें तभी सजा दी जाती है जब बिना किसी संशय के साथ यह साबित हो जाता है कि जानबूझकर रिटर्न फाइल नहीं किया जा रहा है।
एडिशनल चीफ मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट आर.एस. सरकले ने कहा, “शाह को लगातार नोटिस भेजे गए। लेकिन, इनका कोई जवाब नहीं दिया गया। कोर्ट में उनकी सफाई मानने योग्य नहीं है।” कोर्ट ने कहा कि जबकि इस तरह के मामलों में दो साल की अधिकतम सजा का प्रावधान है। लेकिन, इस तरह के कोई आरोप नहीं हैं कि इस मामले को छोड़कर पहले भी कंपनी टैक्स चुकाने में अनियमित रही है।

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