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Tuesday, 16 April 2019

शीर्ष अदालत की फटकार का नतीजा-बेरोजगार हुए बयानवीर, जुबा पे लागा ताला ई सी का

अशोक सिंह विद्रोह / कर्मवीर त्रिपाठी

दिल्ली की दौड़ में अव्वल आने के चक्कर में हेट स्पीच की हेट स्टोरी के जद में आए सियासी यानवीरों को ई सी ने एस सी की फटकार के बाद 48 से 72 घंटे तक के लिए सियासी तौर पर बेरोजगार कर घर बिठा दिया है। बावजूद इसके जुगाड़ पर यकीन रखने वाले देश के ये होनहार नेता भजन कीर्तन से लेकर आयोग की मनुहार तक के तिकडम आजमाने में लगे हैं। बीते सोमवार को देश की शीर्ष अदालत ने शारजहां (यूएई) की एक योगा टीचर मनसुखानी के याचिका पर चुनाव आयोग की खूब लानत-मलामत की थी। आनन-फानन में सर्वोच्च न्यायालय की किसी सख्त कार्रवाई से बचने के लिए लगातार सवालों के जद में आ चुके भारत निर्वाचन आयोग ने यूपी के सीएम और धर्मगुरु योगी आदित्यनाथ समेत सपा के बयान बहादुर आजम खान पर 72 घंटे (3 दिन) तथा बसपा सुप्रीमो व पूर्व मुख्यमंत्री मायावती सहित बीजेपी की इकलौती गाँधी घराने से महिला मेनका पर 48 घंटे (2 दिन) तक किसी भी प्रकार के चुनाव कार्यक्रम पर पूरी तरह रोक लगा दी। ‘मरता क्या न करता’ वाली कहावत के चलते आयोग की इस बड़ी कार्यवाही ने उसे मंगलवार को अदालती वज्रपात से फिलहाल बचा लिया।
सियासी दलों के बीच इन दिनों तरबूज और छूरी वाले नजीर पर चल रहे चुनाव आयोग पर टिप्पणी करते हुए सीजेआई जस्टिस गोगोई ने कहा कि ‘लगता है चुनाव आयोग को उनकी शक्तियां वापस मिल गई है। हम आज कोई आदेश पारित नहीं करेंगे।’ इन चंद लाइनों के साथ आयोग को हाल फिलहाल सुप्रीम कोर्ट से राहत भले मिल गई हो लेकिन ईवीएम की विश्वसनीयता से लेकर तमाम तरह के प्रश्न चिन्हों से जूझ रहे आयोग के अच्छे दिन तो नहीं ही चल रहे हैं।

शीर्ष अदालत की फटकार के नतीजतन मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, पूर्व मुख्यमंत्री मायावती सहित आजम खान तथा मेनका गांधी पर भले ही आयोग ने जुबानी सेन्सर लगा दिया हो लेकिन ऐसे बयानवीरों की लिस्ट खासा लंबी चौड़ी है जिनका हाजमा बिना कुछ उल्टा सीधा बोले सही ही नहीं रहता।

बात अगर चाल चरित्र और चेहरे के साथ खड़े होने का दावा करने वाली बीजेपी समेत अन्य दलों की करें तो गिरिराज सिंह, साक्षी महाराज ,नरेश अग्रवाल, गुड्डू पंडित, हिमाचल के प्रदेश अध्यक्ष सतपाल सिंह सत्ती, नवजोत सिंह सिद्धू, जनता दल यूनाइटेड के बड़े नेता रहे शरद यादव, संजय निरुपम, केंद्रीय मंत्री महेश शर्मा जैसे तमाम सियासी दिग्गज गाहे-बगाहे भाषा की मर्यादा को तार-तार करते रहते हैं।

मजेदार तथ्य है कि बीते सोमवार को शीर्ष अदालत के सख्त रुख से हरकत में आने से लेकर मंगलवार तक में चुनावी समर के सागर में कई बयानवीरों ने अपनी नाव छोड़ दी तो, वही कार्यवाही की जद के चलते आयोग के पिंजरे में कैद चारों सियासी दिग्गजों ने भी इसकी काट के तौर पर हनुमान चालीसा पढ़ने से लेकर प्रेस कांफ्रेंस आयोजित कर और मीडिया पर सवालिया निशान उठाने तक का ड्रामा कर डाला। देश के शीर्ष धार्मिक संस्थाओं में से एक नाथ संप्रदाय के सर्वोच्च धर्मगुरु तथा वर्तमान में तकरीबन 23 करोड़ जनसंख्या वाले सबसे बड़े राज्य के संवैधानिक मुखिया के रूप में योगी आदित्यनाथ पर चुनाव आयोग ने 16 अप्रैल सुबह 6 बजे से लेकर अगले 72 घंटे तक चुनाव प्रचार, सोशल मीडिया या किसी भी तरह के इंटरव्यू आदि पर पूरी तरह से रोक लगा रखी है।
योगी आदित्यनाथ संभवत देश के पहले ऐसे मुख्यमंत्री हैं जिन पर इतनी बड़ी और सख्त कार्यवाही की गई है। वह भी तब जबकि देश में दूसरे चरण के चुनाव में महज 48 घंटे बचे हो तथा मंगलवार को चुनाव प्रचार की समय सीमा भी समाप्त हो रही है। भाजपा में पीएम मोदी के बाद सबसे लोकप्रिय स्टार प्रचारक का तमगा लगाए योगी आदित्यनाथ अब सुप्रीम कोर्ट की कृपा से 72 घंटे तक सियासी तौर पर पूरी तरह बेरोजगार हो गए हैं।

इन्वेस्टर्स समिट के जरिए सूबे में लाखों लोगों को नौकरी देने का दावा करने वाले योगी आदित्यनाथ ने तू डाल- डाल मैं पात-पात की तर्ज पर बजरंगबली को याद करते हुए 72 घंटे के फुरसतिया दौर को काटने के लिए मंगलवार सुबह करीब 9:30 बजे राजधानी के हनुमान सेतु मंदिर का रुख किया। करीब 20 मिनट गुजारने के दौरान योगी ने मंदिर में हनुमान चालीसा का पाठ भी किया। बहत्तर घंटे में से 20 मिनट काटने के बाद मीडिया जमावड़े के बीच योगी मुस्कुराते हुए वहां से निकल गए।
मंगलवार को ही गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने राजधानी से अपना पर्चा भी भरा, जिसमें योगी आदित्यनाथ को भी शामिल होना था। अब जबकि योगी 72 घंटे की बेरोजगारी के दौर से गुजर रहे हैं, तब ऐसे में राजनाथ सिंह ने योगी के वहां से ठीक जाने के बाद हनुमान सेतु मंदिर पहुंचकर बजरंगबली के दर्शन किए और अपने लिए ‘सब ठीक होने’ का आशीर्वाद मांगा। बहरहाल योगी को इस श्राप से निजात दिलाने के लिए बीजेपी ने मुख्तार अब्बास नकवी और जेपी नड्डा को ई सी से मिलकर मनुहार करने के लिए लगाया है। कुछ ऐसे ही श्राप से जूझ रहे सपा के कद्दावर नेता, नौ बार रामपुर से विधायक और सपा सरकार में संसदीय मंत्री रहे असंसदीय भाषा के महारथी आजम खान ने मंगलवार को भोपाल का रुख किया तो उनके विधायक पुत्र अब्दुल्ला ने कमान संभालते हुए पिता का बचाव किया। 48 घंटे के राडार पर आई बसपा सुप्रीमो मायावती तथा बीजेपी से सुल्तानपुर सीट पर चुनाव लड़ रही केंद्रीय मंत्री मेनका गांधी ने भी अपनी सफाई पेश जरूर की, लेकिन उनकी सफाई में कितना दमखम है यह दोनों ही महिलाएं बखूबी जानती हैं।

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