लखनऊ विश्वविद्यालय का बर्खास्त बाबू चला रहा था फर्जी मार्कशीट रैकेट, छह गिरफ्तार | Alienture हिन्दी

Breaking

Post Top Ad

X

Post Top Ad

Recommended Post Slide Out For Blogger

Thursday, 18 April 2019

लखनऊ विश्वविद्यालय का बर्खास्त बाबू चला रहा था फर्जी मार्कशीट रैकेट, छह गिरफ्तार

लखनऊ। राजधानी लखनऊ समेत अन्य विश्वविद्यालयों की फर्जी मार्कशीट बनाने वाले गिरोह का खुलासा करते हुए हसनगंज पुलिस ने छह आरोपितों को गिरफ्तार किया है। हत्थे चढ़े आरोपितों में लविवि का बर्खास्त बाबू भी शामिल है। पुलिस के अनुसार बाबू ही गिरोह का सरगना है। आरोपित अलग-अलग विश्वविद्यालयों में प्रवेश का झांसा देकर कई लोगों को चपत लगा चुके हैं। आरोपितों के पास से कई विश्वविद्य्रालयों की फर्जी मार्कशीट, स्कैनर, लैपटॉप व अन्य सामान बरामद हुआ है। गिरोह के तार लविवि समेत कई विवि के कर्मचारियों से जुड़े होने की भी आशंका है।

जानकीपुरम के सेक्टर-एफ निवासी सौरभ ने वर्ष 2018 में लविवि से एलएलबी का फॉर्म भरा था। हालांकि ऐडमिशन नहीं हो सका। इस दौरान परिचित के घर ट्यूशन पढ़ाने वाले इंदिरानगर निवासी दीवान सिंह ने मैनेजमेंट कोटे से प्रवेश दिलवाने का झांसा दिया। इसके बदले 50 हजार रुपये ऐंठ लिए। इतना ही नहीं परीक्षा में किसी और को बैठाकर पास करवाने का झांसा दिया। फर्स्ट सेमेस्टर का परीक्षा परिणाम आने पर पास होने की मार्कशीट भी दिखाई थी। इसके बाद सौरभ सोमवार को फीस जमा करने लविवि पहुंचा। पता चला कि प्रवेश ही नहीं हुआ है और मार्कशीट फर्जी है। इसके बाद पीड़ित ने हसनगंज कोतवाली में रिपोर्ट दर्ज करवाई थी। पूरे फर्जीवाड़े में लविवि के कुछ कर्मचारियों के शामिल होने का आरोप भी लगाया था।

सीओ महानगर संतोष सिंह के मुताबिक छानबीन के बाद फर्जी मार्कशीट बनाने के आरोप में इंदिरानगर निवासी दीवान सिंह, गुडम्बा निवासी खिरोधन उर्फ गंगेश, बाराबंकी निवासी रविन्द्र प्रताप सिंह, मड़ियांव निवासी दीपक तिवारी, ठाकुरगंज निवासी नायब हुसैन और हसनगंज निवासी मधुरेन्द्र पांडेय को गिरफ्तार कर लिया गया। पकड़े गए आरोपितों के पास से अलग-अलग विश्वविद्यालयों की 14 फर्जी मार्कशीट, 6 ब्ल्यू ट्यूबलेशन चार्ट, कंट्रोलर ऑफ इंग्जमिनेशन के नाम के लिफाफे, परीक्षा नियंत्रक का लेटर पैड, लविवि के मोनोग्राम वाली सादी मार्कशीट, लैपटॉप और स्कैनर बरामद हुआ है। पुलिस के मुताबिक गंगेश ही गिरोह का सरगना है। सीओ के अनुसार फर्जी मार्कशीट बनाने के मामले में ही गंगेश को 2009 में लविवि से बर्खास्त किया गया था। विकासनगर थाने में गंगेश के खिलाफ धोखाधड़ी समेत अन्य धाराओं में रिपोर्ट दर्ज करवाई गई थी और गैंगस्टर ऐक्ट की कार्रवाई भी हुई थी।

नंबर बढ़वाने का भी चल रहा खेल
इंस्पेक्टर हसनगंज धीरज कुमार शुक्ला के अनुसार गंगेश का संपर्क लविवि, कानपुर विवि, दिल्ली विवि, अवध विवि समेत कई विवि के कर्मचारियों से हैं। पूरे गोरखधंधे में लविवि के कुछ कर्मचारियों की भूमिका भी शक के दायरे में है। लविवि के सूत्रों के अनुसार गंगेश अक्सर लविवि में ही रहता है और कई कर्मचारियों के साथ उठना-बैठना है। बर्खास्तगी के बाद भी उसके लविवि में रहने के पीछे भी मार्कशीट और ऐडमिशन के नाम पर होने वाला खेल माना जा रहा है। पुलिस के अनुसार गंगेश किसी भी विवि के स्टूडेंट के नंबर बढ़वाने का भी दावा करता था।

No comments:

Post a Comment

Post Top Ad