अपर्णा के पति की असमय मौत हो गई। तभी से वह दोनों बेटियों की शिक्षा को लेकर बेहद गंभीर रही हैं।अपर्णा उन्हें अच्छी से अच्छी तालीम देना चाहती हैं ताकि वे भविष्य में आर्थिक रूप से किसी पर निर्भर न रहें। अपर्णा एक प्राइवेट बैंक में काम करती हैं। उनकी बचत सीमित है।
अपर्णा की एक बेटी मेरिट पर इंजीनियरिंग कॉलेज में सेलेक्ट हो गई है। कॉलेज की फीस, हॉस्टल और अन्य खर्च के लिए उन्हें अगले 4 साल में 10 लाख रुपये की जरूरत है। अपर्णा को नहीं पता कि इतने पैसों का इंतजाम कैसे होगा।
क्या उन्हें अपने निवेश विकल्पों से पैसा निकाल लेना चाहिए या घर पर लोन लेना चाहिए? वह जानना चाहती हैं कि इसका उनके भविष्य और दूसरी बेटी की शिक्षा पर कैसे असर पड़ सकता है? इसे भी पढ़ें : छोटे शहरों की महिलाओं के लिए P2P लोन बना बड़ा सहारा अपर्णा को पहले विकल्प के तौर पर एजुकेशन लोन के बारे में सोचना चाहिए।
इंजीनियरिंग जैसे प्रोफेशनल कोर्स के लिए बैंक लोन की पेशकश करते हैं। यदि बच्चे का दाखिला अच्छे प्लेसमेंट रिकॉर्ड वाले किसी प्रतिष्ठित कॉलेज में होता है तो बैंक एजुकेशन लोन देने के लिए ज्यादा इच्छुक रहते हैं।कई शिक्षण संस्थानों का भी बैंकों के साथ करार होता है। इसके चलते छात्रों को आसानी से लोन मिल जाता है। एजुकेशन लोन हॉस्टल की फीस समेत सभी खर्चों को पूरा करता है।
यही नहीं, कोर्स पूरा होने पर ही लोन की किस्तें देनी पड़ती हैं। इस तरह अपर्णा की बेटी खुद लोन अदा कर सकती है। पढ़ाई पूरी करने के बाद नौकरी मिलने पर वह आसानी से यह काम कर लेगी। बैंक अपर्णा से लोन की गारंटी लेने के लिए कहेंगे। उनकी इनकम और पीएफ बैलेंस इस गारंटी के लिए पर्याप्त होंगे। उन्हें तभी मामले में हस्तक्षेप करना पड़ेगा अगर बेटी डिफॉल्ट करती है।
यहां महत्वपूर्ण है कि अपर्णा बेटी को परिवार की आर्थिक स्थिति के बारे में ठीक से समझाएं। साथ ही लोन को अदा करने की जिम्मेदारी के बारे में बताएं।निवेश विकल्पों से पैसों को निकालने से लागत जरूर कम हो जाएगी, लेकिन इससे अपर्णा के दूसरे लक्ष्य प्रभावित होंगे। उन्हें दूसरी बेटी की भी जरूरतों को देखना है। अपर्णा को रिटायरमेंट के लिए भी पर्याप्त बचत करके रखनी है।
इससे वह बेटियों पर निर्भर नहीं होंगी। घर पर लोन लेना सस्ता विकल्प है। लेकिन, इससे उन्हें एकमात्र लक्ष्य के लिए अपनी बड़ी अमूल्य वस्तु को गिरवी रखना पड़ेगा। उन्हें जज्बात की जगह थोड़ा अक्लमंदी से काम लेना चाहिए। यहां एजुकेशन लोन ही बेहतर विकल्प दिखता है। इस पेज की सामग्री सेंटर फॉर इंवेस्टमेंट एजुकेशन एंड लर्निंग (सीआईईएल) के सौजन्य से। गिरिजा गादरे, आरती भार्गव और लब्धि मेहता का योगदान।

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