अचानक हुई किसी दुर्घटना या लंबी बीमारी की वजह से शरीर का कोई अंग खराब हो जाएं तो व्यक्ति के पास सिर्फ ऑर्गन ट्रांसप्लांट करवाने के अलावा कोई दूसरा विकल्प नहीं बचता है। पर क्या ऑर्गन ट्रांसप्लांट करवाकर दूसरी जिंदगी मिलना इतना आसान है। अगर आप भी अब तक इसे मुश्किल समझते रहे हैं तो आपको बता दें, अब ये काम आसान हो गया है। वैज्ञानिकों ने एक ऐसा तरीका निकाला है, जिसकी वजह से अब पशुओं के अंगों को इंसान के शरीर में प्रत्यारोपित किया जा सकेगा। सुनकर हैरानी जरूर हो सकती है लेकिन यह खबर सच है।
ऑर्गन ट्रांसप्लांट के दौरान आने वाला खर्च, सेफ्टी और डोनर की उपलब्धता के बारे में सोचकर ज्यादातर लोग निराश हो जाते हैं। गरीब व्यक्ति तो इस इलाज के खर्च के बारे में सोचकर ही पीछे हट जाता है। ऑर्गन ट्रांसप्लांट बेहद कठिन प्रकिया है। ऑर्गन ट्रांसप्लांट करवाते समय पीड़ित के परिवार को डोनर बहुत मुश्किल से मिलते हैं, और डोनर अगर मिल भी जाए तो उसका खर्च बहुत ज्यादा होता है। हालांकि वैज्ञानिकों ने अब इस समस्या का हल ढूंढ लिया है। जिसके बाद प्रत्यारोपण करवाने के लिए लोगों को लंबा इंतजार नहीं करना पड़ेगा।
जर्मनी के वैज्ञानिकों ने पूरे विज्ञान जगत को अपने इस नए प्रयोग से हैरानी में डाल दिया है। चिकित्सा को सरल बनाने और गंभीर बीमारियों का इलाज खोजने की दिशा में काम कर रहे इन वैज्ञानिकों ने हाल ही में एक नया शोध किया है। ‘साइंस फॉर द क्यूरियस डिस्कवर’ की खबर के अनुसार वैज्ञानिकों की मानें तो उन्होंने ऐसा तरीका निकाला है जिसमें जानवरों के अंग अब इंसान के शरीर में लगाए जा सकेंगे।
बता दें, यह शोध म्यूनिख में लुडविग मैक्समिलियन यूनिवर्सिटी में किया गया। शोध की मानें तो इंसान के दिल को अब सुअर के दिल से बदला जा सकेगा. एक पशु के स्वस्थ दिल को दूसरी प्रजाति के शरीर में प्रत्यारोपित करने की प्रक्रिया को ‘Xenotransplantation’ कहा जाता है।
वैज्ञानिकों ने इस शोध के दौरान बैबून प्रजाति के बंदर के दिल की जगह सुअर का दिल लगा कर देखा गया.शोधकर्ताओं ने ये प्रयोग तीन अलग-अलग समूहों पर किया था। इस पूरे अध्ययन के दौरान 16 लंगूर शामिल थे। शोधकर्ताओं को आखिरी ग्रुप में ट्रांसप्लांट करते समय सफलता मिली। बताया जाता है कि यह प्ररिक्षण पूरी तरह सफल रहा। सुअर का दिल लगने के बाद बैबून 6 महीने से ज्यादा समय तक जीवित रहा। इस परिक्षण के बाद वैज्ञानिक अब उम्मींद कर रहे हैं कि मनुष्य के दिल की जगह भी अब सुअर का दिल लगाया जा सकेगा। हालांकि इस तरह के शोध में पहले भी वैज्ञानिको को सीमित सफलता ही मिली है।जिसके बाद माना जा रहा है कि इस क्षेत्र में अभी और शोध किए जाने की आवश्यकता है।
‘नेचर जर्नल’ में प्रकाशित इस अध्ययन में माना जा रहा है कि इस प्रक्रिया से भविष्य में इंसानों को भी नया जीवन मिल सकेगा। इस प्रत्यारोपण को करने के लिए सबसे पहले सुअरों के जीन में बदलाव किया गया ताकि दूसरी प्रजाति के प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया को दबाया जा सके।
जर्मन हर्ट सेंटर बर्लिन के डॉक्टर क्रिस्टोफ नोसाला के अनुसार साल 2030 तक अमेरिका में दिल का दौरा पड़ने के मामले 80 लाख तक पहुंच सकते हैं। जिसके बाद जीन में बदलाव वाला यह सुअर इस समस्या का समाधान हो सकता है।

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