किस्में
मक्का की संकर गंगा सफेद 2, डक्कन 103, संकुल किस्में विजय, नवजोत, माही धवल, माही कंचन, का 20-25 किलो प्रति हेक्टेअर प्रमाणित बीज बोयें। जल्दी पकने वाली किस्मों में बीज की मात्र 30 से 35 किलो काम में ले।
बीजोपचार
बीज को रिडोमिल एम. जेड. या एप्रोन 35 एस.डी. से 4 ग्राम प्रति किलो बीज की दर से उपचारित करें। इसके बाद एजोटोबेक्टर एवं पी.एस.बी. कल्चर से उपचारित कर बोयें।
बुआई
बुआई जून के अंत से जुलाई के प्रथम सप्ताह तक करें। सिंचित क्षेत्रों में 15-30 जून तक बुआई कर दे। अगेती फसल लेना ज्यादा उपयुक्त रहता है। कतार से कतार की दूरी 60 सेंटीमीटर एवं पौधे से पौधे की दूरी 25 सेंटीमीटर रखें। पौधों की संख्या प्रति वर्ग मीटर 6-7 होनी चाहिए। जुलाई के प्रथम सप्ताह तक वर्षा न हो तो पहले से तैयार खेत में वर्षा होने की सूचना प्राप्त होने पर वर्षा आने से 2-3 दिन पूर्व सूखी बुआई करना लाभदायक पाया गया है।
खाद व उर्वरक
मिट्टी परिक्षण के परिणाम अनुसार उर्वरक दें। इसके अभाव में सिंचित फसल में बुआई से पूर्व 66 किलो उत्तम डी.ए.पी. एवं 40 किलो उत्तम वीर यूरिया या 66 किलो उत्तमवीर यूरिया एवं 190 किलो उत्तम सुपर फॉस्फेट प्रति हेक्टेअर उरकर देवें। बुआई के 30 दिन बाद 66 किलो उत्तम वीर यूरिया तथा मांजरे निकलने से पूर्व 66 किलो उत्तम वीर यूरिया मिट्टी में मिलाकर जड़ों पर मिट्टी चढ़ा दें।
द्य असिंचित क्षेत्र में 30 किलो उत्तम वीर यूरिया एवं 66 किलो उत्तम डी.ए.पी. या 190 किलो उत्तम सुपर फॉस्फेट एवं 55 किलो उत्तम वीर यूरिया प्रति हेक्टेअर बुआई के समय डाल देवें। 55 किलो उत्तम वीर यूरिया मांजरे निकलने के पूर्व वर्षा को ध्यान में रखते हुए मिट्टी में मिलाकर जड़ों पर मिट्टी चढाएं।
द्य जस्ते की कमी हो तो 25 किलो जिंक सल्फेट प्रति हेक्टेअर बुआई के समय उर्वरक के साथ डालें।
द्य यूरिया की उपयोग क्षमता बढऩे के लिए यूरिया के दानों पर 25 ग्राम नीमसार (निमिन) प्रति किलो यूरिया की दर से परत चढ़ाकर उपयोग करें। सामान्य दशा में निम्नलिखित मात्र में उर्वरक का प्रयोग करें।
अन्तर्शस्य
मक्का की एक कतार के बाद सोयाबीन की एक कतार की बुआई 30 सेंटीमीटर की दूरी पर करें। मक्का की दो कतारों के बाद उड़द की दो कतार भी बोई जा सकती है।
निराई-गुड़ाई व सिंचाई
पौधों की बढ़वार के समय और फूल आते समय सिंचाई अवश्य करें। मक्का की फसल में शुरू के 20-30 दिन तक खरपतवार निकालते रहें।
तना छेदक
बुआई के 15-30 दिन के अन्दर फोरेट 10′ कण या कार्बोफ्यूरान 3′ कण 7-8 किलो प्रति हेक्टेअर की दर से पौधों के पौटों में छिड़कें।
फड़का व सैन्य कीट
प्रकोप होने पर मिथाइल पैराथियान 2′ या कारबोरिल 5′ चूर्ण 25 किलो प्रति हेक्टेअर भुरकें।
तुलासिता
जून की पहली वर्षा आते ही, एवं सिंचित क्षेत्रों में 15-20 जून के मध्य तक इसकी बुआई अवश्य करें। 10 – 15′ बीज अधिक बोयें। 4 ग्राम रिडोमिल एम. जेड. या एप्रोन 35 एस.डी. से प्रति किलो बीज को उपचारित कर बोयें। रोगग्रस्त पौधों को नष्ट करें। दाने बनते समय खेत की परिधी से एक मीटर अन्दर तक लगे भुट्टों को पत्तियों से लपेट दे तथा प्रकाश परावर्तित करने वाले फीते का प्रयोग करें। केवल प्रकाश परावर्तित करने वाले फीते के प्रयोग करने से भी तोतों से नुकसान कम हो जाता है। फीते से फीते की दूरी 5 मीटर रखें।

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