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Tuesday, 23 April 2019

सेलिब्रिटी: ढलते कैरियर को राजनीति का सहारा

50 पार कर चुके सनी देओल फिल्मों में ज्यादा सक्रिय नहीं

क्रिकेट को अलविदा कह चुके हैं गौतम गंभीर

रवि गुप्ता

लखनऊ। कहते हैं कि राजनीति के क्षेत्र में आने के लिए न तो कोई तयशुदा उम्र होती है और न ही कोई नियत समय। बस वक्त की नजाकत व देश-प्रदेश में चल रहे राजनीतिक बयार को समझने की जरूरत होती है कि पॉलीटिक्स में कब, कैसे और किसके कहने पर कौन से दल का दामन थामना है। कुछ ऐसा ही हाल-फिलहाल के दिनों में खासकर बीजेपी में देखने को मिल रहा है। क्रिकेट व सिनेमा के सेलिब्रिटी वैसे तो राजनीति में आते-जाते रहें। मगर अभी भाजपा में बीते कुछ दिनों से इन दोनों जगत से जुड़ी हस्तियों की लगातार ‘पॉलीटिकल इंट्री’ हो रही है। अब ये अलग बात है कि किसे किसकी जरूरत है…राजनीति को इनकी या फिर इनको राजनीति की।

दर्शकों के बीच अभी तक ‘ढाई किलो का हाथ’ जैसे अप्रत्याशित डॉयलाग को लेकर मशहूर बॉलीवुड एक्टर सनी देओल ने बीजेपी का साथ पकड़ा तो इससे ठीक पहले क्रिकेटर गौतम गंभीर ने भी दिल्ली से अपनी राजनीतिक पारी का आगाज किया। ऐसे ही सूफी गायक हंसराज हंस ने भी आखिरकार दिल्ली में बीजेपी ज्वाइन कर ली। हालांकि विभिन्न क्षेत्रों से ताल्लुक रखने वाले इन सेलिब्रिटीज के मौजूदा परिस्थितियों पर गौर करें तो इनकी बढ़ती उम्र और ढलते कैरियर को कहीं न कहीं राजनीति का सहारा मिला है जिसके सहारे वो संभवत: फिर से जन-जन के बीच लोकप्रिय होने के साथ ही विश्वसनीय बनने का अवसर तलाश रहे हैं।

वहीं देखा जाये तो यह आंकलन या तर्क-वितर्क बीजेपी में ही हालिया शामिल होने वाले फिल्म एक्टर रवि किशन और दिनेश लाल यादव निरहुआ पर सटीक नहीं बैठती। ऐसा इसलिये क्योंकि अभी भी बॉलीवुड व भोजपुरिया के साथ-साथ साउथ इंडिया फिल्म इंडस्ट्री में इनकी कहीं न कहीं डिमांड बरकरार है। बावजूद इसके इन्होंने आखिर क्यों राजनीति में इंट्री की इतनी जल्दीबाजी दिखायी, यह समझे से थोड़ा परे हैं। वैसे बता दें कि इससे पहले रवि किशन जौनपुर सीट से कांग्रेस के टिकट पर अपना पहला चुनाव लड़ चुके हैं और शिकस्त भी खायी थी। इसी कड़ी में भोजपुरी गीत-संगीत की दुनियां में कभी मशहूर रहें मनोज तिवारी के कैरियर को देखें तो उन्होंने काफी पहले ही एक प्रकार से अपने चिर-परिचित क्षेत्र से संन्यास ले लिया और पूरी तरह राजनीति में सक्रिय हो गये। ये अलग बात है कि कभी किसी पॉलीटिकल मंच पर वो भोजपुरिया अंदाज में गाते भी दिखाये दे जाते हैं। इसी तरह गायक बाबुल सुप्रीयो जोकि अभी पश्चिम बंगाल के एक लोस क्षेत्र से बीजेपी सांसद हैं और मोदी सरकार में मंत्री भी रहें, उन्होंने ऐन वक्त पर सब कुछ छोड़कर राजनीति अपना लिया। देखा जाये तो बाबुल को फिल्म इंडस्ट्री से कहीं अधिक फेम राजनीति में मिला। कुल मिलाकर ऐसा नहीं है कि अलग-अलग क्षेत्रों के ऐसे दिग्गजों का झुकाव किसी एक ही दल की तरफ है, अन्य पार्टियों में भी इस प्रकार की हस्तियों के आने-जाने के किस्से सुनायी देते रहते हैं।

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