खनन स्थल से 300 फीट के बाहर बालू स्टॉक करने के लिए टेंडर कंपनी को लेना होगा लाइसेंस – जिला खनन पदाधिकारी
>> पटना जिले में किसी को भी बालू भंडारण का नहीं दिया गया हैं लाइसेंस ,स्टॉक को माना जाएगा अवैध -सहायक निदेशक
>> खनन विभाग ने कोई आदेश नहीं किया हैं जारी, 15 दिन पहले से ही हो रहा स्टॉक
>> स्थल का भौतिक निरीक्षण और कागजातों का सही अवलोकन पश्चात ही जारी किया जाएगा एलपीसी
>> निर्धारित ई सी एरिया से बाहर बालू खनन कर किया जा रहा भंडारण
रवीश कुमार मणि
पटना ( अ सं ) । बीते वर्ष में बालू भंडारण के बाद बालू सरकार के निर्धारित रेट पर नहीं बल्कि 4 गुणा अधिक कीमतों पर ब्लैक मार्केटिंग किया गया था । 30 जून से नियमत: बालू खनन का कार्य बंद हो जाएगा । इसके बाद बालू की आपूर्ति भंडारण से ही होगी । वर्तमान वर्ष में भी बालू का ब्लैक मार्केटिंग हो इसकी तैयारी बालू माफिया पहले से ही कर लिये हैं ,और लोकसभा का चुनाव इनके लिए ढाल बनकर आयी हैं । जिला प्रशासन चुनाव में व्यस्त है और बालू माफिया अवैध बालू स्टॉक करने में मस्त हैं । विभाग भी कोई निरीक्षण नहीं कर रहा हैं । ई सी एरिया से बाहर कई किलोमीटर तक अवैध खनन कर बालू स्टॉक किया जा रहा हैं । तीन फीट की गहराई की जगह 10 -15 फीट गड्ढा कर दिया गया हैं । यहीं नहीं पानी के अंदर से बालू खनन किया गया । जिसकी खबर प्रमुखता से प्रकाशित हुई थीं । सबसे बड़ी बात तो यह है की बालू भंडारण करने का कोई लाइसेंस खनन विभाग ने ब्रॉडसन या अन्य को निर्गत नहीं किया हैं । मालूम हो की दो दिन पहले दिदारगंद थाना क्षेत्र में अवैध बालू खनन और स्टॉक की जाँच करने पहुँचे पटना जिले के खनन अधिकारियों को बालू माफियाओं ने बंधक बनाकर मारपीट किया , इसमें कई गंभीर रूप से ज़ख़्मी हुये है ।इससे पहले भी बालू माफ़ियाओं ने कई को निशाना बनाया है , हत्याएँ तक हो चुकी है , गोलीबारी तो आम बात है ।
ब्लैक मार्केटिंग के लिए कहां -कहां हैं अवैध बालू स्टॉक
सोन नदी में बालू खनन का ठेका ब्रॉडसन कंपनी को प्राप्त हैं । 30 जून के बाद बालू खनन पर रोक लगा दी जाती हैं । बालू की आपूर्ति के लिए बालू स्टॉक करने का नियम बनाया गया हैं । इसके लिए बालू खनन ठेकेदार को(300 फीट की दूरी के बाद ) लाइसेंस लेना होता हैं । खनन विभाग ने वर्तमान वर्ष में कोई लाइसेंस जारी नहीं किया हैं । इधर बालू माफिया , बालू का ब्लैक मार्केटिंग करने के लिए 15 दिन पूर्व से ही बड़े तौर पर बालू स्टॉक कर लिया हैं । जमीनी तौर पर मनेर अंतर्गत अमनाबाद, सुवर मरवा, बिहटा में डोगढ़ा, बेंदौल, पाडेचक, रानीतलाब थाना अंतर्गत इकबालगंज निसरपुरा, लहलादपुर, रानीतलाब, सरैया, राजीपुर में खुलेआम अवैध बालू का स्टॉक अपने आप में गवाह हैं ,जिसे देखा जा सकता हैं । कुछ इसी तरह का हालत भोजपुर जिले में भी व्याप्त हैं ।
300 फीट के बाहर बालू भंडारण अवैध
जिला खनन पदाधिकारी सुरेन्द्र कुमार सिन्हा ने बताया की खनन विभाग के नये नियमावली के अनुसार बालू खनन करने का प्राप्त ठेकेदार ,निर्धारित खनन एरिया के 300 फीट के अंदर तक बालू का भंडारण कर सकते हैं ।इसके लिए किसी तरह का लाइसेंस नहीं लेना होगा । 300 फीट की दूरी के बाद बालू भंडारण के लिए ठेकेदार को 10 किलोमीटर के अंदर तक लाइसेंस लेना अनिवार्य हैं । बिना लाइसेंस के बालू भंडारण अवैध माना जाएगा और ठेकेदार के विरूद्ध कार्रवाई की जाएगी । अधिकृत ठेकेदार के अलावा कोई निजी व्यक्ति बालू भंडारण का लाइसेंस लेना चाहता हैं तो उसे खनन स्थल से 10 किलोमीटर के बाद क्षेत्र में मिलेगा । लाइसेंस के लिए उक्त जमीन का एकरारनामा, राजस्व रसीद और अंचलाधिकारी द्वारा जारी भू-स्वामी प्रमाण -पत्र जरूरी हैं । कागजातों की जांच पश्चात ही लाइसेंस दिया जाएगा । बालू भंडारण के लाइसेंस मात्र एक वर्ष के लिए ही वैध होता हैं ।
किसी को लाइसेंस नहीं ,बालू स्टॉक हैं अवैध
खनन विभाग ,पटना के उप निदेशक आनंद प्रकाश सिन्हा ने बताता की वर्तमान वर्ष में किसी को भी बालू स्टॉक करने का लाइसेंस नहीं दिया गया हैं । पटना जिले में बालू खनन का ठेका ब्रॉडसन कंपनी को हैं । 300 फीट की दूरी के बाद ब्रॉडसन कंपनी या किसी निजी व्यक्ति द्वारा बालू का स्टॉक किया गया हैं तो वह पूर्ण रूप से अवैध हैं । जहां -जहां अवैध बालू स्टॉक की सूचना हैं विभाग जांच कर उचित कार्रवाई करेगी । अवैध बालू स्टॉक को जब्त करने की दिशा में कार्रवाई की जा सकती हैं ।
ई सी एरिया से बाहर हो रहा अवैध खनन
पटना जिले में सिर्फ दो-चार बालू घाट छोड़कर सभी जगहों पर ई सी एरिया से बाहर अवैध खनन किया जा रहा हैं । यह अवैध खनन, जिला प्रशासन -पुलिस और खनन विभाग के मिलीभगत से हो रहा हैं । बालू स्टॉक के लिए अवैध खनन चरम सीमा पर हैं । संबंधित एरिया के अंचलाधिकारियों ने बताया की खनन विभाग या बालू ठेकेदार ने कोई सूची उपलब्ध नहीं कराया है की उन्हें कितना क्षेत्र में बालू खनन करना हैं । अंचल कार्यालय ने बालू खनन के लिए कोई नापी ( सीमाकंण) प्रमाण -पत्र नहीं दिया हैं और न कभी इस दिशा में कोई जमीन का विवरणी मांगा गया हैं ।
स्थल का भौतिक निरीक्षण के बाद जारी होगा एलपीसी
बालू भंडारण के लिए लाइसेंस प्राप्त करने हेतु एलपीसी को खनन विभाग ने अनिवार्य कर दिया हैं । संबंधित अंचलाधिकारियों ने बताया की ब्रॉडसन कंपनी के नाम किसी तरह का एलपीसी जारी नहीं किया गया हैं । एलपीसी निर्गत करने के पहले उक्त खाता का कागजात एवं खेसरा( प्लौट) का भौतिक निरीक्षण किया जाएगा ।जमीन मालिक अगर दूसरे को एकरारनामा करता हैं तो वह एक हजार रूपये के स्टांप से कम का मान्य नहीं होगा । एकरारनामा( एग्रीमेंट ) प्राप्त व्यक्ति दूसरे किसी को उक्त जमीन का एग्रीमेंट नहीं कर सकता हैं । ऐसे स्थिति वाले को एलपीसी जारी नहीं किया जाएगा ।
सोन नदी के आसपास पेयजल की किल्लत ,हैंडपंप हुये बंद
सरकारी व्यवस्था का सही निरीक्षण नहीं होने के कारण बालू माफिया अवैध खनन ,जोरों पर कर रहे हैं । यह कहना गलत नहीं होगा की इसमें सरकारी मिलीभगत नहीं हैं । पर्यावरण विशेषज्ञ की मानें तो निर्धारित नियमों की विपरीत बालू का खनन का सीधा असर पर्यावरण और प्रकृति पर पड़ेगा । सोन तटवर्तीय इलाके में दल स्तर गिरने का कारण बालू खनन भी हो सकता हैं । मालूम हो की सोन तटवर्तीय इलाके के सैकड़ों गांवों का हैंजपंप( चापाकल) बंद हो गया हैं । जिसके कारण पीने के पानी का बड़ा किल्लत सामने आया हैं । जिसका सीधे असर जन जीवन पड़ रहा हैं ।
खनन एवं भूतत्व विभाग के अवर सचिव सुशील कुमार ने नदियों के पर्यावरण सुरक्षा के लिए बालूघाटों का रिपलेसमेंट स्टडी कराने का आदेश, अपने ज्ञापांक 1407 / एम दिनांक 8 मई 2019 के द्वारा जारी किया हैं ।इसमें स्पष्ट लिखा है की पर्यावरण ,वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय भारत सरकार के सुस्टेबल सेंड माइनिंग मैनेजमेंट गाइडलाइन 2016 का पालन सुनिश्चित करें ।

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