डॉ दिलीप अग्निहोत्री
उत्तर प्रदेश में सपा और बसपा दोनों का जीर्णोद्धार अवश्य हुआ, लेकिन उन्होंने जाति मजहब के जो समीकरण बनाये थे, वह पूरे नहीं हुए। उत्तर प्रदेश में भाजपा को पहले के मुकाबले कम सीट अवश्य मिली हैं,लेकिन उसको सभी वर्गों का समर्थन हासिल किया। निश्चित ही नरेंद्र मोदी और अमित शाह का करिश्मा बेजोड़ साबित हुआ, इसके साथ ही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की भूमिका भी उल्लेखनीय रही। उन्होंने जहाँ नरेंद्र मोदी की तरह मेहनत और ईमानदारी से अपने दायित्वों का निर्वाह किया, वहीं केंद्र सरकार की लोक कल्याणकारी योजनाएं प्रदेश में लागू करके विकास का नया अध्याय शुरू किया। विकास के इस मोर्चे पर उन्होंने पूर्ववर्ती सपा और बसपा दोनों को पीछे छोड़ दिया। दो वर्ष में ही उन्होंने विकास के नए रिकार्ड कायम किये।
पिछली सरकार के मुकाबले बहुत अधिक गेहूं, धान की खरीद की गई। हजारों करोड़ रुपये के निवेश प्रस्तावों का शिलान्यास भी हो गया। उन पर कार्य भी चल रहा है। पूर्वाचल एक्सप्रेस वे पर कार्य जारी है, सितंबर में बुंदेलखंड एक्सप्रेस वे का कार्य शुरू हो जाएगा। प्रधानमंत्री निर्धन आवास के मामले में योगी सरकार ने रिकार्ड बनाया है। शौचालय निर्माण का भी रिकार्ड बना।
चुनाव प्रक्रिया प्रारंभ होने के समय ही योगी आदित्यनाथ ने विपक्ष के सामने विकास के मुद्दे पर चुनौती पेश की थी। इसके लिए वह आंकड़े पेश किए थे। यह साबित करने का प्रयास किया कि अनेक क्षेत्रों में उनका कार्यकाल कांग्रेस, सपा ,बसपा पर भारी है। उन्होंने कहा था कि कांग्रेस को इस प्रदेश में सबसे अधिक समय तक शासन करने का अवसर मिला। लेकिन उसने प्रदेश को बीमारू बना दिया था। सपा और बसपा के करीब डेढ़ दशक के शासन में प्रदेश की बदहाली बढ़ गई। ये पार्टियां जातिवाद, मजहबवाद के समीकरण ही बनाती रही। सुशासन इनके एजेंडे में ही नहीं था। यही कारण था कि प्रदेश में निवेश और विकास का कोई माहौल ही नहीं रह गया था। अराजकता, र्भ्ष्टाचार , भाई भतीजावाद चरम पर था। जबकि उनकी सरकार उत्तर प्रदेश को विकास के मार्ग पर लाने में सफल रही है। इससे प्रदेश विकसित राज्यों की सूची में अपनी जगह बनाने की दिशा में बढ़ चला है।
योगी ने अपनी बात को प्रमाणित करने के लिए आंकड़े दिए। बताया कि प्रदेश ने विकास के अनेक बिंदुओं पर उल्लेखनीय स्थान बना लिया है। कुछ में तो यह पहले पायदान पर आ चुका है। कैराना में जो लोग पलायन करने को मजबूर थे, योगी सरकार आने के बाद वो लोग भी वहां लौटकर आये है। इस दौरान कोई भी दंगा नही हुआ है। प्रदेश की बदहाल तस्वीर को बदलने का काम किया गया। भ्रष्टाचार में जकड़ चुके प्रदेश को उससे उबरने का काम किया गया। कानून व्यवस्था बेहतर होने से पांच लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव आए है। पचास हजार करोड़ रुपये की परियोजनाओं पर कार्य भी शुरू हो गया है। पन्द्रह लाख लोगों को रोजगार मिलेगा।
पहली बार एक जनपद-एक उत्पाद योजना की शुरुआत की गई। सपा बसपा सरकारों ने पचपन हजार करोड़ रुपये गन्ना मूल्य का भुगतान किया था। यह कार्य उन्होंने दस वर्षों में किया। भाजपा सरकार ने दो वर्ष में सत्तावन हजार करोड़ रुपये का भुगतान किया है, गन्ना मूल्य भुगतान में उत्तर प्रदेश देश में नंबर वन हो चुका है। किसान सम्मान निधि के तहत यूपी के एक करोड़ से अधिक किसानों को पहली किस्त के तौर पर दो हजार रुपये उनके बैंक खातों में पहुचाये गए। दिव्यांग जनों की पेंशन चार सौ से बढाकर पांच सौ की गई। विधवा पेंशन योजना के अंतर्गत हमने उम्र की सीमा को खत्म किया ।
सामूहिक विवाह योजना शुरू की गई। चार लाख से अधिक नौजवानों को कौशल विकास के द्वारा रोजगार दिया गया। निराश्रित गौवंश के लिए स्थाई व अस्थाई निर्माण कर किसानों की समस्या का समाधान किया जा रहा है। पूर्वांचल एक्सप्रेस वे पर बिना जमीन के अदिग्रहण के सपा सरकार ने बिडिंग करा दिया था। अब पूर्वांचल के साथ बुंदेलखंड के लिए एक्सप्रेस वे बन रही है । यह बुंदेलखंड के सभी जिलों को जोड़ते हुए आगरा एक्सप्रेस वे से जुड़ेगी।
बुंदेलखंड के विकास के लिए डिफेन्स कॉरिडोर के लिए कार्य चल रहा है। नौ हज़ार करोड़ रुपये की पेयजल योजना बुंदेलखंड को दी गई है। दो वर्ष पहले दो एयरपोर्ट संचालन में थे,अब छह एयरपोर्ट का संचालन शुरू हो गया है। रीजनल कनेक्टिविटी स्कीम के तहत नौ एयरपोर्ट पर यूपी में कार्य किया जा रहा है। दो इंटरनेशनल हवाई अड्डे भी प्रदेश में बनाए जा रहे है, पहला एयरपोर्ट पश्चिमी यूपी में जेवर में तैयार हो रहा है और दूसरा इंटरनेशनल एयरपोर्ट पूर्वी यूपी में कुशीनगर में बनाया जा रहा है।
योगी ने प्रियंका गांधी की गंगा यात्रा पर कहा कि अच्छा है वह गंगा के जरिए प्रयागराज से वाराणसी तक गंगा यात्रा कर रही है। जो कार्य उनकी चार पीढ़ी नही कर सकी उसे नरेंद्र मोदी की नमामि गंगे योजना ने कर दिखाया है और गंगाजल आचमन करने लायक हुआ है। अच्छा होता प्रियंका गांधी अपने साथ राहुल जी और अपने सपा-बसपा के मित्रों को भी लेकर जाती तो उन्हें भी बीजेपी सरकारों के विकास कार्य का पता चलता। दिव्य भव्य कुम्भ का आयोजन भी योगी सरकार की उपलब्धियों में शामिल है। स्वच्छ कुंभ और सुरक्षित कुंभ की थीम सफल रही। आठ घंटे तक हजारों विद्यर्थियो ने पेंटिंग बनाई। गिनीज विश्व बुक रिकार्ड कायम हुआ। दस हजार सफाई कर्मियों ने एकसाथ सफाई करके विश्व रिकॉर्ड बनाया।
अक्षयवट और सरस्वती कूप के दर्शन साल के ग्यारह महीने हो सकेंगे। प्रयागराज मेला प्राधिकरण अक्षयवट और सरस्वती कूप की देखरेख करेगा। इलाहाबाद का नाम प्रयागराज कर दिया गया। सरकार के प्रयासों से पहली बार किले में हनुमान जी और सरस्वती कूप के दर्शन की व्यवस्था की गई। यह कार्य पहले भी हो सकते थे। लेकिन इसके लिए अपेक्षित इच्छाशक्ति का अभाव था।
प्रयागराज की कनेक्टिविटी के लिए गंगा एक्सप्रेस वे बनाने का निर्णय हुआ था। फोर लेन वाला यह एक्सप्रेस वे विश्व का सबसे लंबा एक्सप्रेस वे होगा। यह पश्चिमी यूपी को प्रयागराज से जोड़ेगा। छह सौ किलोमीटर लंबा यह एक्सप्रेस वे मेरठ से प्रयागराज तक बनेगा। जाहिर है कि योगी आदित्यनाथ ने मात्र दो वर्ष में विकास के मामले में विपक्ष के सामने बड़ी लाइन खींच दी है। दूसरी तरफ सपा और बसपा ने अपना वजूद बनाने के लिए गठबन्धन किया। इस गठबन्धन के पास भविष्य की कोई योजना नहीं थी। विकास की चर्चा नहीं होती थी। इसके अलावा शिखर पर तो दोनों पार्टियों की दोस्ती हो गई। लेकिन जमीन पर ऐसा खुशनुमा माहौल नहीं बन सका। डेढ़ दशक तक दोनों के बीच तनाव रहा। इनके लिए यह सब भूल जाना मुश्किल था।
दूसरी महत्वपूर्ण बात यह कि वोट ट्रांसफर कराने का मिथक भी टूट गया। यह अध्याय पुराना पड़ चुका है। इन पार्टियों की उस पर नजर नहीं थी जो कार्य योगी आदित्यनाथ ने जमीन पर किये थे। लेकिन आमजन इसको न केवल देख रहा था, बल्कि उसका उन्हें अनुभव भी था। यही कारण है कि सपा और बसपा दोनों के वोट में सेंधमारी हुई। पिछड़े और दलित वर्ग में भाजपा की पैठ बढ़ी है।

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