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Saturday, 1 June 2019

लेखपाल भर्ती घोटाले का मुख्य आरोपी अपर संचालक चकबंदी गिरफ्तार

हजरतगंज पुलिस ने पकड़ा, गुपचुप भेज दिया जेल

लखनऊ। सूबे के मुख्यमंत्री की सख्ती के बाद लेखपाल भर्ती और कई अन्य अनियमितताओं के आरोपी रहे अपर संचालक चकबंदी सुरेश सिंह यादव को हजरतगंज पुलिस ने शनिवार को गिरफ्तार कर गुपचुप तरीके से जेल भेज दिया। हालांकि यह कार्रवाई चकबंदी विभाग में एक फाइल का निस्तारण करने के लिये धनराशि मांगने और धमकी देने के मुकदमे में की गई है। बताते चले कि भर्ती घोटाले के सम्बन्ध में तीन मुकदमे हजरतगंज कोतवाली में पहले से दर्ज थे लेकिन पुलिस की मेहरबानी के चलते आरोपी ने कोर्ट से स्टे ले लिया था।

एएसपी पूर्वी सुरेश चन्द्र रावत ने बताया कि सुरेश सिंह यादव को परिवर्तन चौक के पास से गिरफ्तार किया गया है। सुरेश के खिलाफ गोरखपुर के कैपियरगंज निवासी योगेन्द्र कुमार ने 31 मई को देर रात आईपीसी की धारा 386, 504 और 506 के तहत केस दर्ज कराया था। योगेन्द्र का आरोप था कि चकबंदी विभाग की एक पत्रावली के निस्तारण के लिये उससे धनराशि की मांग की गई। रुपये देने से मना करने पर सुरेश ने उनके साथ गाली-गलौज की और जान से मारने की धमकी दी। गिरफ्तार सुरेश सिंह को गुपचुप तरीके से कोर्ट में पेश किया गया जहां से उसे जेल भेज दिया गया।

पुलिस की कार्रवाई पर उठे सवाल
सुरेश सिंह यादव की गिरफ्तारी को लेकर हजरतगंज पुलिस पर शनिवार को सवाल भी उठे। दरअसल पहले इस कार्रवाई को बेहद गोपनीय रखा गया पर, यह बात फैलने लगी तो अफसरों ने आनन फानन मीडिया को इसकी जानकारी दी। सुरेश सिंह के खिलाफ 24 अप्रैल और 25 अप्रैल 2019 को दो अलग-अलग मुकदमे हजरतगंज कोतवाली में लिखाये गये थे। इसमें पहला मुकदमा सुरेश सिंह यादव, संयुक्त संचालक चकबंदी रविन्द्र दुबे और अन्य कर्मचारियों के खिलाफ लिखाया गया था। जबकि दूसरा मुकदमा सुरेश सिंह यादव और प्रशासनिक अधिकारी बिहारी लाल के खिलाफ दर्ज हुआ था। इन दोनों ही मामलों में पुलिस कार्रवाई से बचती रही थी। इस पर ही सवाल उठे थे कि पुलिस ने आरोपी को काफी छूट दे रखी थी जिसका फायदा उठाते हुए ही उसने कोर्ट से गिरफ्तारी के खिलाफ स्थगनादेश ले लिया था। बताया जाता है कि विवादों में घिरने के बाद अधीनस्थ सेवा आयोग के अध्यक्ष रहे राज किशोर यादव ने अप्रैल 2017 में पद से इस्तीफा दे दिया था। अचानक पद छोड़ने के फैसले को लेकर काफी चर्चा भी हुई थी। वहीं, लेखपाल भर्ती समेत कई अन्य भर्तियों में धांधली होने की बात भी सामने आई थी। जिसके बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जांच कराने के आदेश दिये थे।

सख्ती के बाद हरकत में आयी पुलिस
सुरेश सिंह यादव के अब तक गिरफ्तार न होने की बात मुख्यमंत्री को पता चली तो उन्होंने काफी नाराजगी जतायी। इसके बाद ही ऊपर से नीचे तक अफसरों के हाथ-पांव फूल गये। सुरेश सिंह यादव को गिरफ्तारी पर स्टे मिल चुका था। लिहाजा पुलिस ने कई दिन से आ रही शिकायत पर एफआईआर दर्ज की और आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। शनिवार शाम को जहां हजरतगंज पुलिस ने इस बारे में मीडिया को बताया, वहीं शासन से भी इस कार्रवाई का प्रेस नोट जारी किया गया।

इन घोटालों से रहा नाता
वर्ष 2015-16 में चकबंदी लेखपाल के लिये 2831 पदों पर भर्ती का विज्ञापन निकाला गया था। चकबंदी निदेशालय ने आयोग को सामान्य वर्ग के 1901, एससी के 50, एसटी के 63 व ओबीसी के769 अभ्यर्थियों के चयन का प्रस्ताव दिया था। जिसके बाद आयोग ने 2,831 की जगह 2,783 अभ्यर्थियों का चयन कर चयन सूची चकबंदी आयुक्त को भेजी थी। जिसमें सामान्य वर्ग के 1,901 के स्थान पर 920, एससी के 50 के स्थान पर 104, एसटी के 64 के स्थान पर 65 और ओबीसी के 769 केस्थान पर 1694 अभ्यर्थियों के नाम शामिल थे। जांच में सामने आया कि ओबीसी वर्ग के 925 अभ्यर्थी अधिक चयनित किए गए थे। कृषि उत्पादन आयुक्त की जांच में भी लेखपाल भर्ती में अनियमितता पायी गई। इसके अलावा 70 चपरासियों को कनिष्ठ सहायक पद पर गलत तरीके से पदोन्नत करने का भी आरोप सच पाया गया था। ऐसे ही एक मामले में चकबंदी उप संचालक ने अधीनस्थ सेवा चयन आयोग के पूर्व अध्यक्ष राज किशोर यादव, सुरेश यादव, बबीता देवी लाठर, अब्दुल गनी, केशवराम, विनय श्रीवास्तव व महेश प्रसाद को भी आरोपी बनाया था।

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