कभी न कहें अपने बच्‍चे को ज्यादा देर ब्रश करने को, वजह जार हो जाएंगें हैरान | Alienture हिन्दी

Breaking

Post Top Ad

X

Post Top Ad

Recommended Post Slide Out For Blogger

Friday, 28 June 2019

कभी न कहें अपने बच्‍चे को ज्यादा देर ब्रश करने को, वजह जार हो जाएंगें हैरान

फ़्लोरोसिस की बड़ी वजह ये है कि टूथपेस्ट में फ़्लोराइड होता है, जो आमतौर पर दांतों को बैक्टीरिया से सुरक्षित रखता है, लेकिन इसकी अधिक मात्रा दांत की ऊपरी परत को घिस देती है. छोटे बच्चों के लिए टूथपेस्ट का कम इस्तेमाल करने की सलाह इसलिए भी दी जाती है.

दरअसल फ्लोरिसस का असर दांत आने वाले बच्चों के दांतों पर होता है , लेकिन अगर फ़्लोराइड की मात्रा को नियंत्रित नहीं किया जाए तो दांत बदरंग हो सकते हैं. दांतों की बनावट भी बिगड़ सकती है.वहीं इंडियन डेंटल असोसिएशन (आईडीए) की वेबसाइट के अनुसार, टूथपेस्ट सिर्फ़ दांत साफ़ करने का काम नहीं करता बल्कि यह दांतों को सुरक्षित रखने के लिए भी ज़रूरी है.

 

कोई भी टूथपेस्ट ख़रीदने से पहले उस पर असोसिएशन की मान्यता ज़रूर जांच लें. आमतौर पर टूथपेस्ट में पांच तत्व शामिल होते हैं. कैल्शियम फ़ॉस्फेट्स और सोडियम मेटाफ़ॉस्फ़ेट, ग्लिसरॉल या सॉर्बिटॉल, डिटर्जेंट, फ्लेवर और कलर एजेंट और फ़्लोराइड.

आईडीए के मुताबिक, टूथब्रश का इतिहास 3500-3000 ईसा पूर्व का है. 1600 ईसा पूर्व में चीनियों ने च्यूइंग स्टिक का विकास किया और इसके बाद 15वीं शताब्दी में चीनियों ने सूअर की गर्दन के बालों से ब्रसल्स वाले ब्रश का निर्माण किया. यूरोप में भी ब्रश बनाए गए लेकिन घोड़े के बालों से.बहुत अधिक ब्रश करना भी दांतों को नुकसान पहुंचा सकता है. हालांकि दिन में दो बार ब्रश करने की सलाह डेंटिस्ट भी देते हैं.

नई दिल्‍ली: अमेरिकन डेंटल असोसिएशन की वेबसाइट ने क़रीब 1700 बच्चों पर शोध करने के बाद बताया कि अधिक मात्रा में टूथपेस्ट (Toothpaste)  का इस्‍तेमाल दांतों को कमजोर करत देता है. वेबसाइट के मुताबिक “क़रीब चालीस फ़ीसदी अभिभावक अपने बच्चों को तय मात्रा से अधिक टूथपेस्ट देते हैं. जिस उम्र में बच्चों के दांत निकल रहे हों, उस उम्र में बच्चों को कम टूथपेस्ट देना चाहिए क्योंकि अधिक मात्रा में टूथपेस्ट का इस्तेमाल करने से उन्हें डेंटल फ़्लोरोसिस की शिकायत हो सकती है.”

No comments:

Post a Comment

Post Top Ad