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Monday, 23 October 2017

Nyay dharma sabha ने कहा कि राष्ट्र में जनता के केवल चार जनाधिकार- शिक्षा ,रोजगार , सुखसुविधा, सरंक्षण

Nyay dharma sabha ने कहा कि सरकार के यही चार मौलिक कर्तब्य हैं

सरकारी कार्यों में घूसखोरी, धन की हेराफेरी, गबन, घोटाला, जालसाजी पूर्णतः समाप्त हो जाएगी

काशीपुर/उत्तराखंड। न्यायधर्मसभा के संस्थापक एवं 111 प्रस्तावों के प्रतिपादक श्री अरविंद अंकुर जी का कहना है कि किसी भी राष्ट्र में जनता के केवल चार जनाधिकार होते हैं। दिनांक 22 अक्टूबर 2017 को काशीपुर ऊत्तराखण्ड के सुदामा लाल स्कूल में तहसील न्याय प्रचारक ज्योति राणा जी के नेतृत्व में न्याय चर्चा सम्पन्न हुई।
उत्तराखंड प्रभारी श्री किशन शर्मा ने संस्था का परिचय दिया तथा जनाधिकार पर ब्याख्यान दिया । बैठक में श्री सुशील राणा जी ने डिजिटल करेंसी पर अपने विचार ब्यक्त किये। और आंकिक मुद्रा प्रणाली सरकार तथा देश की जनता के हित में हैं। आंकिक मुद्रा से ही भ्रस्टाचार का अंत किया जा सकता है।
आंकिक मुद्रा प्रणाली के प्रभाव:-
1) भ्रष्टाचार से मुक्ति
2) कालेधन से मुक्ति
3) नकलीमुद्रा से मुक्ति
4) टैक्सचोरी से मुक्ति
5) अन्य मौद्रिक अपराधों से मुक्ति
रघुवेन्द्र जी ने पात्रतानुसार पद नियुक्ति प्रस्ताव पर सम्बोधित किया तथा इसका महत्व बताया। श्री एम् के सिंह जी ने टैक्स प्रणाली पर अपने विचार ब्यक्त किये। नरेंद्र रावत जी ने चार जनाधिकारों पर विचार रखे। और कहा

1. प्रथम 25 साल तक सभी ब्यक्तियों को समान, अबाध, नि:शुल्क शिक्षा एवं उचित प्रशिक्षण

2. प्रति परिवार समुचित रोजगार

3. प्रति ग्रामक्षेत्र समुचित सुविधा (सडक, बिजली, पानी, संचार, परिवहन आदि)

4. प्रति संवर्ग (मनुष्य, पशुपक्षी, पेडपौधे, जडवस्तुएं) समुचित चिकित्सा, सुरक्षा, बीमा बैंकिंग आदि संरक्षण

 

जनता के ये जो चार जनाधिकार हैं। सरकार के यही चार मौलिक कर्तब्य हैं। जनता को ये चार अधिकार न देकर अन्य कोई भी काम सरकार के लिये न्यायोचित नहीं है।
अब जानते हैं कि जनता के ये चार अधिकार क्यूं हैं और सरकार के यही चार कर्तब्य क्यों हैं ?

सरकार शब्द का वास्तविक शब्द सर्वकार है, जिसका अर्थ है- सबका हित करने वाली संस्था। वास्तव में सरकार कोई ब्यक्ति या दल नहीं है। यह एक ब्यवस्था है। जिसमें कुछ योग्य लोगों को अधिकार देकर समाज को परिचालित किया जाता है।
आज भी हम राजस्व/टेक्स/लगान देते हैं और सार्वजनिक कामों को करवाने के लिये ‘सरकार’ को जनमत द्वारा नियुक्त करते हैं।
हम टैक्स आदि इसलिये देते हैं कि हमारा सार्वजनिक काम सही से हो पाये।
स्पष्ट है कि शिक्षा, रोजगार, सुविधा एबं संरक्षण की प्राप्ति हमारा न्यायसंगत नीतिगत मौलिक अधिकार है।

और हम सरकार को नियुक्त करके उन्हें परिवारिक जीवन यापन हेतु वेतन एवं भत्ता इसलिये देते हैं कि वे सार्वजनिक कार्यों को निश्चिन्त होकर किया करें। यानी जनता को चारों जनाधिकार एवं तत्संबंधी सेवाएं देना सरकार का नैतिक कर्तब्य है।

अब आप लोग सोचें कि क्या यह न्ययोचित है-

1.एक ब्यक्ति को शिक्षा मिले दूसरे को न मिले ?

2. एक परिवार को रोजगार मिले दूसरे परिवार को न मिले ?

3. एक ग्राम को सड़क, बिजली, पानी, संचार, परिवहन आदि सुविधाएं मिलें और दूसरे ग्राम को न मिलें ?

4. एक सम्प्रदाय को चिकित्सा, सुरक्षा, बीमा, बैंकिंग आदि संरक्षण सेवायें मिलें और दूसरे सम्रदाय को न मिलें ?
अत हमें हमारे अधिकारों की प्राप्ति के लिये ब्यवस्था को शुद्ध करने की आवश्यकता है या नहीं है एवं यह हमारा कर्तब्य है या नहीं है।इस अवसर पर नमिता पंत,हेमा मिश्रा, सुमन चौहान,किरण शर्मा,मुबीन आलम,मुन्ना खा,अखिलेश शर्मा,यशपाल सिंह ,राजीव लोचन,देवेंद्र सिंह,भूपेंद्र शर्मा,हरीश चन्द रावत, संजय सिंह,चिंकी आलोक कुमार,हरिओम सिंह आदि उपस्थित थे।

राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी चन्द्रसेन ने बताया कि Nyay dharma sabha द्वारा न्यायस्थापना अभियान को दिन प्रतिदिन गति मिलती जा रही है । केंद्र सरकार कई प्रस्तावों को क्रियान्वन कर चुकी है । जनता भी प्रस्तावों की सराहना कर रही है । न्याय सभी को प्रिय है । सभी को न्याय की आवश्यकता है ।

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