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Tuesday, 23 January 2018

चिकित्सा क्षेत्र में अवैद्य चिकित्सकों की उपस्थिति चिंता का विषय : स्वास्थ्य मंत्री

लखनऊ । उत्तर प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री सिद्धार्थनाथ सिंह ने आज यहां कहा कि जन स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए पर्यावरण प्रदूषण संबंधित कानूनों और स्वास्थ कानूनों को संयुक्त रूप में प्रभावी किए जाने की आवश्यकता है क्योंकि ज्यादातर स्वास्थ्य संबंधी समस्याओें एवं बीमारियों के पीछे वातावरणीय कारण निहित होते हैं जैसे कि डेंगू, मलेरिया और चिकनगुनिया जैसी समस्या के पीछे पानी का ठहराव एक कारण है बिना इन कारणों का समाधान किए समस्या को स्थाई तौर पर हल नहीं किया जा सकता स्वास्थ्य मंत्री सोमवार को राजधानी स्थित एक ला स्कूल द्वारा आयोजित तीन दिवसीय औषधि एवं स्वास्थ्य कानून विषयक राष्ट्रीय सम्मेलन के उद्घाटन के अवसर पर बोल रहे थे स्कूल के युवा अधिवक्ताओं को संबोधित करते हुए श्री सिंह ने कहा कि प्रदेश में एक तरफ तो योग्य और अनुभवी डाक्टरों का अभाव है तो दूसरी तरफ कई चिकित्सकों द्वारा प्राईवेट प्रैक्टिस किए जाने की शिकायतें भी हैं चिकित्सा क्षेत्र में अप्रशिक्षित और अवैद्य चिकित्सकों, दवा व्यवसाइयों की उपस्थिति भी चिंता का विषय है हालांकि प्रदेश सरकार इन सभी स्थितियों के समाधान के लिए उपयुक्त कानूनों के तहत काम कर रही है फिर भी हमें इस विषय में नए समाधान तलाशने होंगे।

स्वास्थ्य मंत्री ने बौद्धिक सम्पदा अधिकार के तहत पारम्परिक घरेलू और विभिन्न देसी इलाजों जो कि दादा-दादी के नुस्खों के रूप में प्रचलित और प्रभावी हैं को पेटेंट द्वारा सुरक्षित किए जाने की आवश्यकता बताई और कहा कि वर्तमान सरकार इस विषय पर गंभीरता से विचार कर रही है
इसके पूर्व स्वास्थ्य मंत्री ने दीप प्रज्जवलित कर सम्मेलन का शुभरम्भ किया इस अवसर पर इलाहाबाद हाईकोर्ट लखनऊ बेंच के जज डीके अरोरा, केजीएमयू लखनऊ के वाइस चांसलर डा. एमएलबी भट्ट, ला स्कूल के निदेशक प्रो. बलराज चौहान और एमिटी विश्वविद्यालय लखनऊ परिसर के निदेशक प्रोजेक्टस् नरेश चंद्र उपस्थित रहें।

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