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Tuesday, 8 May 2018

कांग्रेस को बड़ा झटका, पूर्व राज्यमंत्री राजेंद्र गावित भाजपा में शामिल

होंगे पालघर संसदीय सीट से भाजपा के उम्मीदवार

मुंबई- पालघर संसदीय सीट के उपचुनाव में तू डाल-डाल तो मैं पात-पात का सियासी खेल जारी है। शिवसेना ने भाजपा के दिवंगत सांसद चिंतामण वानगा के परिवार को पार्टी में शामिल करके भाजपा को झटका दिया, तो वहीं भाजपा ने बड़ा दांव खेलते हुए कांग्रेस खेमे में हलचल मचा दी है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व राज्यमंत्री राजेंद्र गावित भाजपा में शामिल हो गए हैं, मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने एेलान किया है कि गावित पालघर सीट से भाजपा के अधिकृत उम्मीदवार होंगे।

गावित ने मंगलवार को मुख्यमंत्री फडणवीस, पार्टी प्रदेशाध्यक्ष रावसाहेब दानवे सहित वरिष्ठ नेताओं की मौजूदगी में भाजपा में प्रवेश किया। पार्टी प्रदेश मुख्यालय में प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने शिवसेना पर नाराजगी जताई। मुख्यमंत्री ने कहा कि गावित का नाम पार्टी की केंद्रीय कमेटी के पास भेजा जा रहा है। कमेटी की अनुमति मिलते ही पालघर सीट से गावित भाजपा के अधिकृत उम्मीदवार होंगे और 10 तारीख को अपना नामांकन पत्र दाखिल करेंगे। उन्होंने कहा कि भंडारा-गोंदिया लोकसभा सीट से भी पार्टी उम्मीदवार के नाम की घोषणा जल्द कर दी जाएगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि पालघर सीट भाजपा सांसद चिंतामण वनगा के निधन के बाद रिक्त हुई है। इस सीट से हम वनगा परिवार के किसी सदस्य को टिकट देनेवाले थे। लेकिन उससे पहले शिवसेना ने वनगा परिवार को पार्टी में शामिल कर, श्रीनिवास वनगा को उम्मीदवारी दे दी, जो कि दुर्भाग्यपूर्ण है। मुख्यमंत्री ने कहा कि पालघर भाजपा की सीट है। पार्टी के दिवंगत सांसद चिंतामण वनगा इस सीट से जीते थे। यह जानते हुए भी शिवसेना ने वनगा परिवार को पार्टी में मिलाकर, चिंतामण वनगा के बड़े पुत्र श्रीनिवास वनगा को उम्मीदवारी दी। अभी देर नहीं हुई है। शिवसेना अपने फैसले पर फिर से विचार करे। नामांकन वापस लेकर शिवसेना को भाजपा उम्मीदवार को समर्थन देना चाहिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि हम नहीं चाहते श्रीनिवास का नुकसान हो। परंतु चिंतामण वनगा ने भाजपा को बढ़ाने के लिए जीवन समर्पित कर दिया। यदि भाजपा उम्मीदवार की पराजय हुई तो चिंतामण वनगा हमें कभी माफ नहीं करेंगे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि भाजपा हमेशा अच्छे और कर्मठ कार्यकर्ताओं को सहयोग देती है। अन्य दलों के अच्छे नेताओं को पार्टी में शामिल किया जाता है। भाजपा में 10 प्रतिशत नेता पार्टी विचारधारा से प्रभावित होकर दूसरे दलों से आए हैं, वे अपने कामों से बड़े हुए हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि गावित जनाधार वाले नेता हैं और कांग्रेस में रहते हुए आदिवासी राज्यमंत्री रह चुके हैं। दानवे के मुताबिक हाल में हुई पार्टी संसदीय दल की बैठक में वनगा परिवार के किसी सदस्य को पालघर सीट से उम्मीदवारी देने का निर्णय लिया गया था। परंतु वनगा परिवार ने जल्दबाजी दिखाते हुए शिवसेना का दामन थाम लिया। शिवसेना को भाजपा को समर्थन देना चाहिए था, लेकिन शिवसेना ने मित्रधर्म का पालन नहीं किया। दानवे ने कहा कि वनगा परिवार के साथ पार्टी का एक भी जिला परिषद सदस्य, पार्टी पदाधिकारी अथवा कार्यकर्ता नहीं गया है। लिहाजा पालघर से भाजपा की जीत सुनिश्चित है। गावित ने कहा कि वे भाजपा में शामिल होकर जिले के विकास का प्रयास करेंगे। इससे पहले वनगा परिवार के शिवसेना में शामिल होने पर मुख्यमंत्री के सरकारी आवास वर्षा पर रातभर मैराथन बैठक चली। दोपहर तक सुगबुगाहट शुरू हो गई कि गावित भाजपा में शामिल होने की तैयारी में हैं।

राजेंद्र गावित प्रदेश की राजनीति के जाने-माने चेहरा हैं। वे आदिवासी समाज के बड़े नेता हैं। आघाड़ी सरकार में गावित आदिवासी कल्याण राज्यमंत्री थे। वे नंदुरबार जिले के रहनेवाले हैं। लेकिन पालघर से विधायक चुने गए थे। वर्ष 2014 में उन्होंने कांग्रेस के टिकट पर लोकसभा का चुनाव लड़ा था परंतु पराजित हो गए। वर्ष 2016 में विधान सभा के उपचुनाव में भी वे हार गए थे। मंगलवार को शिवसेना उम्मीदवार श्रीनिवास वनगा ने लाव-लश्कर के साथ अपना नामांकन दाखिल किया। पालघर सीट के उपचुनाव में त्रिकोणीय मुकाबला देखा जा सकता है। इधर भाजपा की सहयोगी पार्टी बहुजन विकास आघाड़ी के अध्यक्ष हितेंद्र ठाकुर ने भी दावेदारी ठोंकी है। पालघर और भंडारा-गोंदिया संसदीय सीट पर 28 मई को उपचुनाव होने हैं और नतीजे 31 मई को घोषित किए जाएंगे।

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