मेरठ। शहर में मकान-दुकान या काम्प्लैक्स जैसे रिहायशी या कामर्शियल निर्माण करते वक्त गंदगी और धूल फैलाने पर एक लाख रुपये तक का जुर्माना और जेल तक हो सकती है। एमडीए ने एनजीटी का हवाला देते हुए सात बिंदुओं वाली गाइडलाइन जारी कर दी है।
एमडीए सचिव राजकुमार ने बताया कि शहर में निर्माण कार्यों के दौरान निकलने वाली धूल और गंदगी का लोगों की सेहत पर बुरा असर पड़ता है। इस मामले में राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण (एनजीटी) ने महत्वपूर्ण दिशा निर्देश जारी किए थे जिन्हें एमडीए शहर में लागू कर रहा है। इसके तहत निर्माणकर्ता को निर्माण सामग्री को ढक कर रखा जाएगा और पानी का छिड़काव किया जाएगा ताकि धूल न उठे। निर्माण सामग्री लाने-ले जाने वाले वाहनों के टायरों और बॉडी की ठीक से धुलाई की जाए। साथ ही निर्माण सामग्री को ढककर ले जाया जाए। निर्माण एवं ध्वस्तीकरण से निकलने वाले अपशिष्ट को पुनरू प्रयोग किए जाने के लिए स्थान तय कर प्लांट स्थापित किया जाए। पेड़ों से झडने वाली पत्तियों एवं उानों से निकले अपशिष्ट को जलाया नहीं जाए और कंपोस्ट पिट बनाकर निस्तारित किया जाए।
अवैधानिक रूप से प्रयोग और संग्रहीत की जा रही प्लॉस्टिक एवं पॉलिथिन को नियमानसुार निस्तारित करने के लिए स्थान और प्रक्रिया का चिन्हीकरण किया जाए। एनजीटी ने इन नियमों का पालन न होने की स्थिति में बिल्डर पर जुर्माना लगाने का भी प्रावधान किया है। भवन सामग्री ले जाते समय न ढंकने पर पांच हजार रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा। खुले में कूड़ा कचरा आदि डालने पर 20 हजार रुपये से एक लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जाएगा। शर्तों का पालन न करने पर कई मामलों में पचास हजार तक के जुर्माने का भी प्रावधान किया गया है। शर्तों का उल्लंघन न करने पर एमडीए सक्षम न्यायालय में वाद भी दायर करेगा जिस पर जेल की सजा तक हो सकती है।


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