जौनपुर। ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य एवं स्वच्छता के लिए शासन द्वारा भेजी गई धनराशि को स्वास्थ्य महकमा खर्च ही नहीं कर पाया। जिससे राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन केवल टीकाकरण तक ही सिमट कर रह गया। एनआरएचएम के माध्यम से सरकार प्रत्येक वर्ष गांवों में ग्रामीण स्वास्थ्य, स्वच्छता एवं पोषण समिति को दस हजार रुपये मुहैया कराती है। जिससे गांव में दवा का छिड़काव, सुरक्षित प्रसव सहित साफ-सफाई पर खर्च करना होता है।
इस खाते का संचालन ग्राम प्रधान व एएनएम के संयुक्त हस्ताक्षर से होता है। विडंबना यह है कि पूरे वर्ष में कुछ उपकेंद्रों के माध्यम से बहुत कम रुपये ही खर्च हुए हैं। इस मद में पिछले वित्तीय वर्ष से पड़ा हुआ है। जिसका उपयोग विभागीय उदासीनता के कारण नहीं हो सका है। हर विकासखंड स्वास्थ्य सुविधाएं मुहैया कराने के लिए दर्जनों उपकेंद्र स्थापित किए गए हैं। जिनके माध्यम से गांव में सुरक्षित प्रसव, टीकाकरण, परामर्श, गर्भवती महिलाओं का स्वास्थ्य परीक्षण एवं संदर्भन सेवाएं भी दी जाती है। इन उपकेंद्रों पर एएनएम नियुक्त होती हैं। स्वास्थ्य शिक्षा अधिकारी ने बताया कि संविदा पर नियुक्त एएनएम को वित्तीय अधिकार नहीं दिया गया है। इस कारण अनटाइड फंड की धनराशि खर्च नहीं हो सकी है। सवाल उठना लाजमी है कि एएनएम की स्थाई नियुक्ति होने के बावजूद भी केवल कुछ उपकेंद्र पर ही इस धन का उपयोग क्यों किया गया। इसका जवाब स्वास्थ्य महकमा के जिम्मेदार अधिकारी नहीं दे सके।


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