नयी दिल्ली। कर्नाटक जीतने के लिए बीजेपी ने उन छोटी-छोटी बातों पर भी इस बार काम किया जो गुजरात चुनाव के दौरान उनके सामने आई और बाकी पार्टियां शायद नजरअंदाज कर गईं। 2014 लोकसभा चुनाव जीतने के बाद बीजेपी लगातार राज्यों में भी जीत दर्ज कर रही है कर्नाटक विधानसभा चुनाव में भी बीजेपी ने जीत दर्ज करके सभी को चौंका दिया कहा जा रहा है कि पार्टी अध्यक्ष अमित शाह की सोशल इंजीनियरिंग में महारत की वजह से यह कामयाबी बीजेपी को मिली है।
पार्टी अध्यक्ष अमित शाह ने अपने सबसे सफल पन्ना प्रमुख फॉर्मूले को यूपी के बाद इस बार कर्नाटक में भी लागू किया लेकिन शाह ने इस बार इसे दो हिस्सों में बांटा पन्ना और अर्द्ध पन्ना प्रमुख।
पहली बार बीजेपी ने राज्य में अर्द्ध पन्ना प्रमुखों की टीम बनाई भाजपा ने राज्य के 56,696 पोलिंग बूथों के 4.96 करोड़ मतदाताओं पर करीब 10 लाख अर्द्धपन्ना प्रमुख तैनात किए हैं यानी एक अर्द्ध पन्ना प्रमुख के पास 45 से 50 मतदाताओं की जिम्मेदारी है।
गुजरात चुनाव में कई सीटों पर कम अंतर से हार-जीत के बाद बीजेपी ने कर्नाटक में इस फॉर्मूले को अपनाया है इसकी जिम्मेदारी बीजेपी राज्य के चुनाव प्रबंधक मुरलीधर को सौंपी।
2014 के लोकसभा चुनावों के दौरान पन्ना प्रमुखों की रणनीति को अमित शाह ने ही इजाद किया था।
उन्होंने इस फ़ॉर्मूले को यूपी में लागू किया और असर यह हुआ कि सहयोगी दलों के साथ शाह 80 में से 73 सीटें जीतने में सफल रहे।
फिर बारी आई उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव की इस फ़ॉर्मूले की बदौलत यहां भी 2017 के यूपी चुनाव में भाजपा को 403 में से 325 सीटें मिलीं यह फ़ॉर्मूला हर राज्य में लागू हुआ और बीजेपी जीतते चली गई।
कर्नाटक में भी यह फ़ॉर्मूला लागू किया गया अर्द्ध पन्ना प्रमुखों के ऊपर पन्ना प्रमुख को रखा गया उसके ऊपर बूथ प्रमुख फिर एरिया प्रमुख और चुनाव प्रभारी को जगह दी गई।
कर्नाटक में बीजेपी ने 224 सीटों पर 500 से ज्यादा सांसद और एमएलए तैनात किए इनका साथ केंद्रीय मंत्री सीएम ने दिया जो निचले स्तर के कार्यकर्ताओं से जुड़े रहे।


No comments:
Post a Comment