सिंगापुर। ट्रम्प ने ट्वीट किया हम दोनों इस मौके को दुनिया की शांति के लिए बेहद खास पल बनाने की कोशिश करेंगे! अब ये देखना दिलचस्प होगा कि दोनों नेता इस मीटिंग में क्या कसमें-वादे निभाते हैं। सवाल ये भी है कि आखिर दोनों नेताओं ने मीटिंग के लिए सिंगापुर जैसी जगह को ही क्यों चुना? क्या इसके पीछे कोई रणनीति है? आखिरकार वह एेतिहासिक पल आ ही गया जब दुनिया के दो दुश्मन देश अपनी पुरानी कड़वी बातें भूलकर एक साथ मिलेंगे। यूएस प्रेसिडेंट डोनल्ड ट्रम्प और नॉर्थ कोरिया का तानाशाह किम जोंग उन 12 जून को सिंगापुर में मुलाकात करने वाले हैं।
सिंगापुर को दुनिया में सबसे अत्याधुनिक और सुरक्षित शहर माना जाता है। ये शहर कई सफल अंतरराष्ट्रीय शिखर सम्मेलनों की मेजबानी कर चुका है। इसके अलावा सिंगापुर के अमेरिका और नॉर्थ कोरिया दोनों से ही दोस्ताना रिश्ते हैं। एशिया का सबसे सुरक्षित शहर होने के साथ ये साउथ एशियन इकोनॉमिक हब और सबसे तटस्थ देश भी माना जाता है।
इस बात की भी चर्चा की जा रही है कि नॉर्थ कोरिया के पुराने प्लेन से किम जोंग का लंबी दूरी तक जाना आसान नहीं है। इसके चलते डिप्लोमेटिक मीटिंग होस्ट करने वाले स्वीडन और स्विट्जरलैंड बाहर हो गए।
फिर मंगोलिया के नाम पर भी बात हुई थी। लेकिन चीन और रूस से घिरा ये देश ट्रम्प के लिए उतना ठीक नहीं माना गया।
2015 में चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग और तत्कालीन ताइवानी राष्ट्रपति मा यिंग जेओ के बीच बैठक की मेजबानी सिंगापुर ने ही की थी।
सिंगापुर और अमेरिका की दोस्ती भी जगजाहिर है। दोनों के बीच मुक्त व्यापार समझौता है। 2012 में ओबामा प्रशासन ने सिंगापुर को स्ट्रैटजिक पार्टनर के रूप में स्वीकार किया था। नॉर्थ कोरिया के बीच राजनयिक संबंधों की शुरुआत 1975 हुई थी। 2017 में अतंरराष्ट्रीय प्रतिबंधों के कारण सिंगापुर ने भी नॉर्थ काेरिया से ट्रेड रिलेशन तोड़ लिए थे। सिंगापुर में मीडिया और सार्वजनिक समिट पर कड़ी पाबंदियां हैं। यही चीज नॉर्थ कोरिया के सबसे ज्यादा मुफीद है। सिंगापुर में नॉर्थ कोरिया का पूरी तरह से संचालित होने वाला दूतावास है।
सिंगापुर और नॉर्थ कोरिया के बीच सहयोग का लंबा इतिहास रहा है। प्योंगयांग में पहला फास्ट फूड रेस्ट्रॉन्ट हो या पहली लॉ फर्म दोनों को सिंगापुर के लोगों ने ही शुरू किया।


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