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Sunday, 24 June 2018

मोदी सरकार भी फेल: 4 वर्षों में सीमा पर बढ़ी हथियारों, नशीली दवाओँ की तस्करी


नई दिल्ली। भारतीय सीमा पर तस्करी के मामलों में बढ़ोतरी हुई है. गृह मंत्रालय ने इस बाबत आंकड़ें जारी किए हैं। ये सभी आंकड़े साल 2015 से लेकर 2017 तक के हैं. भारत के अलग-अलग देशों से जुड़ी सीमाओं पर हथियार, मवेशी और नशेली पदार्थों की तस्करी में इजाफा देखा गया है, इसके साथ-साथ तस्करों की गिरफ्तारी के आंकड़े में भी बढ़ोतरी हुई है।

गृह मंत्रालय के द्वारा जारी डाटा के अनुसार, भारतीय अंतरराष्ट्रीय सीमा जैसे पाकिस्तान, बांग्लादेश, भूटान, नेपाल और म्यांमार पर हथियार, ड्रग्स और मवेशियों की सीमा पार तस्करी में साल 2015 के आंकड़े 19,537 से बढ़कर साल 2017 तक 31,593 हो गए हैं। सिर्फ साल 2016 में ही 23 हजार 198 केस रजिस्टर किए गए हैं।

गौरतलह है भारती चीन सहित इन सभी देशों के साथ 15,000 किलोमीटर लंबी भूमि सीमा साझा करता है। इन सीमाओं को गृह मंत्रालय के आदेश के तहत काम कर रहे विभिन्न सीमावर्ती सुरक्षा बलों द्वारा संरक्षित किया जाता है। इस तरह के सीमा पर तस्करी मामलों में पकड़े गए तस्करों की संख्या साल 2015 और 2017 के बीच लगातार बढ़ी है।

आंकड़ों के अनुसार, 2015 में 1,501 तस्करों को गिरफ्तार किया गया था जो 2016 में 1,893 और पिछले वर्ष के दौरान 2,299 तक पहुंच गया था। गौरतलब है कि करीब 4 हजार किलोमिटर लंबी भारत-बांग्लादेश सीमा पर साल 2015 में 18,132 तस्करी के मामले सामने आए, जो 2016 में 21,771 हो गए. वहीं आंकड़ों के अनुसार, पिछले साल इन मामलों की संख्या 29,693 थी।

हालांकि, भारत-बांग्लादेश सीमा पर तस्करों की गिरफ्तारी की संख्या पिछले साल 2015 की तुलना में कम हुई है. दरअसल साल 2015 में 656 तस्करों को गिरफ्तार किया गया था, जबकि 2016 में 751 तस्कर पकड़े गए। वहीं साल 2017 में यह संख्या घटकर 633 रह गई। वहीं दूसरी अंतर्राष्ट्रीय सीमाओं में से साल 2015 में नेपाल के साथ नशीले पदार्थों, हथियार और मवेशी तस्करी के 1,158 मामले सामने आए। 2016 में इन मामलों की संख्या 1,173 थी और 2017 में यह संख्या 1,563 रही।

गौरतलब है कि साल 2017 में सीमा पर तस्करों से बरामद गिए गए मवेशियों की संख्या 1,63,180 थी, जबकि 2016 में यह 1,71,869 हो गई. हालांकि पिछले साल यानी 2017 में बरामद किए गए मवेशियों की संख्या घटकर 1,30,806 सामने आई है। वहीं एक चौंकाने वाली बात भी है, दरअसल आंकड़ों के मुताबिक, 3,000 किलोमीटर लंबी भारत-चीन सीमा ने इन मामलों में से किसी एक मामले की कोई रिपोर्ट नहीं हुई है।

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