सिविल अस्पताल पर एंबुलेंस न देने का आरोप

लखनऊ। सरकार जहां मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं देने के लिए हर संभव प्रयास कर रही है वहीं अस्पतालों में बैठे अफसर व कर्मचारी लोगों को इन सुविधाओं से वंचित कर उन्हें दर-दर भटकने पर मजबूर कर रहे हैं। मामला राजधानी स्थित सिविल अस्पताल का है। जहां एक गंभीर मरीज को रेफर तो कर दिया लेकिन परिजनों को एंबुलेंस देने से ही मना कर दिया। देर होने से मरीज की भी हालत बिगड़ती गयी। आनन फानन में परिजनों ने 108 एंबुलेंस को फोन किया। एंबुलेंस तो आयी लेकिन उसके आने से कुछ ही देर पहले ही मरीज की मौत हो चुकी थी। वहीं अस्पताल प्रशासन ने अस्पताल में आने से पहले ही मरीज की मौत की बात कहकर अपना पल्ला झाड़ लिया जबकि वहां मौजूद लोगों कहना था कि समय पर यदि मरीज को एंबुलेंस मिल जाता तो शायद उसकी जान बच जाती।
-हृदय रोग से ग्रसित थी मृतका
सुल्तानपुर जनपद के जगदीशपुर निवासी आयशा (40) काफी दिनों से हृदय रोग से ग्रसित थी। बुधवार को अचानक उसकी तबीयत खराब होने पर परिजन उसे लेकर जगदीशपुर अस्पताल गए। जहां के डॉक्टरों ने उसे लखनऊ के सिविल अस्पताल रेफर कर दिया। यहां आने पर इमरजेंसी के चिकित्सकों ने मरीज की हालत गंभीर बताकर केजीएमयू ट्रॉमा के लिए रेफर किया।
मृतका के पति शमीम ने आरोप लगाया कि पत्नी को जब सिविल अस्पताल में खड़ी एंबुलेंस कि मांग की तो अस्पताल के कर्मचारियों ने द्वारा ड्राइवर ना होने की बात कहकर एंबुलेंस भेजने से ही इनकार कर दिया गया और कहा गया कि वह दूसरी एंबुलेंस की व्यवस्था कर ले।
शमीम का कहना था कि काफी देर होने से पत्नी की हालत पहले से और गंभीर हो गई। बाद में 108 एंबुलेंस को फोन किया लेकिन उसके आने से पहले ही पत्नी की मौत हो चकी थी। मृतक के पति का कहना था कि यदि उन्हें समय से एंबुलेंस मिल जाती तो शायद उनके मरीज की जान बच जाती। उसने ड्यूटी कर रहे चिकित्सकों पर भी बदतमीजी का आरोप लगाया।
शिकायत मिली तो कराएंगे जांच
-डॉ. हिम्मत सिंह दानू, निदेशक सिविल अस्पताल
सिविल अस्पताल के निदेशक डॉ. हिम्मत सिंह दानू ने कहा कि मरीज की अस्पताल में आने से पहले ही मौत हो चुकी थी। वहीं उन्होंने कहा कि यदि परिजनों की तरफ से कोई शिकायत मिलती है तो मामले की जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

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