मुंबई : किसानों की खुदकुशी को लेकर बड़ा खुलासा हुआ है। महाराष्ट्र में इस साल जनवरी और मार्च के बीच 610 किसानों ने खुदकुशी की है। इससे पता चलता है कि इस साल के पहले तीन महीने में प्रदेश के विभिन्न इलाकों में हर दिन सात किसानों ने खुदकुशी करने के लिए मजबूर हुआ। यह चिंता जनक ट्रेंड महाराष्ट्र सरकार और उनके अधिकारियों द्वारा पेश किए गए भ्रम को दूर करती है। जो एक स्कीम के जरिए किसानों की खुदकुसी को रोकने के लिए कदम उठाने का दावा करती है। लेकिन यह स्कीम में भ्रष्टाचार के आरोपों से घिर गया है और बेअसर होता दिख रहा है। इससे भी अधिक चिंता की बात यह है कि इस राज्य के कई हिस्सों गंभीर सूखे की समस्या है। हर रोज यह बद से बदतर होती जा रही है।
एक आरटीआई के जवाब में महाराष्ट्र सरकार ने डेटा जारी किया। जिसमें कहा गया है कि इस साल जनवरी से मार्च के बीच अमरावती में 227 किसानों ने खुदकुशी की। औरंगाबाद में 198, नासिक में 119, नागपुर में 38, पुणे में 29 किसानों ने खुदकुशी की जबकि कोंकण में एक भी किसानों आत्महत्या नहीं की। किसानों के नेता ने कहा कि मराठवाड़ा, यावतमाल और उसके आस-पास के इलाकों में स्थिति लगातार खराब हो रही है। इन इलाकों में सूखे ने स्थानीय लोगों की चिंता बढ़ा दी है।
महाराष्ट्र में किसानों की समस्याओं से निपटने में असफल रहने को लेकर बीजेपी के प्रवक्ता अभिषेक मिश्रा ने कहा कि मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़णवीस कह चुके हैं कि एक किसान की मौत भी चिंता का विषय है। साथ ही मिश्रा ने कहा कि हमारी पार्टी की सरकार ने 34 जिलों में ‘जलयुक्त शीवर अभियान’ चलाया है। इसके तहत किसान पानी को स्टोर कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने ‘छत्रपति शिवाजी महाराज शेतकरी सम्मान योजना’ के तहत 24,000 करोड़ रुपए किसानों की कर्जमाफी के लिए दिए हैं। हालांकि सीनियर पत्रकार गिरिश कुबेर ने कहा कि ‘जलयुक्त शीवर अभियान’ फेल हो गया है क्योंकि यह पूरी तरह से बारिश पर निर्भर है। यह स्कीम पेपर पर बहुत अच्छा है।

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