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Friday, 3 May 2019

कौहन व देवलान में यमुना की जलधारा प्रभावित कर खोदी जा रही मौरंग

फतेहपुर। यमुना नदी की जलधारा से मनमानी तरीके से बांध और सड़क बनाकर मौरंग निकालने की वजह से मछली आखेट में आ रही दिक्कतों के कारण दो पक्षों में सीधी तनातनी शुरू हो गयी है। इसी के चलते दो दिन पहले घाटों में असलहों का प्रर्दशन खुले आम देखने को मिला। सूत्रों की माने तो जिला और पुलिस विभाग के कुछ आलाधिकारी मौरंग कारोबारियों की ऊंची पकड़ के आगे उनके सामने बेबश नजर आ रहे है। कहा तो यह भी जा रहा है कि अवैध तरीके से यमुना के बीचो बीचों से बड़ी मशीने लगाकर निकाली जा रही मौरंग की बिक्री का कुछ हिस्सा आलाधिकारियों और संसदीय चुनाव लड़ रहे कुछ प्रत्याशियों के बीच पहुंचाई जा रही है। धन और बल के चलते बौना बन चुका प्रशासन पूरी तरह आंख मूंदे हुये है यही वजह है कि रामनगर कौहन और देवलान में यमुना की जलधारा को भी प्रभावित कर दिया गया है। जिसकी वजह से मछली आखेट का कारोबार काफी हद तक प्रभावित हुआ। चौभइया का डेरा मजरे अढ़ावल प्रधान बृजमोहन निषाद ने इस बाबत जिलाधिकारी संजीव कुमार सिंह को एक शिकायती पत्र देकर तुरन्त कार्रवाही किये जाने की मांग की है।सूत्रों के अनुसार सत्रहवीं लोकसभा के लिये चल रही निर्वाचन प्रक्रिया में इस बार यमुना की बालू के मफियाओ की भी सक्रियता परवान चढ़ी है। बाँदा में बैठकर इस जिले की बालू से जुड़े काले कारोबार की दिशा व दशा तय करने वाला राजनीति से जुड़ा मफियाओ का उस्ताद कांग्रेस के साथ बताया जाता है। संसदीय राजनीति में स्थानीय स्तर पर बड़ा नाम “लाला और बाबा” भी पर्दे के पीछे सक्रिय देखे जा रहे है। एक गैर प्रदेश का बड़ा मोरम कारोबारी गठबंधन के सिस्टम में शामिल है। मोरम मफियाओ ने सर्वाधिक भाव सत्तारुढ़ भाजपा को दिया है, जिनकी संख्या आठ बताई जाती है। गठबंधन के साथ छः के होने की खबर है, वही कांग्रेस के साथ दो को जोड़ा जा रहा है। बताते है कि फतेहपुर जनपद में मोरम के बड़े कारोबार में सालाना अरबों का खेल होता है। कई नामचीन माफिया कालिन्दी का सीना चीरकर बीच धारा से लाल सोना निकालने की कूबत रखते हैं। इनमे इस जिले के अधिकांश कारोबारी पेटी डीलर है। वास्तव में असली खेल यमुना के उस पार बाँदा से संचालित होता है। रेट का खेल भी वही से तय होता। दादू ने जो रेट तय कर दिया वह पत्थर की लकीर हो गई। इधर कुछ एक वर्षों से गैर प्रान्त व पूर्वांचल व पश्चिमांचल के मोरम के बड़े कारोबारियों की इंट्री से प्रतिस्पर्धा तो बढ़ी है, किंतु राज आज भी दादू का ही चलता है।इस चुनाव में सोलह मोरम मफियाओं की दस्तक सुनी जा रही हैं। केन्द्रीय मन्त्री के साथ साथ भाजपा प्रत्याशी साध्वी निरंजन ज्योति के पाले में आठ की संख्या होने की बात कही जा रही है। इनमे वो भी है जिनका जुड़ाव हमीरपुर से भी है। वहीं गठबंधन के प्रत्याशी सुखदेव प्रसाद वर्मा के पाले वालों की संख्या छः हो चुकी है। सांसद रहते मोरम कारोबारियों की पूरी तीन पाँच की गड़ित का हिसाब रखने वाले कांग्रेस प्रत्याशी राकेश सचान के पास फिलहाल दो की संख्या है किन्तु दादू का उनके पाले में होने से उनका भाव कही से कमतर नहीं आँका जा सकता। ये सभी अपने अपने प्रत्याशियों की तन-मन-धन से तो मदद कर ही रहे है, साथ ही जरूरत पड़ने पर इनके गुर्गे धनबल व बाहुबल के प्रदर्शन की पूरी तैयारी में है। क्योंकि ये माफिया वर्ग शासन और प्रशासन में भी पूरी दखल रखता है, इसलिये जिम्मेदारों की नजरें भी इनायत रहना लाजिमी है।इस महासमर में लाला और बाबा की प्रभावी जोड़ी के भी सक्रिय होने की बात सूत्र कह रहे है। यह अति चर्चित वही जोड़ी है, जिसके तिलिस्म से पार पाना लगभग नामुमकिन माना जाता है। क्योंकि ये माफिया वर्ग हमेशा पूरे पावर में रहते है, और दोयम दर्जे के अधिकारियों को एक झटके में इधर से उधर पटकवाना इनके रोजमर्रा में शामिल है। ऐसे में जिम्मेदारों की जरा सी ढिलाई बड़ी चुनौती का सबब भी बनती रही है और अब चुनाव का अंतिम सप्ताह चल रहा है और यहाँ के प्रत्याशियों की फितरत में हमेशा से खासकर यमुना पट्टी के वोटरों को खरीदना शामिल रहा है। लोकसभा चुनाव में मफियाओ का प्रयोग कोई पहली बार नहीं हो रहा है, पिछले चुनाव में भी इनका सिस्टम सजता रहा है, वजह भी साफ है, बगैर सियासी सहयोग के यमुना का जिगर चीरती पनचक्की का प्रयोग क्या सम्भव है, पोकलैंड सरीखी मशीनों का धड़ल्ले से उपयोग, किसानो की कृषि योग्य जमीन पर बेधड़क ट्रक-लोडरों का आवागमन क्या सम्भव है, और मोरम का मनमुआफिक रेट बगैर राजनैतिक संरक्षण के सम्भव ही नहीं। ओवरलोडिंग की भी बाकायदे बोली और नियमित चढ़ावा चढ़ाना पड़ता है, तब जाकर रंग चोखा होता है इसीलिये दूर की सोचते हुए स्थानीय मोरम के काले कारोबारियों ने बाकायदे दादू के पास बैठकर योजना बनाई और फिर प्रत्याशी तय कर अपने हित का मिशन पूरा करने में जुट गये हैं।
ज्ञातव्य रहे कि आधुनिक राजनीति में ये सब भी अहम हिस्सा है, खेलता कोई है, खिलाता कोई है और सिर्फ देख कर मजा लेता कोई और है। केन्द्र में तो हाई प्रोफाइल माफिया है, बाकी तो प्यादे चक्कर लगाते रहते है। अढ़ावल प्रधान ने दो दर्जन से अधिक ग्रामीणों के साथ यहा आकर जिलाधिकारी को शिकायती पत्र देने के बाद जिले की सांसद साध्वी निरंजन ज्योति को भी मामले से अवगत कराया। उन्होंने बताया कि जलधारा को प्रभावित करने से मत्स्यआखेट का कारोबार प्रभावित हो रहा है और लगातार नुकसान उठाना पड़ रहा है। मना करने पर मौरंग माफिया लड़ाई झगड़े पर अमादा हो रहे है और संबंधित पुलिस मौरंग माफियाओं का पक्ष लेकर कोई भी बात नही सुन रही है।

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