मुखबिर योजना के बाद भ्रूण लिंग जांच पर ट्रैकर से कसेगा Ultrasound सेंटरों पर शिकंजा
लखनऊ। सरकार ने बेलगाम Ultrasound सेंटरों पर शिकंजा कसने का खाका तैयार कर लिया है। अब वह ‘मुखबिर योजना के बाद सेंटरों पर ट्रैकर सिस्टम लगाने पर विचार कर रही है।
दरअसल, प्रदेश के कई जिलों में लिंगानुपात में काफी गिरावट आ रही है। वहीं अल्ट्रासाउंड सेंटरों में चल रहे खेल की निगरानी मुश्किल हो रही है। लिहाजा राज्य सरकार ने भ्रूण लिंग की जांच पर लगाम लगाने के लिए ‘मुखबिर योजना के साथ-साथ तकनीक को भी अडॉप्ट करने का फैसला किया है। अब प्रदेश के सभी अल्ट्रासाउंड सेंटरों में ट्रैकर सिस्टम अनिवार्य करने का प्लान है।
इसके लिए जिला व प्रदेश मुख्यालय पर सर्वर रूम बनेंगे। जिले में सीएमओ कार्यालय में सर्वर रूम से सभी सेंटरों की मशीन में लगे ट्रैकर सिस्टम कनेक्ट करके मॉनीटरिंग होगी। एक सर्वर को बनाने पर करीब सात लाख रुपये खर्च आएगा। इसको लेकर संयुक्त निदेशक परिवार कल्याण के नेतृत्व में बनी टीम ने संबंधित तकनीक का अध्ययन कर रिपोर्ट शासन को भेज दी है।
पायलेट प्रोजेक्ट के तौर पर झांसी जिला प्रशासन ने की पहल
संयुक्त निदेशक परिवार कल्याण डॉ. वीरेंद्र कुमार ने बताया कि टै्रकर सिस्टम राजस्थान के कुछ जिलों में लागू किया गया है। वहीं पायलेट प्रोजेक्ट के तौर पर झांसी जिला प्रशासन ने आधा दर्जन निजी सेंटरों पर ट्रैकर सिस्टम लगवाया है। चार माह पूर्व बलरामपुर के रेडियोलॉजिस्ट डॉ. ऋषि कुमार व डफरिन अस्पताल की डॉ. संगीता श्रीवास्तव को तकनीक के अध्ययन के लिए झांसी भेजा गया था। रिपोर्ट मिलने पर पूरा प्रोजेक्ट बनाकर शासन को भेजा गया है।
केंद्र संचालक को सिस्टम लगाने पर खुद करना होगा खर्च
राज्य में करीब 5400 व लखनऊ में लगभग 480 अल्ट्रासाउंड सेंटर पंजीकृत हैं। सरकार पीसीपीएनडीटी कानून के तहत अब सेंटरों के पंजीकरण व नवीनीकरण में ट्रैकर सिस्टम अनिवार्य करने जा रही है। इस सिस्टम पर 30 से 35 हजार खर्च होगा, जो केंद्र संचालक को वहन करना होगा।
Ultrasound मशीन में लगेगा ट्रैकर
विशेषज्ञों के मुताबिक ट्रैकर अल्ट्रासाउंड मशीन में लगेगा। इसमें डाटा स्टोर की क्षमता होगी। साथ ही पेंशेंट रिकॉर्ड, मशीन के ऑपरेट होने का समय, मशीन के ऑफ होने का समय, गर्भवती के जांच का समय, फॉर्म एफ का ब्योरा व डायग्नोस के दौरान अल्ट्रासाउंड का प्रोब शरीर के किस अंग पर गया, कितनी देर तक संबंधित अंग की डायग्नोस पर फोकस किया गया। यह पूरी रिपोर्ट विजुअल के साथ रिकॉर्ड होगी।
कोर्ट में ट्रैकर एक हथियार बनेगा
राज्यभर में अब तक पीसीपीएनडीटी कानून के तहत 195 मुकदमे दर्ज किए गए हैं। इसमें सिर्फ 12 लोगों को ही दंडित किया जा सका है। कारण, अधिकारी कोर्ट में भ्रूण लिंग की जांच करने वाले सेंटरों के खिलाफ पुख्ता सुबूत रखने में असफल रहे हैं। ऐसे में धंधे में लिप्त लोग कार्रवाई से बच निकले। वहीं अब ऐसे लोगों के खिलाफ ट्रैकर एक हथियार बनेगा। गर्भ में बेटियों की जिंदगी का सौदा करने वालों की अब खैर नहीं, Ultrasound सेंटरों की निगरानी के लिए अब ‘ट्रैकर’ लगाने की सरकार की योजना इसके लिए अच्छी पहल है।
-एजेंसी
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