
भारत के स्मार्टफोन मैन्युफैक्चरिंग का हब बनने में स्किल्ड लेबर और कंपोनेंट की कमी सबसे बड़ी रुकावट है। टैक्स की जटिल व्यवस्था (Complex system) भी एक दिक्कत है। पिछले हफ्ते इंडिया मोबाइल कांग्रेस में आए विदेशी कंपनियों के एक्जीक्यूटिव्स ने खास बातचीत में यह बात कही। उनके मुताबिक यहां न तो महंगे चिप-सेट बनते हैं, न ही कैमरा और दूसरे हाई-एंड कंपोनेंट। सिर्फ 5% कंपोनेंट यहां के बने होते हैं। फोन बनाने के लिए स्किल्ड लेबर चाहिए, लेकिन इसमें इन्वेस्टमेंट नहीं हो रहा है।
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