
सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि सजायाफ्ता कैदियों को भी पेरोल या फर्लो के जरिए खुली हवा में सांस लेने और फैमिली से मिलने का वक्त मिलना चाहिए। एक मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा- इस तरह के मामलों को मानवीय तरीके से डील किया जाना चाहिए। पेरोल और फर्लो ग्रांट करने के लिए 1955 के रूल्स को अपग्रेड किए जाने की जरूरत है।
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