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Friday, 12 January 2018

कलयुग में एकमात्र किन्नर ही हैं जिनके श्राप और वरदान फलित होते हैं!


सनातन धर्म में पत्थर से लेकर जीव-जंतु तक पूजे जाते हैं। वैज्ञानिक दृष्टि से भी हर पदार्थ में अपनी खास दिव्य ऊर्जा का समावेश होता है। यह ऊर्जा नकारात्मक और सकारात्मक दोनों हो सकती हैं। कुछ ऐसे विशेष पदार्थ और जीव हैं जिनमें नकारात्मक ऊर्जा के हरण की शक्ति होती है। संपूर्ण ब्रह्मांड शिव और शक्ति के मिलन से बना युगमक ही है। युगमक का अर्थ होता है निषेचित अंडे, जिसमें संपूर्ण जीव जगत विद्यमान है। किन्नरों में पर और नारी दोनों का अंश होता है और कलयुग में भगवान शिव का दिया वरदान इनके साथ होने के कारण इनका दिया श्राप और वरदान दोनों कारगर होता है।

नवग्रहों की श्रेणी में बुध एक ऐसा ग्रह है जिसे प्राण वायु और प्रकृति की संज्ञा प्राप्त है। बुध ही जीवन और लिंग भेद में अंतर का कारक ग्रह है। जब कुंडली में बुध ग्रह पीड़ित अथवा दूषित हो जाता है। तब जीव जंतुओं में तीसरी योनि की उत्पत्ति होती है। जिसे हम अर्द्धनारीश्वर रूप में भी जानते हैं। सनातन धर्म में तीसरी योनि किन्नर नाम से जानी जाती है। मूलत: ये शिव और शक्ति के युगमक का ही फल। किन्नरों में नैगेटिव ऊर्जा को निष्क्रिय करने की शक्ति ईश्वर ने प्रदान की हुई है।

कलयुग में एकमात्र किन्नर ही हैं जिनके श्राप और वरदान फलित होते हैं इसलिए किन्नरों की हाय और आशिष अत्यधिक महत्व रखते हैं। बच्चे का जन्म हो चाहे विवाह किन्नर समाज घर और जातक की शुभाशभ के लिए बलाएं लेकर उसे तोड़ते हैं। जहां एक तरफ किन्नर का निरादर अर्श से फर्श तक ले जाता है वहीं आशीर्वाद रंक से राजा बना देता है।

बुध और मंगल को प्रसन्न करने के लिए किन्नरों की सेवा बहुत शुभ मानी गई है।

लंबे समय से रोग ग्रस्त व्यक्ति किन्नरों को हरे मूंग दान करे।

जिन लड़कियों का विवाह नहीं हो रहा है उन्हें किन्नरों को हरे कांच की चूड़ियां देनी चाहिए।

जो लोग कारोबार की किसी भी समस्या से परेशान हैं । उन्हें किन्नरों को कौड़िया दान करनी चाहिए।

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