लखनऊ । डा0 शकुन्तला मिश्रा राष्ट्रीय पुनर्वास विश्वविद्यायल के डीन एकेडमिक्स प्रो. एपी तिवारी ने कहा कि स्वामी विवेकानन्द विकास का भारतीय मॉडल चाहते थे उनका विचार था कि भारत को चाहिए कि वह समग्र विकास हेतु आर्थिक नीतियों का अपना मॉडल तैयार करे न कि पश्चिमी देशों की नकल करे उनकी चिंता थी कि भारतीय संसाधनों के बिना पर पश्चिमी देश समृद्ध हो रहे हैं डा0 तिवारी आज यहां डा0 शकुन्तला मिश्रा विश्वविद्यायल में विवेकानन्द जयन्ती के उपलक्ष्य में राष्ट्रीय युवा दिवस पर आयोजित ‘भारत के नवनिर्माण में युवाओं की भूमिका‘ विषयक संगोष्ठी को सम्बोधित कर रहे थे युवाओं की बढ़ती हुई बेरोजगारी का जिक्र करते हुए प्रो. तिवारी ने कहा कि आजादी के बाद भारतीय अर्थशास्त्रियों के मस्तिस्क की सिंचाई पश्चिमी देशों के अर्थशास्त्रियों द्वारा की गयी इस तरह राष्ट्र के आर्थिक निर्माण में स्वदेशी नीतियों की अनदेखी की गयी नतीजनत बेरोजगारी बढ़ती गई। ऐसे में भारत के निर्माण के लिये इसकी जरूरत के हिसाब से विकास का मॉडल बनाना होगा संगोष्ठी के संयोजक एवं इंजीनियरिंग एवं टेक्नोलॉजी के डीन प्रो. सी.के. दीक्षित ने संगोष्ठी की विषयवस्तु पर प्रकाश डालते हुए कहा कि स्वामी विवेकानन्द ने पैदल यात्रा कर जीवन का यथार्थपरक ज्ञान लिया उन्होंने नवराष्ट्रवाद की अवधारणा दी शिकागो में दिये अपने भाषण से उन्होंने दुनिया के लोगों पर अपनी अमिट छाप छोड़ी वे विश्व बन्धुत्व की विचारधारा के पोषक थे साथ ही सुख-दुःख में संतुलन की शिक्षा दी इतिहास के विभागाध्यक्ष प्रो. अवनीश चन्द्र मिश्र ने कहा कि स्वामी विवेकानन्द के विचार युवाओं के लिये सदैव प्रेरणादायक रहेंगे डॉ. प्रवीण मिश्र ने कहा कि विवेकानन्द के जीवन से प्रेरणा लेते हुए हमें अपने दायित्वों का निष्ठापूर्वक निर्वहन करना चाहिए डॉ. पवन अग्निहोत्री ने कहा कि स्वामी विवेकानन्द से हमें परोपकार की सीख मिलती है बीटेक के विद्यार्थी देवराज त्रिपाठी ने शिक्षा एवं स्वास्थ्य के क्षेत्र में सुधार की वकालत की विद्यार्थी प्रतीक श्रीवास्तव ने कहा कि भारत अभी भी विकासशील देश इसलिये है क्योंकि युवाओं की क्षमता का पूरा उपयोग नहीं किया गया।
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Saturday, 13 January 2018
स्वामी विवेकानन्द चाहते थे विकास का भारतीय मॉडल : प्रो. तिवारी
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