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Friday, 13 April 2018

पढिये पालिका केआउटसोर्सिंग ठेके में कैसे खेला गया खेल

सुल्तानपुर—- ठेको में पारदर्शिता हो, माफियाओ गुंडो का वर्चस्व  न हो जिसके चलते सूबे की योगी सरकार ने ई टेंडरिंग लागू कर दिया कि घर बैठे ठेकेदार बिना किसी दबाव के चाहे जहा टेंडर डाल सके लेकिन एक कहावत कही गई है कि तू डाल डाल तो मै पात पात इसी तर्ज पर नगर पालिका परिषद के आउटसोर्सिंग के टेंडर प्रकिर्या में  दिखाई पड़ रहा है दिनांक बीते 21 मार्च  को नगर पालिका परिषद द्वारा आउटसोर्सिंग का ई  टेंडर निकाला गया था और बीते 28 मार्च को ई निविदाएं आमंत्रित किया गया लेकिन आउटसोर्सिंग के इस ठेके में बताया जाता है कि सिर्फ चार फर्मो ने ही टेंडर डाला था सवाल यह उठता है कि जब ई टेंडरिंग नही पड़ते थे तब समाचार पत्रों के विज्ञापन को देख कर कई जिलों के फर्मो के लोग टेंडर फार्म खरीदने आते थे आखिर क्या कारण है कि इस टेंडर प्रकिर्या में चार टेंडर पड़े बताया जाता है कि तीन टेंडर सुल्तानपुर के एक टेंडर दूसरे जिले का था जिससे कयास यह लगाया जा सकता है कि इस टेंडर प्रक्रिया में कही न कही पालिका प्रशाशन व एजेंसी मालिक की गठजोड़ है ।
टेंडर में मांगी गई शर्तो को दरकिनार कर जारी कर दिया गया वर्कऑर्डर—–
पालिका प्रशासन ने शर्तो में इतनी लंबी चौड़ी फेरिश्त तैयार किया कि जैसे कि अब ठेको पर काम करने वाले कर्मियों के दिन लौट आएंगे ई पी एफ, ई एस आई कटेगा और कर्मियों को श्रम बिभाग द्वारा निर्धारित दर मिलेगा यह आस ठेके पर कर रहे कर्मियों का था लेकिन उन कर्मियों का आसार उस समय टूट गया जब नगर पालिका द्वारा स्वीकृति दर पर सेवा प्रदाता एजेंसी ने अपना दर श्रम विभाग के दर से बहुत कम रेट कोट कर कर्मियों की आशाओ  पर तो पानी फेर ही दिया वही श्रम विभाग के कानूनों को ठेंगा दिखा दिया बहरहाल सेवाप्रदाता एजेंसी ने श्रम बिभाग के रेट से कम टेंडर तो डाला ही वही पालिका प्रशासन ने अपने ही शर्तो को दरकिनार कर शासन द्वारा देय शासकीय शुल्क से कम रेट पर टेंडर स्वीकृति कर दिया ।
पालिका के राजस्व की भी हुई हानि—-
पिछले कई सालों से  आउटसोर्सिंग के ठेका निविदा में जहाँ लाखो रुपये के राजस्व पालिका परिषद को प्राप्त होता था वही इस ठेके में अगर चार टेंडर ही पड़े है तो सिर्फ 4200 रुपये ही आये होंगे , वही इस आउटसोर्सिंग का ठेका चार विभागों में बंटा था चारो की सिक्योरटी लगभग 2 लाख रुपये जमा कराई जाती थी  आज चारो बिभाग को एक ही एजंसी को दे दिया गया और सिक्योरटी सिर्फ 50000 रुपये ही मांगा गया ।
अपने को ठेका देने के लिये पालिका प्रशासन ने खेला खेल—-
अपने को ठेका मिले दूसरी फर्म टेंडर डाल न पाए इस लिये जिस सेवा प्रदाता एजेंसी को ठेका दिया गया उसी के अनुसार शर्ते लागू की गई जिससे कोई फर्म उन शर्तो को पूरा न कर पाए अपने चहेतों को ठेका मिल जाए ।

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