लखनऊ। इमामिया एजुकेश्नल ट्रस्ट के तत्वावधान में राजनैतिक व गैर राजनैतिक संगठनों के साथ शिया कालेज, बजाज़ा में शाने-शौकत से बनाया गया जश्ने-हुसैन-डे जिसकी अध्यक्षता सैय्यद मौलाना अली हुसैन कुम्मी रिज़वी ने की जिसमें मुख्य रूप से श्री स्वामी सारंग, अयाज़ अहमद, शराबबंदी संघर्ष समिति के अध्यक्ष मुर्तुजा अली, मो0 शहाबुद्दीन, आरबी लाल, मो0 रियाज़, नवाब मीर ज़ाफर अब्दुल्ला, मो0 महबूब रज़ा सिद्दीकी, अल्हाद आरिफ मियाँ नक्शबंदी, मुहम्मद आफ़ाक, मौलाना मिर्ज़ा मुम्ताज़ अली, हाजी मुहम्मद फहीम सिद्दीकी, पीसी कुरील आदि गणमान्य लोगों ने जश्ने-हुसैन-डे के मौके पर छात्र/छात्राओं को पुरस्कार से सम्मानित किया जिसमें खासतौर से मौलाना अली हुसैन कुम्मी रिज़वी ने कहा कि अहले-बैत को मानने वाले जब तक दुनिया में हैं उन पर कोई भी आफत, मुसीबत अल्लाह के अलावा दुनिया की ओर से नहीं आ सकती अच्छे कार्य करें, मुहब्बत का पैगाम देते रहे यही रसूल के घराने वालों ने बताया है इस पैगाम को आम करते रहे इसी के साथ आरिफ मियाँ नक्शबंदी ने कहा कि आज पुत्र/पुत्री माता-पिता की कदर इसलिए नहीं करते क्योंकि बेईमानी उनके घर से प्रारम्भ हो जाती है अपना दूध पिलाने के बजाए विदेशी दूध के डिब्बे जब घरों में आयेगे वो बच्चों को पिलाया जायेगा तो अपने आप ही विदेशी तौर-तरीके भी आ जायेेंगे जो आज खान-पान जैसी चीज़ों में नज़र आ रहा है।
शराबबंदी संघर्ष समिति के अध्यक्ष मुर्तुजा अली ने कहा कि इस देश में नौजवान लोगों को रहने के लिए एक बड़ी लड़ाई प्रारम्भ करनी होगी वो लड़ाई शराब व नशाखोरी के खिलाफ लड़नी होगी मैं जिस रास्ते से निकलता हूँ बियर बार व शराब के ठेके पार्क व माॅल्स व सिनेमा घरों आदि जगहों पर सिगरेट नौजवान इस तरह से पी रहा है जैसे कि उसके जीवन में कोई खुशहाली आने वाली हो जबकि नशे की कोई चीज़ भी इंसान को जिस्मानी नुकसान पहुँचाने अलावा फायदा नहीं पहुँचाती। मैं आप सभी से अपील करता हूँ कि नशे जैसे चीज़ को खत्म करें वरना सरकारे तो चाहती हैं कि आप नशे की हालत में रहे अपने इंसाफ की लड़ाई न लड़ सके और नशे की हालत में ही अपराधी बन जाए जिसमें थाने, चैकी से कचेहरी और जेल तक आपके घरों की गाड़ी कमाई इन लोगों के हाथ लगे और जनता कंगाल हो जाए और सरकारे लूट व खसोट में लगी रहे यह चीज़ भी आपको समझनी होगी। रसूल-अल्लाह के पैगाम को आम करने के लिए पूरे भारत में इसी तरह से कार्यक्रम होंगे गरीब, मज़लूम कमजोरों को साथ लेकर उनके गरीब व मजलूमों के लिए लड़ाई लड़ी जायेेगी।

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