
सीतापुर- नैतिकता की शिक्षा देने वाले स्वयं में कितने नैतिक है यह अगर देखना है तो आर एम पी इण्टर कालेज के प्रधानाचार्य गोविन्द भारती का कारनामा देखिये साथ ही तत्कालीन जिला विद्यालय निरीक्षक राजा भानू प्रताप सिंह की बराबर की हिस्सेदारी रही इस पूरे प्रकरण में गौर करने से पता चलता है कि किस तरह से शिक्षा विभाग में घोटालो को अन्जाम तक पहुचाया जाता है गोबिन्द भारती पर कार्यवाही गतिमान थी लेकिन उस पर कार्यवाही न करके उनको बचाने के लिए तत्कालीन जिला विद्यालय निरीक्षक वेचैन रहते रहे थे।
मालूम हो कि जेल में रहने के दौरान किसी भी प्रकार का अवकाश देय नही होता है यह जानकारी शिक्षा निदेशक के पत्र के सापेक्ष प्रबन्धक को जिला विद्यालय निरीक्षक के द्वारा लिखे गये पत्र से परिलक्ष्ति होता है। जिसमें यह कहा गया है यदि कोई नियमावली हो तो अवकाश के संदर्भ में अवगत कराए गौरतलब है कि जब गोविन्द भारती ने अपना वेतन प्राप्त करने के पूर्व अवकाश स्वीकृत नही कराया और न ही इस सम्बन्ध में प्रबन्ध कार्य कारिणी से कोई वेतन देय सम्बन्धी जानकारी जिला विद्यालय निरीक्षक को दी गयी तो फिर किस आदेश के आधार पर बिना किसी आदेश के वेतन आहरित कर दिया गया यह तो ऐसा मामला है बात सब के सामने आ गयी यदि गहनता से जाॅच की जाए तो कई और मामले भी उजागर हो सकते है। अहम बिन्दु यह है कि सेवा में व्यवधान के वावजूद विभाग उन्हे सेवा सम्बन्धी समस्त लाभ दिये जा रहे है। जब कार्यवाही गतिमान थी उनकी प्रान्नती कैसे कर दी उसके बाद के जो लाभ उन्हे नही मिलने चाहिए वह सभी कैसे मिल रहे है। जानकार बताते है कि सत्ता दल के पदाधिकारी होने के नाते अधिकारियो पर अक्सर दवाव बना कर कार्य कराना इनकी फितरत में है । आखिर जिला विद्यालय निरीक्षक क्यो इतना मेहरवान रहे कि कार्यवाही गतिमान होने के बाद भी सभी प्रकार के लाभ प्राप्त करते रहे इस सम्बन्ध में जब जिला विद्यालय निरीक्षक देवकी सिंह से बात की गयी तो उन्होने गोलमोल जबाब देते हुए कहा कि मेरे पास अभी पत्रावली नही है जानकारी करके बाद में बता पाऐगे, उनकी बात से ऐसा प्रतीत हो रहा था सब जानकारी होने के बाद भी अन्जान हो । क्यो कि देवकी सिंह ने ही प्रबन्धक के पत्र के बिना प्रधानाचार्य के स्वयं के पत्र पर प्रधानाचार्य पद पर तदर्थ प्रान्नति करके वेतन निर्धारण का भी आदेश दे चुके है।

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