पीयूष गोयल की अफसरों को दो टूक, ट्रेनों की स्पीड दोगुनी नहीं कर सके तो कुर्सी छोड़ दो… | Alienture हिन्दी

Breaking

Post Top Ad

X

Post Top Ad

Recommended Post Slide Out For Blogger

Thursday, 31 May 2018

पीयूष गोयल की अफसरों को दो टूक, ट्रेनों की स्पीड दोगुनी नहीं कर सके तो कुर्सी छोड़ दो…

नई दिल्ली। रेलवे ने 2022 तक मालगाडिय़ों की औसत गति दोगुनी करने एवं यात्री गाडिय़ों की गति 25 किलोमीटर प्रति घंटा बढ़ाने का लक्ष्य तय किया है और इसे हासिल करने की रणनीति पर अभी से ही काम शुरू करने के लिए कमर कस ली है। मिशन रफ्तार 2022 को लेकर राजधानी आज रेलवे के शीर्ष प्रबंधन से जुड़े 250 अधिकारियों की एक दिन की कार्यशाला आयोजित की गयी जिसमें उन्हें नौ विषयों पर तत्परता एवं कुशलता से आगे बढऩे के निर्देश दिये गये। इन अधिकारियों में जोनल महाप्रबंधक, कारखानों के महाप्रबंधक तथा क्रिस के मुखिया शामिल थे। रेल मंत्री पीयूष गोयल ने रेल अधिकारियों को सख्त हिदायत दी कि सरकार किसी भी सूरत में 2022 तक गाडिय़ों की औसत गति बढ़ाना चाहती है और जो अधिकारी इसके लिए तैयार नहीं हैं, वे कुर्सी छोड़ दें।
गोयल ने बाद में संवाददाताओं से कहा कि संरक्षा के कार्यों के बैकलाग को तेजी से खत्म किया जा रहा है। ब्रॉडगेज पर सभी बिना चौकीदार वाली लेवल क्रॉसिंग जून तक खत्म कर दी जाएंगी। 2022 के पहले समर्पित मालवहन गलियारे बन कर तैयार हो जाएंगे और रेल ओवर ब्रिज और अंडरपास बन जाएंगे। संरक्षा के काम खासतौर पर ट्रैक नवीकरण का काम काफी हद तक पूरा हो चुका होगा। इस प्रकार से गाडिय़ों की गति बढ़ाने में अधिक बाधा नहीं आएगी। गोयल के अनुसार देश में दरअसल मालगाडिय़ों की औसत रफ्तार 22 किलोमीटर प्रति घंटा है जबकि यात्री ट्रेनों की औसत रफ्तार 47 किलोमीटर प्रति घंटा है। इनमें राजधानी, शताब्दी, दूरंतो जैसी गाडिय़ों को जोड़ दें तो औसत गति 50 किलोमीटर प्रति घंटा आती है। सरकार मेल, एक्सप्रेस गाडिय़ों की औसत गति 72 से 75 किलोमीटर प्रति घंटा करने के लिए प्रतिबद्ध है जबकि राजधानी, शताब्दी, दूरंतो आदि ट्रेनों की भी रफ्तार बढ़ाने की कवायद अलग से चल रही है और उन्हें सेमी हाईस्पीड गाडिय़ों की श्रेणी में लाना है। यात्री को कम समय में यात्रा की सुविधा देने के अलावा व्यापारियों को उनके माल को कम समय में गतंव्य तक पहुंचाना भी इस मिशन रफ्तार का प्रमुख मकसद है।
सूत्रों ने बताया कि मिशन रफ्तार के क्रियान्वयन में बाधा बन रहे कारकों को चिह्नित कर लिया गया है। नान यूनिफार्म सेक्शनल स्पीड, लेविल क्रासिंग, लो स्पीड टार्नआउट, पैसेंजर ट्रेनों की लो स्पीड एक्सलेरेशन/डिसलेरेशन, ट्रेनों की हार्स पावर की पर्याप्ता, ब्रेक्रिंग सिस्टम में टाइम रिस्पांस आदि वे फैक्टर हैं जिनसे ट्रेनों की स्पीड पर असर पड़ता है।
जानकारों का मानना है कि रफ्तार बढऩे से परिचालन लागत कम होगी तथा राजस्व एवं रेलवे का मार्केट शेयर बढ़ेगा। रोडवेज, वाटरवेज तथा एयरवेज के साथ बढ़ रही प्रतियोगिता को देखते हुए रेलवे की यह व्यापारिक रणनीति है। रेलवे चाह रही है कि यातायात के साधन के रूप में उसकी हिस्सेदारी 40 प्रतिशत हो जाए।

No comments:

Post a Comment

Post Top Ad