सोहावल-फैजाबाद।फल पट्टी घोषित सोहावल में उत्पादित केले को भुसावल के केले से बेहतर माना जाता है।इस क्षेत्र में लगभग ५० हेक्टेयर में की जा रही केले की खेती को फ्यूजेरियम रोग ने लकवाग्रस्त कर दिया है।पिछले एक साल से इस रोग ने उत्पादन पर ब्रेक लगा दिया है।
विगत कई वर्षों से क्षेत्र में केले का उत्पादन प्रति हेक्टेयर १००० से १२०० कुन्तल तक उपज यहां किसान लेते रहे हैं।लेकिन गत वर्ष से इस फसल को संक्रमित रोग फ्यूजेरियम बिल्ट ने अपनी चपेट में ले लिया है।जिसे लेकर प्रदेश स्तर के फल एवम उद्यान विभाग के वैज्ञानिकों ने चिन्ता दिखाई है।शनिवार को मगलसी में इन्ही वैज्ञानिकों का एक दल केले के खेतों में पहुंचा।फसल और खेत की मिट्टी को जांचा परखा और किसानों से रु ब रु होकर फसलों में लगने वाली रोग और उत्पादन को लेकर चर्चा किया।खेत भ्रमण के बाद आयोजित कृषक गोष्ठी में बोलते हुये एन आर एम ए डी जी नई दिल्ली एस के चैधरी ने कहाकि इस रोग से बचाव के लिये दवाओं का प्रयोग करने के साथ किसान फसल चक्र अपनायें।पूर्व निदेशक आई सी ए आर करनाल डा० डी के शर्मा ने मगलसी के उत्पादित जैविक गुड़ को परखा और सराहना करते हुए कहा कि जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए शासन स्तर पर प्रयास किये जा रहे हैं और वैज्ञानिकों की खोज जारी है। इस गोष्ठी में मौजूद वैज्ञानिकों में डा० एस राजन,ए डी पाठक,टी दामोदरन, बी के मिश्रा तो थे ही ।प्रगतिशील किसानों में राम कल्प पाण्डेय,सालिक राम,शोभा राम,गणेश,राजेन्द्र वर्मा,राम सुभावन वर्मा,राम सिंह आदि मौजूद रहे।
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Saturday, 2 June 2018
फ्यूजेरियम रोग ने केले के उत्पादन पर लगाया अवरोध
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