
आज की इस भाग दौड़ भरी जिन्दगी में हम लोगों के पास इतना भी समय नहीं होता हि हम ठीक से खानपान पर ध्यान दे पाएं। जिसके कारण हमारे शरीर में मिनरल्स, प्रोटीन और विटामिन सहित कई पोषक तत्व की कमी हो जाती है। जिसके कारण हम हमेशा किसी न किसी बीमारी की चपेट में आते रहते है। इसलिए हम आपके लिए लेकर आए है एक फल के बारें में। जो कि आपके शरीर की हर जरुरत को पूरा करेगा। जी हां सी-बक्थोर्न एक ऐसा फल है। जो कि आपकी शरीर में विटामिन्स, मिनरल्स सहित हर पोषक तत्व की कमी को पूरा करेगा। साथ ही कई गंभीर बीमारियों से भी बचाएगा। जानिए सी-बक्थोर्न के बारें में सबकुछ।
सी बक्थोर्न नाम सुनते ही आपको लग रहा होगा कि यह समुद्र में पाया जाने वाला कोई पौधा है। अगर आप ऐसा सोच रहे हैं तो गलत हैं। जी हां यह स्पेशल पौधा हिमाचल प्रदेश और उत्तरांचल में पाया जाने वाला औषधि का भंडार है। इस रसीले फल का इतिहास बहुत ही पुराना है। इसका सेवन करने से कई गंभीर बीमारियां जैसे कैंसर, डायबिटीज से निजात मिल जाता है। आपको यह बात जानकर हैरानी होगी कि यह दुनिया का ऐसा एकलौता फल है। जिसमें ओमेगा 7 फैटी एसिड पाया जाता है। जिस तरह यह फल हमारे स्वास्थ्य के लिए बेहतर है। उसी तरह की पत्तियां किसी चीज में कम नहीं है। इसके इतने अधिक स्वास्थ्य लाभ है कि आज के समय में 120 से अधिक वैज्ञानिक इसका अध्ययन कर रहे है।
सी-बक्थोर्न में भरपूर मात्रा में ओमेगा फैटी एसिड 3, 6,7 और 9 होते हैं। इसमें भरपूर मात्रा में एंटीऑक्सिडेंट्स पाया जाता है। इसके अलावा इसमें विटामिन सी, ई, अमीनो एसिड, लिपिड, बीटा कैरोटीन, लाइकोपीन के अलावा प्रोविटामिन, खनिज और बॉयोलॉजिकल एक्टिव तत्व पाएं जाते है। यह इम्यून सिस्टम को मजबूत बनाने के लिए एक बेहतरीन फल है।
सदियों से यह फल अपने चिकित्सिय गुणों और राहत देने वाले प्रभावों के कारण चीनी दवाओं में बेशुमार है। बाद में विज्ञान ने भी इसके हेल्दी फायदों के बारे में खुलासा किया।
वैज्ञानिक अध्ययन के अनुसार इसे संजीवनी बूटी के गुण मिलते है। जिसका इस्तेमाल रामायण काल में किया गया था। इसके अलावा 80 की दशक में रूसी अंतरिक्ष विभाग द्वारा सी-बक्थोर्न अंतरिक्ष यात्रियों को पोषण योजना और विकिरण में लड़ने के लिए सप्लीमेंट के रुप में दिया गया था। आपको पता है कि सी-बक्थोर्न भारतीय सैनिको की खुराक का एक हिस्सा है।
खट्टे स्वादवाला यह फल पकने के बाद ही खाया जाता है, जब यह स्वादिष्ट लगता है। जिसके जूस या फिर अन्य रुपों में भी इस्तेमाल किया जाता है। कई रिसर्च में ये बात सामने आई है कि सी-बक्थोर्न हानिकारक फ्री रेडिकल्स की उत्पत्ति और ऑक्सूडेटिव स्ट्रेस को भी कम करता है।
इसका सेवन करने से यह शरीर की वृद्धि, विकास और उसे स्वस्थ रखता है।
अन्य कोशिकाओं संरचनाओं के लिए निर्णाण ब्लॉक के रुप में काम करता है।
ठंडे शरीर में इंसुलेशन देता है। यह एक एथलीट को बेहतर प्रदर्शन में भी मदद करता है। यह एथलीटो की सहनशक्ति बढ़ाने के साथ-साथ कॉम्पिटिशन के बाद दोबारा स्वस्थ्य रखता है।
शोधकर्ताओं के अनुसार, इसमें मौजूद फास्फेटिडाइलेसेरिन(पीएस) शरीर के उतकों को टूटने से बचाता है। साथ ही यह मानसिक तनाव, कैंसर, डायबिटीज, मांसपेशियों को मजबूत करता है। यह थॉयरॉयड को कंट्रोल करता है, लीवर को रखे हेल्दी
इसमें पाया जाने वाला एंटीऑक्सीडेंट ब्रेन ट्यूमर के विकास को रोकता है।
रेडियोप्रोटेक्टिव गुण होने के कारण शरीर को विकीरण से बचाता है। हद्य को हेल्दी,रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है। साथ ही शरीर के जोड़ो को हेल्दी रखता है वजन को कंट्रोल
करता है। बाल, नाखून और स्किन को भी फायदा पहुंचाता है।
इस बेरी को तोड़ने के 6 घंटे के अंदर ही इसका इस्तेमाल कर लिया जाता है। जिससे कि उसमें मौजूद तत्व बरकरार रहें। इसमें किसी भी तरह का रंग या फिर टेसट के लिए कुछ नहीं मिलाया जाता है। इसका आसानी से घर पर जूस निकाल कर पी सकते है।

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