मथुरा। कृषि विज्ञान केन्द्र मथुरा के विशेषज्ञ दल ने संस्कृति विश्वविद्यालय में फसल अवशेष प्रबंधन (धान पराली) पर आधारित एक जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया। इसमें पीपीटी के माध्यम से पहले बच्चों को सम-हजयाया गया। तदोपरांत निबंध प्रतियागिता आयोजित की गई। उनसे संकल्प कराया गया कि वह गांव-ंउचयगली तक पराली जलाने के बजाय उससे फसल उत्पादन ब-सजयाने के तरीके सीखकर किसानों में उनका प्रचार करेंगे। विवि प्रशासन की ओर से आश्वासन दिया गया कि वह कृषि क्षेत्र में तकनीकी हस्तांतरण के लिए विवि के कृषि स्नातकों का अपयोग धरातल पर लेजाकर करेंगे। हर गांव में पराली न जलाने वाले लोगों को भी लिस्टेड करेंगे। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि सांसद प्रतिनिधि जनार्दन शर्मा ने कहा कि मथुरा में कई तरह की दिक्कतें हैं लेकिन किसानों की समस्याओं में सांसद हेमा मालिनी सदैव तत्पर रहती हैं। वह पूर्व में भी ओलवृष्टि पीडिघ्त किसानों के दल के साथ दिल्ली तक दौड़ी थीं।
केवीके के प्रोग्राम कोऑर्डिनेटर डा. एसके मिश्रा ने कहा कि जमीन, पानी और पर्यावरण बचेगा तभी संतति बचेगी। उन्होंने कृषि स्नातकों से अपील की कि वह लगातार बढ रही जनसंख्या को ध्यान में रखकर कार्य करें। सभी की निर्भरता खेती पर सबसे ज्यादा बढनी है। विभिन्न रूपों में रेजेड्यू को जलाना बेहद खतरनाक है। इसकी जानकारी हर किसान तक पहुंचनी चाहिए।
पॉवर प्वायंट प्रजेंटेशन डा. रवीन्द्र कुमार राजपूत ने दिया। उन्होंने बताया कि मथुरा में 50 हजार हैक्टेयर में धान होता है। इसमें से अधिकांश पाराली जलाई जाती है। यह ब्रज के लिए बेहद खतरनाक स्थिति है। वह 130 करोड़ लोगों को हेल्दी भोजन देने की दिशा में सोचें, पर्यावरण को शुद्ध बनाए रखने की दिशा में काम करें ।
उप कुलपति डा. अभय कुमार ने कहा कि संस्कृति विवि के युवा अपने ज्ञान कौशल और सामाजिक दायित्वों का निर्वहन कर विवि का गौरव बढाएंगे। निबन्ध प्रतियोगिता में कु. जानवी बाजपेई प्रथम, सृष्टि गुप्ता द्वितीय, यू ज्योत्सना तृतीय स्थान पर रहीं। रिंकी कुमारी एवं वी निखिला को सांत्वना पुरस्कार के रूप में बैग प्रदान किए गए। डा. बीएल यादव ने पराली को पशु चारे के रूप में प्रयोग करने के तरीके बताए।
केवीके की ओर से वीसी, प्रो. वीसी एवं ओएसडी मीनाक्षी शर्मा को सम्मानित भी किया गया। अतिथियों का स्वागत विवि प्रशासन ने किया। संचालन कृषि विभागाध्यक्ष एनएन सक्सेना ने किया तथा धन्यवाद ज्ञापन डा. जुएब ने किया।
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Wednesday, 31 October 2018
वैज्ञानिकों बोले पराली से हो सकता है पशुओं के चारे का संकट दूर
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