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Tuesday, 30 October 2018

तो क्या खूनी संघर्ष की ओर बढ़ रहा श्रीलंका

नई दिल्ली। श्रीलंका में राजनीतिक संकट और गहरा गया है। पूर्व राष्ट्रपति महिन्दा राजपक्षे ने सोमवार को देश के नये प्रधानमंत्री का पद भार संभाल लिया, इसके साथ ही इस पद से अपदस्थ कर दिए गये रानिल विक्रमसिंघे ने कहा है कि उन्हें संसद में अभी तक बहुमत हासिल है। इन सबके बीच स्पीकर ने कहा है कि यदि इस राजनीतिक संकट का तुरंत हल नहीं निकाला गया तो सड़कों पर भारी रक्तपात होने की उम्मीद है। राष्ट्रपति सिरीसेना ने शुक्रवार को पूरे देश को हैरत में डालते हुए विक्रमसिंघे को प्रधानमंत्री पद से बर्खास्त कर दिया था और राजपक्षे को नया प्रधानमंत्री नियुक्त करने की घोषणा की थी।

राजपक्षे ने प्रधानमंत्री सचिवालय में अपना पद भार संभाल लिया है। अपदस्थ कर दिए गये प्रधानमंत्री विक्रमसिंघे इसका उपयोग नहीं करते थे। सिरीसेना ने संसद को 16 नवंबर तक स्थगित कर दिया क्योंकि विक्रमसिंघे ने अपना बहुमत साबित करने के लिए संसद का आपात सत्र बुलाने का अनुरोध किया था।

राष्ट्रपति मैत्रीपाला सिरीसेना के नये मंत्रिमंडल को भी शपथ दिलायी गयी, जिसमें राजपक्षे का नाम वित्त एवं आर्थिक मामलों के नये मंत्री के रूप में है। नये मंत्रिमंडल में महज 12 मंत्री हैं जिनमें एक राज्य मंत्री एवं एक उप मंत्री है। नये मंत्रियों में तीन वे भी हैं जो विक्रमसिंघे की यूनाइटेड नेशनल पार्टी (यूएनपी) से पाला बदलकर आए हैं।

मंत्रिमंडल का एक नया चेहरा डगलस देवानंद हैं। जाफना के उत्तरी जिले से आने वाले देवानंद को पुनस्र्थापन एवं पुनर्वास, उत्तरी विकास एवं हिन्दू धार्मिक मामलों का मंत्री बनाया गया है। अरूमुगम थोंडामन को पर्वतीय क्षेत्र विकास का मंत्री बनाया गया है। वह केन्द्रीय चाय बागान में भारतीय मूल के तमिलों का प्रतिनिधित्व करते हैं।

श्रीलंकाई संसद के अध्यक्ष (स्पीकर) कारू जयसूर्या ने आगाह किया है कि रक्तपात हो सकता है क्योंकि कुछ लोग इस विषय को सड़कों पर सुलझाना चाहते हैं। जयसूर्या ने कैंडी में संवाददाताओं से कहा कि इस मुद्दे का समाधान संसद के भीतर निकाला जाना चाहिए। ‘‘कुछ लोग इसका समाधान बाहर सड़कों पर करना चाहते हैं। यदि इसकी अनुमति दी जाती है तो रक्तपात हो सकता है। दो लोग पहले ही मारे जा चुके हैं। देश को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नुकसान पहुंचेगा।’’

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