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Monday, 12 November 2018

श्री बाबूराम त्रिवेदी सरस्वती शिशु मंदिर अल्लीपुर के बच्चों का शैक्षिक एवं धार्मिक भ्रमण

हरिद्वार- ऋषिकेश में सांस्कृतिक धरोहर को जाना, समझा
हरदोई -संस्कारवान शिक्षा में अग्रिम भूमिका निभाने वाले श्री बाबूराम त्रिवेदी सरस्वती शिशु मंदिर अल्लीपुर के बच्चों का शैक्षिक एवं धार्मिक भ्रमण हेतु पर्यटन दल हरिद्वार ऋषिकेश के लिए रवाना हुआ। पर्यटन दल की देखभाल हेतु डॉ शीर्षेन्दुशील त्रिवेदी “विपिन”, डॉ शशिकांत पांडेय और शिशु मंदिर के अध्यापक /अध्यापिकाएं साथ में गए।भ्रमण दल शांतिकुंज हरिद्वार में पहुंचा जहां सर्वप्रथम हर की पैड़ी में सभी ने स्नान किया और मनसा देवी मंदिर के दर्शन किए।हरिद्वार एवं ऋषिकेश के विभिन्न दर्शनीय स्थानों पर परमार्थ निकेतन, गीता भवन, स्वर्ग आश्रम, मानव भवन, त्रिवेणी घाट, छोटा रामेश्वरम और राम झूला पहुंचकर देवी देवताओं को नमन किया। इसके पश्चात भूमा निकेतन, कांच मंदिर, वैष्णो माता मंदिर, भारत माता मंदिर के दर्शन किए। बच्चों ने प्रात उठकर यज्ञशाला में प्रतिभाग किया। उसके बाद गायत्री मंदिर ,भटका हुआ देवता मंदिर, हिमालय साधना मंदिर, भारतीय संस्कृति देव दर्शन मंदिर ,जड़ी-बूटी संग्रहालय एवं नर्सरी कक्षा, अखंड ज्योति दर्शन, विवेकानंद कक्ष,समाधि स्थल आदि पवित्र स्थानों के दर्शन किए। भ्रमण दल की अध्यापिका प्रियंका यादव ने कहा कि सभी के मन में ईश्वर के प्रति आस्था का निर्माण हुआ तथा बच्चों को धार्मिक स्थल की विशेषताओं का ज्ञान प्राप्त हुआ। बच्चों ने उत्साह पूर्वक भ्रमण का पूरा आनंद लिया। शिक्षिका अंजलि ने बताया कि शैक्षिक भ्रमण से बच्चों का किताबी ज्ञान को व्यवहारिक स्वरूप से रूबरू होकर ज्ञान प्राप्त करते हैं। वर्तिका ने कहा कि शांतिकुंज में प्रातः काल से रात्रि विश्राम तक वैदिक भारतीय संस्कृति आधारित जीवन चर्या को बच्चों ने एक दिवस में लाभ प्राप्त करके प्रायोगिक रूप से महसूस किया। उन्होंने आध्यात्मिक जीवन से सर्वश्रेष्ठ राष्ट्रहित बनने की क्रिया को गायत्री मंत्र की उपयोगिता के बारे में सीखा। आरती जी ने बताया कि बच्चों ने पहाड़ और गंगा नदी के तट पर स्थित हरि की पैड़ी पर धार्मिक अनुष्ठानों को प्रत्यक्ष रूप से देख कर अपने आत्मबल को  अभिसिंचित किया ।डॉ पांडे ने कहा कि शैक्षिक भ्रमण बच्चों में सर्वांगीण विकास की प्रक्रिया का एक अभिन्न अंग है जिससे बच्चे वास्तविकता से परिचित हों। भावी जीवन में राष्ट्र निर्माण में संलग्न हो, यही विद्यालय परिवार का प्रयास है।

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