गायों के संरक्षण और संवर्धन के माध्यम से देश के ग्रामीण सुदृढ़ता, सामाजिक और आर्थिक विकास की प्रतिबद्धता के लिए भारत सरकार ने पशुपालन और डेयरी विभाग,कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के तहत “राष्ट्रीय कामधेनु अयोग” की स्थापना की है। गुजरात गौ सेवा एवं गोचर विकास बोर्ड के पूर्व चेयरमैन, डॉ. वल्लभभाई कथिरिया को अयोग का चेयरमैन नियुक्त किया गया है। संसद में बजट पेश करने के दौरान प्रधान मंत्री, नरेन्द्र मोदी ने देश में गाय और उसकी संतति संवर्धन के लिए “राष्ट्रीय कामधेनु अयोग” स्थापित करने की घोषणा की की थी।
ज्ञात रहे पहली फरवरी को लोकसभा में पेश किए गए अंतरिम बजट में गायों के लिए एक योजना स्थापित करने का प्रस्ताव रखा गया था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यह कहा कि सरकार गायों की संवर्धन एवं विकास के लिए जो वादा किया था वह पूरा करने के लिए गाय के स्थायी आनुवंशिक उन्नयन में सुधार के लिए “राष्ट्रीय कामधेनु आयोग” की शीघ्र ही स्थापना करेंगे। यह आयोग और संरक्षण , संवर्धन के साथ साथ आवश्यक संसाधनों को उपलब्ध कराने और गायों के उत्पादकता को बढ़ाने के लिए कार्य करेगा। आयोग गायों के लिए कानूनी व्यवस्था और कल्याणकारी योजनाओं के कार्यान्वयन का भी कार्य करेगा। केंद्रीय वित्त मंत्री पीयूष गोयल अपने बजट भाषण के दौरान यह घोषणा किया था कि गौ संवर्धन के लिए 750 करोड़ रु. के बजट का प्रावधान किया गया है। . भारत सरकार द्वारा 21 फरवरी, 2019 को जारी किए गए आदेश के अनुसार, गुजरात के गौसेवा और गौचर विकास बोर्ड के पूर्व चेयरमैन डॉ. वल्लभभाई कथिरिया, अयोग के चेयरमैन होंगे। डॉ.काथिरिया सौराष्ट्र में एक प्रसिद्ध कैंसर सर्जन हैं। वह बचपन से ही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के कार्यकर्ता रहे हैं और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) में विभिन्न पदों पर सेवाएं दी है और सभी संगठनों में उनका कार्य उत्तम रहा है । उनके उल्लेखनीय योगदान में चाहे 126 बार रक्तदान के अनुपम सेवाओं की बात करें या आम आदमी से लेकर ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में निवास करने वाले बेसहारा मजदूर या सुदूर गांव में बसने वाले गरीब और कमजोर तबके के लोगों के प्राण रक्षा के लिए रक्त दान की है। डॉ. कथिरिया हमेशा साफ-सुथरी, निष्पक्ष एवं निर्भीक छवि के राजनेता और सामाजिक कार्यकर्ता के रूप में जाने जाते हैं। अपने उत्कृष्ट सेवाओं के माध्यम से 100 से अधिक गैर सरकारी प्रतिष्ठानों और सामाजिक संगठनों के साथ सेवारत रहे हैं। डॉ. कथरिया ने हमेशा शिक्षा, स्वास्थ्य, सामाजिक उत्थान के लिए संघर्षशील रहे हैं । अपने अमूल्य सेवाओं के माध्यम से गरीबों और और सामाजिक रूप से पिछड़े वर्गों के भलाई के लिए 10 से अधिक प्रसिद्ध संगठनों के अध्यक्ष और ट्रस्टी भी हैं। डॉ. कथिरिया ने बड़े संघर्षों के साथ वाटर हार्वेस्टिंग , पर्यावरण संरक्षण, ग्रामीण विकास और गौसेवा के क्षेत्र में कई उपलब्धियां हासिल की है। वर्ष 2001 में आए गुजरात के विनाशकारी भूकंप पीड़ितों की सुरक्षा, राहत प्रबंधन, पुनर्वास और समन्वय के लिए आज भी लोग याद करते हैं। डॉ. कथिरिया सबसे लोकप्रिय एम.पी. के रूप में राजकोट से 4 बार , वर्ष 1996-2009 तक लोक सभा सीट जीता है और स्वतंत्रता के बाद पहली बार लगातार जीतने वाले सांसद रहे हैं । इस प्रकार लोकसभा जीतने का एक अनोखा रिकॉर्ड बनाया है। वर्ष 1998 में राजकोट से सर्वाधिक वोट से चुनाव जीतकर 12वीं लोकसभा मैं पहुंचने का खिताब भी मिल चुका है । सांसद ही नहीं , केंद्रीय राज्य मंत्री के रूप में भी सेवाएं दे चुके डॉ. कथिरिया वर्ष 1999-2004 की अवधि में अटल बिहारी वाजपेयी सरकार में भारी उद्योग, मानव संसाधन और स्वास्थ्य मंत्री भी रह चुके हैं। डॉ. कथिरिया सदैव पार्टी की विचारधारा और आदर्शों का अनुसरण करते हुए देश की भलाई के लिए समर्पित रहे है। डॉ.कथिरिया की उल्लेखनीय योगदान के लिए अनगिनत राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कारों से अलंकृत किया जा चुका है।
केंद्र सरकार के आदेश के अनुसार, पशुपालन और डेयरी सचिव राष्ट्रीय कामधेनु अयोग के उपाध्यक्ष का कार्य करेंगे। साथ ही विभिन्न क्षेत्रों के अन्य गौ संवर्धन और संरक्षण विशेषज्ञ सदस्यों को भी नियुक्त किया किया गया है। केंद्र सरकार के पशुपालन और डेयरी विभाग के संयुक्त सचिव को आयोग का सदस्य – सचिव नियुक्त किया गया है।

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