गोरखपुर 23 फरवरी।खाद कारखाना मैदान में भाजपा किसान मोर्चा के राष्ट्रीय अधिवेशन को संबोधित करते हुए अमित शाह ने कहा कि इस किसान कुंभ में सभी किसानों का स्वागत है। जिस भूमि पर अधिवेशन हो रहा है, यह गुरु गोरक्षनाथ की तपोभूमि है। यहां आकर हम धन्य महसूस कर रहे हैं। मेरे ऊपर महंत अवेद्यनाथ का बहुत स्नेह रहा है। 1986 के कुम्भ में उनके मार्गदर्शन में ही मैं कल्पवास में रहा था। पुलवामा हमले पर शाह ने कहा कि पाक प्रेरित आतंकवादियों ने कायरतापूर्ण तरीके से घात लगाकर 40 से अधिक जवानों को शहीद कर दिया। पूरा देश शहीद जवानों के साथ खड़ा है। हम सभी भी उनके साथ खड़े हैं। किसान मोर्चा के कार्यकर्ता संकल्प लेकर जाएं कि हम ऐसी मजबूत सरकार बनाएंगे जो आतंकवाद का खात्मा कर देंगे।उन्होंने कहा कि हमारे देश की पहचान की कृषि है। किसान हमारी पहचान हैं, 160 मिलियन हेक्टेयर भूमि पर खेती होती है। हमारा किसान पूरे देश का पेट भरने को सक्षम है। बाहर से एक दाना भी नहीं लाना पड़ता। 70 साल तक जितनी भी सरकारें आयी उन्होंने किसानों को वोट बैंक समझकर टुकड़ा-टुकड़ा करने का काम किया। नरेंद्र मोदी की सरकार इकलौती सरकार है जिसने वैज्ञानिक आधार पर किसान की आय दोगुना करने का काम किया। राहुल बाबा कहते हैं कि किसानों की आय दुगुना करना आसान नहीं है लेकिन हम 2022 तक आय दोगुना करके दिखाएंगे।
उन्होंने सवाल उठाया कि किसानों के बारे में राहुल गांधी हमें बताएंगे ? जिन्हें खुद यह नहीं पता कि आलू जमीन के ऊपर उगता है या नीचे। देश की जनता ने क्रांतिकारी निर्णय लिया। पहली बार गैर कांग्रेसी सरकार को पूर्ण बहुमत मिला। हमने किसान को कभी भिक्षुक नहीं समझा। किसान सम्मान के साथ पसीना बहाने वाला है, किसानों की समस्या कई टुकड़ों में बंटी थी। धीरे-धीरे मोदी ने किसानों की समस्या का समाधान किया।
अमित शाह ने कहा कि पहले यूरिया की जो सब्सिडी होती थी, उसे कालाबाजारी वाले खा जाते थे। मोदी ने प्रयोग किया तो यूरिया को नीम कोटेड कर दिया। अब वह कालाबाजारी में जा ही नहीं सकती। किसानों की बेरोजगारी दूर करने का काम मोदी ने किया। किसान को मालूम नहीं था को उसकी भूमि कैसी है। सॉइल हेल्थ कार्ड लाकर किसानों को वैज्ञानिक मार्गदर्शन दिया गया। उत्पादन बढ़ेगा तो आय अपने आप दोगुनी हो जाएगी। राहुल गांधी पर हमला बोलते हुए अमित शाह ने कहा कि राहुल बाबा के पैर में खेत की गीली मिट्टी नहीं लगी है, वह क्या किसानों की बात करते हैं। किसान के लिए काम करना है तो किसान के खेत में जाना पड़ेगा।

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