लखनऊ। प्राथमिक उपचार के तीन आयामों, जीवन सरंक्षण, अग्रिम बचाव एवं स्वास्थ्य की पदोन्नति केलिए किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय के पैरामेडिकल साइंसेज के तत्वावधान में आज तृतीय सतत पैरामेडिकल प्रशिक्षण का आयोजन किया गया।जिसमें विष, बर्न,हार्ट अटैक,ब्रेन स्ट्रोक,फ्रैक्चर,मिर्गी,चोट लगना,रक्त स्राव एवं सर्प दंष के प्रथमोउपचार की जानकारी दी गई।
इस कार्यक्रम के उद्घाटन सत्र में मुख्य अतिथि चिकित्सा विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो एम.एल.बी.भट्ट ने बताया कि प्राथमिक उपचार के द्वारा सबसे न्यूनतम मूल्य में जीवन बचाया जा सकता है। जनसामान्य के थोड़े से प्रयास के द्वारा जीवन रक्षण के लिए यह अत्यंत महत्वपूर्ण कार्य है। साथ ही कार्यक्रम की विशिष्ट अतिथि,नर्सिंग डीन,प्रो मधुमति गोयल ने कहा कि जो पढ़े उसे गुणें भी एवं पैरामेडिकल एवं नर्सिंग कर्मियों को मरीजों तथा तीमारदारों से सदैव अच्छा व्यवहार करना चाहिए ।
डीन स्टूडेंट वेलफ़ेयर, प्रो. जी.पी.सिंह ने बताया कि उच्चतम न्यायालय ने भी यह छूट दी है कि जो व्यक्ति प्राथमिक उपचार करता है उसको पूछताछ के लिए रोकने की बाध्यता नहीं है।

डीन पैरामेडिकल, प्रोफेसर विनोद जैन ने सतत पैरामेडिकल प्रशिक्षण के बारे में बताते हुए कहा कि यह केजीएमयू का अनूठा कार्यक्रम है, जिसमे छात्र-छात्राएं ही विषय को तैयार करके विशेषज्ञ एवं अन्य छात्र-छात्राओं के समक्ष प्रस्तुत करते हैं तथा स्रोताओं की जिज्ञासा का समाधान भी करते हैं। केवल वक्तव्य सुनने से 10 प्रतिशत ही याद रहता है परंतु यदि विषय को समझ कर पढ़ाया जाए तो विषय याद करने की क्षमता 90 प्रतिशत हो जाती है। इसी के प्रकार छात्र-छात्राओं को अधिकाधिक शैक्षिक लाभ देने के लिए इस प्रकार के कार्यक्रम का आयोजन किया जाता है। ।

कार्यक्रम में 22 स्टूडेंट्स के द्वारा प्राथमिक उपचार पर अपना प्रस्तुतिकरण दिया। कार्यक्रम में डॉ. विनोद जैन एवं डॉ. अंकिता जोहरी द्वारा लिखित पुस्तिका एवं पोस्टर का भी विमोचन किया गया। पुस्तिका में सह-लेखन श्यामजी मिश्रा, राघवेन्द्र कुमार एवं वीनू दुबे,प्रोफेसर डॉ. अतिन सिंघई व अन्य लोग उपस्थ्ति रहें ।

No comments:
Post a Comment