Poems On Daughter | Hindi Poems On Beti | बेटियों पर 10 कविताएँ | Alienture हिन्दी

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Thursday, 14 February 2019

Poems On Daughter | Hindi Poems On Beti | बेटियों पर 10 कविताएँ

Poems On Daughter | Hindi Poems On Beti | बेटियों पर 10 कविताएँ

Poems On Daughter

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Poem On Daughter

घर की जान होती हैं बेटियाँ

घर की जान होती हैं बेटियाँ
पिता का गुमान होती हैं बेटियाँ
ईश्वर का आशीर्वाद होती हैं बेटियाँ
यूँ समझ लो कि बेमिसाल होती हैं बेटियाँ

बेटो से ज्यादा वफादार होती हैं बेटियाँ
माँ के कामों में मददगार होती हैं बेटियाँ
माँ-बाप के दुःखको समझे, इतनी समझदार होती हैं बेटियाँ
असीम प्यार पाने की हकदार होती हैं बेटियाँ

बेटियों की आँखे कभी नम ना होने देना
जिन्दगी में उनकी खुशियाँ कम ना होने देना
बेटियों को हमेशा हौसला देना, गम ना होने देना
बेटा-बेटी में फर्क होता हैं, ख़ुद को ये भ्रम ना होने देना

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Poem On Beti

बेटी

बेटी की प्यार को कभी आजमाना नहीं
वह फूल है, उसे कभी रुलाना नहीं
पिता का तो गुमान होती है बेटी
जिन्दा होने की पहचान होती है बेटी

उसकी आंखें कभी नम न होने देना
उसकी जिन्दगी से कभी खुशियां कम न होने देना
उंगली पकड़ कर कल जिसको चलाया था तुमने
फ़िर उसको ही डोली में बिठाया था तुमने

बहुत छोटा सा सफ़र होता है बेटी के साथ
बहुत कम वक्त के लिये वह होती हमारे पास
असीम दुलार पाने की हकदार है बेटी
समझो भगवान् का आशीर्वाद है बेटी

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Poem On Daughter

मैं बोझ नहीं हूँ

शाम हो गई अभी तो घूमने चलो न पापा
चलते चलते थक गई कंधे पे बिठा लो न पापा
अँधेरे से डर लगता सीने से लगा लो न पापा
मम्मी तो सो गई
आप ही थपकी देकर सुलाओ न पापा
स्कूल तो पूरी हो गई
अब कॉलेज जाने दो न पापा
पाल पोस कर बड़ा किया
अब जुदा तो मत करो न पापा
अब डोली में बिठा ही दिया तो
आँसू तो मत बहाओ न पापा
आपकी मुस्कुराहट अच्छी हैं
एक बार मुस्कुराओ न पापा
आप ने मेरी हर बात मानी
एक बात और मान जाओ न पापा
इस धरती पर बोझ नहीं मैं
दुनियाँ को समझाओ न पापा

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Poem On Beti

मैं बेटी वरदान हूँ

माँ दुर्गा की शक्ति हूँ
मैं भी पढ़ लिख सकती हूँ
मात पिता की सेवा जानूँ
अपने फ़र्ज़ को मैं पहचानूँ
जब थी इस दुनिया मैं आई
सारे शहर में बँटी मिठाई
मुझको लाड प्यार से पाला
स्कूल भेज सिखाई वर्ण माला
मैं अपने घर की शान हूँ
हाँ मैं बेटी वरदान हूँ

अनुष्का सूरी

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Poem On Daughter

मेरी लाडो

फूलों सी नाज़ुक, चाँद सी उजली मेरी गुड़िया
मेरी तो अपनी एक बस, यही प्यारी सी दुनिया

सरगम से लहक उठता मेरा आंगन
चलने से उसके, जब बजती पायलिया

जल तरंग सी छिड़ जाती है
जब तुतलाती बोले, मेरी गुड़िया

गद -गद दिल मेरा हो जाये
बाबा -बाबा कहकर, लिपटे जब गुड़िया

कभी घोड़ा मुझे बनाकर, खुद सवारी करती गुड़िया
बड़ी भली सी लगती है, जब मिट्टी में सनती गुड़िया

दफ्तर से जब लौटकर आऊं
दौड़कर पानी लाती गुड़िया

कभी जो मैं, उसकी माँ से लड़ जाऊं
खूब डांटती नन्ही सी गुड़िया

फिर दोनों में सुलह कराती
प्यारी -प्यारी बातों से गुड़िया

मेरी तो वो कमजोरी है, मेरी सांसो की डोरी है
प्यारी नन्ही सी मेरी गुड़िया

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Poem On Beti

लाड़ली बेटी

लाड़ली बेटी जब से स्कूल जाने हैं लगी
हर खर्चे के कई ब्योरे माँ को समझाने लगी

फूल सी कोमले और ओस की नाजुक लड़ी
रिश्तों की पगडंडियों पर रोज मुस्काने लगी

एक की शिक्षा ने कई कर दिए रोशन चिराग
दो-दो कुलों की मर्यादा बखूबी निभाने लगी

बोझ समझी जाती थी जो कल तलक सबके लिए
घर की हर बाधा को हुनर से वहीं सुलझाने लगी

आज तक वंचित रही थी घर में ही हक के लिए
संस्कारों की धरोहर बेटों को बतलाने लगी

वो सयानी क्या हुई कि बाबुल के कंधे झुके
उन्हीं कन्धों पर गर्व का परचम लहराने लगी

पढ़-लिखकर रोजगार करती, हाथ पीले कर चली
बेटी न बेटों से कम, ये बात सबको समझ में आने लगी

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Poem On Daughter

बेटी जो एक खूबसूरत एहसास होती हैं

बेटी जो एक खूबसूरत एहसास होती हैं
निश्छल मन के परी का रूप होती हैं
कड़कती धुप में शीतल हवाओ की तरह
वो उदासी के हर दर्द का इलाज़ होती हैं

घर की रौनक आंगन में चिड़िया की तरह
अन्धकार में उजालों की खिलखिलाहट होती है
सुबह सुबह सूरज की किरण की तरह
चंचल सुमन मधुर आभा होती हैं

कठनाइयों को पार करती हैं असंभव की तरह
हर प्रश्न का सटीक जवाब होती हैं
इन्द्रधनुष के साथ रंगों की तरह
कभी माँ, कभी बहन, कभी बेटी होती हैं

पिता की उलझन साझा कर नासमझ की तरह
पिता की पगड़ी गर्व सम्मान होती हैं
बेटी जो एक खूबसूरत एहसास होती हैं
बेटी जो एक खूबसूरत एहसास होती हैं

सीमा भट्टी

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Poem On Beti

बेटी हूँ मैं

क्या हूँ मैं, कौन हूँ मैं, यही सवाल करती हूँ मैं
लड़की हो, लाचार, मजबूर, बेचारी हो, यही जवाब सुनती हूँ मैं

बड़ी हुई, जब समाज की रस्मों को पहचाना
अपने ही सवाल का जवाब, तब मैंने खुद में ही पाया
लाचार नही, मजबूर नहीं मैं, एक धधकती चिंगारी हूँ
छेड़ों मत जल जाओगें, दुर्गा और काली हूँ मैं

परिवार का सम्मान, माँ-बाप का अभिमान हूँ मैं
औरत के सब रुपों में सबसे प्यारा रुप हूँ मैं
जिसकों माँ ने बड़े प्यार से हैं पाला
उस माँ की बेटी हूँ मैं, उस माँ की बेटी हूँ मैं

सृष्टि की उत्पत्ति का प्रारंभिक बीज हूँ मैं
नये-नये रिश्तों को बनाने वाली रीत हूँ मैं
रिश्तों को प्यार में बांधने वाली डोर हूँ मैं
जिसकों हर मुश्किल में संभाला
उस पिता की बेटी हूँ मैं, उस पिता की बेटी हूँ मैं

वन्दना शर्मा

Beti Shayari | बेटी पर शायरी | Shayari On Daughter | Bitiya Shayari

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